Mindset Makers

प्रश्न:

सिविल सेवा परीक्षा में आवेदन करने के लिए न्यूनतम योग्यता क्या होनी चाहिए?

उत्तर:

  • सिविल सेवा परीक्षा में ऐसी सभी उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने स्नातक स्तर या इसके समकक्ष कोई डिग्री प्राप्त की हो।
  • जिन उम्मीदवारों के पास ऐसी व्यवसायिक और तकनीकी योग्यताएं हो, जो सरकार द्वारा व्यवसायिक व तकनीकी डिग्रियों के समकक्ष मान्यता रखते हैं, वे भी इस परीक्षा में बैठ सकते हैं।

प्रश्न:

यदि किसी ने एमबीबीएस अथवा कोई अन्य चिकित्सा परीक्षा पास की हो, लेकिन अपना इंटर्नशिप पूरा नही किया हो, तो क्या वह इस परीक्षा को देने के लिए योग्य होगा?

उत्तर:

  • ऐसे उम्मीदवार को भी परीक्षा के लिए आवेदन करने के प्रपत्र के साथ संबंधित विश्वविद्यालय था संस्था के संबंधित सक्षम प्राधिकारी से अनुप्रमाणित कराकर अपनी मूल डिग्री अथवा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे कि उन्होंने डिग्री प्रदान करने हेतु सभी अपेक्षाएँ (जिसमें इण्टर्नशिप पूरा करना की शामिल है) पूरी कर ली है।
  • ऐसे सभी अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में भाग लेने के लिए पात्र होंगे, लेकिन सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में बैठने के समय आप सभी को मुख्य परीक्षा के लिए आवेदन प्रपत्र के साथ-साथ स्नातक अंतिम वर्ष में उत्तीर्ण होने का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा।
  • प्रारम्भिक परीक्षा में बैठने को परीक्षा में बैठने का एक अवसर माना जायेगा।
  • यदि उम्मीदवार प्रारम्भिक परीक्षा के किसी एक प्रश्न-पत्र में भी परीक्षा दे देता है, तो इसे उसका परीक्षा के लिए एक प्रयास समझा जायेगा।
  • उम्मीदवारी रद्द होने के बावजूद उम्मीवार की परीक्षा में उपस्थिति को एक अवसर माना जायेगा।
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प्रश्न:

मेरी परिवारिक पृष्ठभूमि ग्रामीण है और आर्थिक स्थिति की अच्छी नहीं है। क्या ऐसे में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की जा सकती है? कुछ लोग सलाह देते है कि पहले कुछ छोटी परीक्षाओं (SSC, PCS आदि) की तैयारी कर के नौकरी लेनी चाहिए और इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी करना चाहिए?

उत्तर:

  • आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि का सिविल सेवा परीक्षा में सफलता से कोई सीधा संबंध नहीं है ऐसे अनेक ग्रामीण पृष्ठभूमि और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थी है जो प्रत्येक वर्ष इस परीक्षा में सफल होते है।
  • लेकिन इसके साथ ही साथ यह भी सच है कि आपकी पारिवारिक और वित्तीय पृष्ठभूमि आपके व्यक्तित्व, सोच और विश्वास को जरूर प्रभावित करती है।
  • अक्सर हमारे विपरीत हालात हमारे सामने दो विकल्प रखती है पहला या तो हम अपनी पारिस्थितियों में कुशल प्रबंधक बनकर उभरे, धैर्य रखे और दबावपूर्ण स्थिति में सकारात्मक मनोबल बनाये रखे रहे।
  • हालांकि ऐसी भी परिस्थितियां आती है, जब हालात हमें थोड़ा लाचार बना देती है और हमारा आत्मविश्वास इतना कमजोर होने लगता है कि परीक्षा के लिए जरूरी ऊर्जा और एकाग्रता ही हमारे पास नहीं रह जाती।
  • इसलिए आपको अपनी परिस्थितियों के साथ अपनी क्षमताओं का निष्पक्ष मूल्यांकन करना चाहिए।
  • यदि इसके बाद आप सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला करते हैं, तो आपमें दोहरा भाव या दुविधा नहीं होनी चाहिए।
  • यदि अपने एक निर्णय ले लिया है तो उस उसे सही साबित करना है। लेकिन यदि आपके उत्तरदायित्व अत्यधिक हैं और तैयारी के लिए आवश्यक न्यूनतम संसाधन और परिस्थितियां नहीं है, तो आप अन्य परीक्षाओं व विकल्पों के बारे में सोच सकते है।
  • एक बार कहीं स्थिरता आ जाये तो सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर सकते है।

प्रश्न:

How do I answer if the interview panel asked me, “How will you use mathematics as a civil servant?”? I have chosen maths as an optional in the UPSC CSE.

उत्तर:

I had 93 marks out of 100 , highest in my college history ( UP board). It only indicated me that i should go with mathematics in my next level of studies. For my undergraduate and postgraduate programme, I preferred mathemics over any other subject. I was busy in solving questions and developing specialities in mathematics. Nothing practical, I thought before IIT Delhi days.

In IIT only, I got an opportunity to learn mathematics in a different style. Like how Linear Algebra is used in Cryptography. How programmers and mathematicians have common things. How Real Analysis can be used to improve Zomato business and all. Till here, Mathematics opened a new way to get my feet into corporate with mathematics as my degree.

Things got another perspective when I decided to prepare for CSEs with mathematics as optional.

When i mixed philosophy knowledge with Mathematics.

When I mixed Government initiative to improve India's health infrastructure with my Mathematics knowledge of Operation Research (LPP)

and so on……

Now I come to the Question specific answer-

1- Mathematics has two parts-

Pure Mathematics ( where we try yo explore small things at bigger level). To prove something, we need to set standard principles or theory. With thousands of examples in support cannot prove any statement.( Theorems) . The same is true for Civil service job. Thousands of persons are involved in creating nonsense in a particular area, still we cannot impose blanket restrictions in that area until unless we have solid grounds ( principles in support of that). This is what I learnt from pure mathematics. ( Just an example, i can put many more).

Applied mathematics ( Where I use readymade kind of stuff to get desired results) like, using partial differential equations in understanding heat flow in TAPI pipeline, elaborating Tashkent Agreement through the understanding of Divergence of a scalar field function.

2- Mathematics taught me- There are certain conditions given and I need to reach to the result using those. I cannot go beyond those. This I use in my working domain. Yo take any policy measure, I must have certain ‘facts’ and ‘figures' and ‘Analysis’ over those will give me the ‘accurate’ results.

3- Sometimes we assume something or take a variable for unknown result and after getting result, this variable is gone. This I can use for some pilot project regarding ' Development' and ‘CLIMATE change'. Prototype kind of moves.

4- Mathematics tells me that there may be many ways to reach the same result. So this I try to inculcate in my personality. Water scarcity removal is the result needed and Telangana model , MP model can be best along with Himachal and Gujarat model. Obviously we can have a parent structure as model answer ( Model APMC Act.)

……

I may keep on writing like this but I'm stopping myself here only. Ig someone interested we can have discussion over phone calls too, my number is mentioned in my profile. You can message me too. I love to discuss, this also i learnt from mathematics and can be used to entertain other's views too without leaving mine. ( Gandhi ji) .


प्रश्न:

क्या हिंदी माध्यम वालों के लिए अब यूपीएससी के दरवाजे बंद हो रहे हैं?

उत्तर:

उत्तर थोड़ा लंबा होगा। इसलिए आप शुभी पाठकों से अनुरोध है कि यदि आप वाकई में प्रश्न उत्तर एक विस्तृत विश्लेषण के माध्यम से चाहते हैं तो ही आगे जारी रखें। यदि आपको उत्तर पसंद न आए तो अपने सुझाव अवश्य रखें, मैं अपने ज्ञान में वृद्धि के लिए इसे स्वीकार करना चाहूंगा।

ये बात वर्ष 2015 वाले प्रयास की है। आईआईटी दिल्ली से मैथ में मास्टर करने के बाद मैंने यूपीएससी की ओर कदम बढ़ाया। मेरी स्नातक तक की पढ़ाई मैंने हिंदी माध्यम से ही की थी। इसलिए यूपीएससी लिए मैंने हिंदी माध्यम ही चुना। इसके लिए मैंने किसी से कोई सलाह नहीं ली क्योंकि पढ़ना मुझे था। अपनी बारीकियों को मुझसे बेहतर कोई नहीं जान सकता था। वैकल्पिक विषय गणित ही रखा और उस समय सामान्य अध्ययन और वैकल्पिक दोनों माध्यम एक ही रखना होता था। हालांकि गणित हिंदी में करना हमारे लिए मंगल ग्रह पर जीवन यापन के समान था लेकिन मजबूरी में यह रखना पड़ा।

सबसे पहली गलती - इसका माध्यम से कोई लेना देना नहीं है।

टेस्ट सीरीज इग्नोर करना- क्योंकि कई लोगों ने ऐसा वहम डाल दिया था कि कोचिंग संस्थान जानबूझकरऐसे प्रश्न बनाते हैं जो यूपीएससी का लेवल नहीं है।

इसके बाद पिछले साल के यूपीएससी प्रश्नों का सही विश्लेषण हम नहीं करते थे। । मन में ये रखकर कि पहले करेंट हमें पता नहीं था। इसलिए ये प्रश्न गलत होने पर हमारा कॉन्फिडेंस लूज कर जाएगा। ऐसी ही कई गलत धारणाएं , हमारे मनों में घर कर गई थीं।

जब भी कोई चयनित हमें क्लास में टिप्स देने आता था, हम अक्सर उठकर चले जाते थे। हमारा आईआईटी से होने का घमंड हमें ऐसा करने को कहता था। सोच यह थी कि हम अपनी स्ट्रेटजी पर काम करेंगे। हम यही गलती कर गए। हमें लोगों के अनुभव से सीखना चाहिए।

नतीजा- हमने ये अटेम्प्ट 0.33 अंक से मिस कर दिया। कोई लाग लपेट नहीं रखूंगा। हां सामान्य कैटगरी में ये हुआ था। इसलिए ये तो था कि हम काफी करीब थे। लेकिन जो गलतियां हुई थीं, हमने उन्हें बहुत गहराई से सोचा। बात ये नहीं थी कि 0.33 अंक और होते तो मेरा सलेक्शन हो जाता। नहीं ऐसा नहीं है क्योंकि हो सकता है आगे जीवन में मेरी ये घमंडी पर्सनलिटी हमें और पीछे धकेल देती। इसलिए खुद को जांचना बहुत जरूरी था।

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परिवार को दो जून की रोटी या अपने सपनों के पीछे????

परिवार बड़े भाई के कुछ गलत निर्णयों के कारण सड़क पर था। हमने पहला विकल्प चुना और यूपीएससी छोड़ दिया। इतना नजदीक होकर छोड़ने दर्द अगले पूरे साल मुझे चुभता रहा। टीचिंग ज्वाइन कर लिया था। हायर मैथमेटिक्स में शोध के लिए विद्यार्थियों को तैयार करना एक चुनौतपूर्ण कार्य था। मेरे मन की उथल पुथल से मेरा फीडबैक निगेटिव आता था।

इसके बाद मैंने चीजों को अलग नजरिए से देखना शुरू किया। आज मैं जहां हूं, वहां मुझे सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना है। सिविल सेवा को भूलकर। मैंने ऐसा ही किया। घर की जरूरतें पूरी हुई। परन्तु मैंने अब खुद को टीचिंग में खपा दिया था। बच्चों के साथ उनकी समस्याओं को बच्चे की तरह समझना, एग्जाम की डिमांड को गहराई से पड़ताल करना और एगजम हॉल की विशेष तैयारी करना। ये जॉब वाला परिचय उत्तर विश्लेषण के लिए जरूरी था, इसलिए दिया। आप चाहें तो इग्नोर कर सकते हैं।