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SUMMARY:पेगासस जासूसी मामला — राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम निजता का अधिकार
DESCRIPTION: परिचय :  \n\n30 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस स्पाईवेयर विवाद पर सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा के लिए स्पाईवेयर का प्रयोग किया जाए तो उसमें कोई गलत बात नहीं है।\n\nकोर्ट ने यह भी कहा कि निजी नागरिकों की निजता का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है और यदि किसी व्यक्ति को आशंका है कि उस पर निगरानी की गई\, तो उसकी शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।\n\n\n\n\n\n\nUPSC पाठ्यक्रम: \n\nप्रारंभिक परीक्षा:  राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं\nमुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन III: साइबर सुरक्षा की मूल बातें\n\n\n\n\n\nपेगासस क्या है ?\n\nपेगासस इज़रायली कंपनी NSO ग्रुप द्वारा विकसित एक उन्नत स्पाइवेयर है। इसे आतंकवाद और गंभीर अपराधों से निपटने के लिए सरकारी एजेंसियों को बेचा जाता है।\n\nपेगासस की मुख्य क्षमताएँ: एक बार फ़ोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद\, पेगासस:\n\nसंदेश\, ईमेल और कॉल लॉग पढ़ सकता है।\nलाइव निगरानी के लिए फ़ोन के माइक्रोफ़ोन और कैमरे तक पहुँच सकता है।\nउपयोगकर्ता के रीयल-टाइम स्थान को ट्रैक कर सकता है।\n\nपेगासस कैसे काम करता है ?\n\nपेगासस को “जीरो-क्लिक“ तकनीक के माध्यम से डिलीवर किया जा सकता है\, जिसका अर्थ है कि इसके लिए लक्ष्य को दुर्भावनापूर्ण लिंक पर क्लिक करने या कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं होती है।\nयह व्हाट्सएप या फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे ऐप में कमज़ोरियों का फायदा उठाता है।\n\nपेगासस अन्य स्पाइवेयर से किस तरह अलग है?\nजीरो-क्लिक तकनीक: \n\nफ़िशिंग लिंक या उपयोगकर्ता इंटरैक्शन पर निर्भर रहने वाले ज़्यादातर स्पाइवेयर के विपरीत\, पेगासस चुपचाप डिवाइस में घुसपैठ कर सकता है\, जिसके लिए लक्ष्य को कोई कार्रवाई करने की ज़रूरत नहीं होती।\n\nव्यापक डेटा एक्सेस:\n\nपेगासस न केवल फोन की संग्रहीत फ़ाइलों तक पहुँच प्रदान करता है\, बल्कि सक्रिय रूप से कॉल रिकॉर्ड कर सकता है\, लाइव वीडियो कैप्चर कर सकता है और रीयल-टाइम संचार को रोक सकता है।\n\nसरकारी उपयोग के लिए लक्षित:\n\nNSO समूह का दावा है कि पेगासस को केवल वैध उद्देश्यों के लिए सरकारी एजेंसियों को बेचा जाता है।\nहालाँकि\, रिपोर्ट बताती हैं कि इसका पत्रकारों\, कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं के खिलाफ़ दुरुपयोग किया गया है।\n\nउच्च परिचालन लागत:\n\nपेगासस अन्य स्पाइवेयर की तुलना में काफी महंगा है।\n\nउदाहरण के लिए\, 2016 में\, NSO ने 10 डिवाइस को हैक करने के लिए $650\,000 और $500\,000 इंस्टॉलेशन शुल्क लिया था।\n\n\n\nवैश्विक चिंताएँ\n\nपेगासस विवादों के केंद्र में रहा है\, जिसमें पत्रकारों\, राजनीतिक नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं जैसे हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों के खिलाफ़ दुरुपयोग के आरोप हैं।\nकई देशों में जाँच से पता चला है कि इसका उपयोग अनधिकृत निगरानी के लिए किया जाता है\, जिससे नैतिक और गोपनीयता संबंधी चिंताएँ पैदा होती हैं।\n\nपेगासस एक्सप्लॉइट्स: डिलीवरी वेक्टर\nहेवन (2018):\n\nआधिकारिक सर्वर की नकल करने के लिए व्हाट्सएप के सिस्टम को रिवर्स-इंजीनियर किया।\nलक्ष्य उपकरणों को NSO द्वारा नियंत्रित तीसरे पक्ष के सर्वर पर पुनर्निर्देशित करने के लिए हेरफेर किए गए संदेशों का उपयोग किया।\n2018 में व्हाट्सएप के सुरक्षा अपडेट के बाद यह स्थायी रूप से बंद हो गया।\n\nईडन (पोस्ट-हेवन):\n\nयह व्हाट्सएप के रिले सर्वर के माध्यम से संचालित किया गया एक जीरो-क्लिक मैलवेयर वेक्टर है।\n2019 में वैश्विक स्तर पर लगभग 1400 डिवाइस पर हमला किया गया।\nव्हाट्सएप द्वारा नए सुरक्षा उपाय लागू करने के बाद यह स्थायी रूप से बंद हो गया।\n\nएरिसेड (2019 के बाद):\n\n2019 में व्हाट्सएप द्वारा दायर मुकदमे के बाद भी व्हाट्सएप के सर्वर का उपयोग करके लगातार हमले किए गए।\nमई 2020 में व्हाट्सएप द्वारा ब्लॉक किया गया।\n\nभारत में विवाद कैसे शुरू हुआ?\n\nजुलाई 2021 में\, द वायर\, द गार्जियन और द वाशिंगटन पोस्ट जैसे मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि भारत में:\n\n40 से ज़्यादा पत्रकार कई विपक्षी राजनेता  कार्यकर्ताओं\, वकीलों\, चुनाव अधिकारियों और यहाँ तक कि सुप्रीम कोर्ट के कर्मचारियों को पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल करके निशाना बनाया गया या संभावित रूप से निगरानी की गई।\n\n\n\nभारत में प्रमुख घटनाएँ :\nव्हाट्सएप उल्लंघन (2019)\n\n 2019 में\, व्हाट्सएप में कमज़ोरियों के माध्यम से पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके वकीलों\, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं सहित 121 से अधिक भारतीय नागरिकों को निशाना बनाया गया।\nपीड़ितों ने मिस्ड वीडियो कॉल प्राप्त करने की सूचना दी\, जिससे उन्हें पता न चलने पर पेगासस ने उनके उपकरणों को संक्रमित कर दिया।\n\nउदाहरण: दलित कार्यकर्ता आनंद तेलतुम्बडे और पत्रकार राणा अय्यूब कथित रूप से लक्षित लोगों में से थे।\n\n\n\nपेगासस प्रोजेक्ट खुलासे (2021)\n\n2021 में\,17 मीडिया संगठनों द्वारा किए गए एक खोजी प्रयास\, पेगासस प्रोजेक्ट ने खुलासा किया कि 300 से अधिक सत्यापित भारतीय फ़ोन नंबर पेगासस निगरानी के संभावित लक्ष्य थे।\n\nइस सूची में विपक्षी नेता\, पत्रकार\, कार्यकर्ता और सरकारी अधिकारी शामिल थे।\n\n\n\nपेगासस जैसे स्पाईवेयर के उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट का रुख (अप्रैल 2025 )\nराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए स्पाईवेयर के उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की स्थिति\n\nराष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्य से स्पाईवेयर रखना या उपयोग करना गलत नहीं सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पेगासस जैसे स्पाईवेयर का उपयोग करती है\, तो इसमें कोई असंवैधानिकता नहीं है।\nन्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 30 अप्रैल 2025 की सुनवाई में कहा: “देश के पास स्पाईवेयर होना गलत नहीं है। सवाल यह है कि इसका प्रयोग किसके खिलाफ हो रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा का बलिदान नहीं किया जा सकता।“\nकोर्ट ने कहा कि सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी रिपोर्टें सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं\,\nक्योंकि ऐसी जानकारी सड़कों पर बहस का विषय नहीं बननी चाहिए।\n\n\nआम नागरिकों के विरुद्ध स्पाईवेयर के उपयोग पर चिंता\n\nनिजता का अधिकार एक मौलिक अधिकार है “ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि: “एक निजी नागरिक का निजता का अधिकार संविधान द्वारा संरक्षित है। यदि उसे शिकायत है तो उसकी जांच होनी चाहिए।“\n\nयह रुख 2017 के पुट्टस्वामी फैसले पर आधारित है\, जिसमें अनुच्छेद 21 के तहत निजता को मौलिक अधिकार घोषित किया गया।\n\n\n\nनागरिकों पर अनियमित निगरानी अस्वीकार्य\n\nकोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्पाईवेयर का उपयोग केवल आतंकवादियों और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के विरुद्ध होना चाहिए\, आम नागरिकों के खिलाफ नहीं।\nनिगरानी का कोई भी कदम “अनुपातिकता और आवश्यकता” (Proportionality & Necessity) के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए।\nयदि किसी व्यक्ति को संदेह है कि उस पर निगरानी की गई\, तो उसे व्यक्तिगत रूप से सूचना दी जा सकती है।\n\nपेगासस विवाद: प्रमुख घटनाक्रम\n\n कई याचिकाओं के बाद\, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पेगासस स्पाइवेयर का उपयोग करके अनधिकृत निगरानी के आरोपों की जांच के लिए एक समिति बनाई। समिति ने 2022 में अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए\, जो अभी भी सीलबंद हैं।\n\nउदाहरण: समिति ने रिपोर्ट दी कि केंद्र सरकार जांच के दौरान सहयोग करने में विफल रही। इसके बावजूद\, जांचे गए उपकरणों पर कोई निर्णायक सबूत नहीं मिला।\n\n\n\nपत्रकारों को बार-बार निशाना बनाना (2023)\n\nएमनेस्टी इंटरनेशनल की फोरेंसिक जांच ने पुष्टि की कि अगस्त और अक्टूबर 2023 के बीच कई भारतीय पत्रकारों को पेगासस स्पाइवेयर से निशाना बनाया गया था।\n\nउदाहरण: \n\nसिद्धार्थ वरदराजन (द वायर): सरकारी गतिविधियों की संवेदनशील जांच के दौरान उनका फोन कई बार संक्रमित पाया गया।\nरोहिणी सिंह (स्वतंत्र पत्रकार): उन्होंने लगातार मैलवेयर चेतावनियों और स्पाइवेयर प्रयासों के फोरेंसिक सबूतों की रिपोर्ट की।\n\nएप्पल की धमकी अधिसूचनाएँ (2023)\n\nअक्टूबर 2023 में\, एप्पल ने कई भारतीय राजनेताओं\, पत्रकारों और विपक्षी नेताओं को चेतावनी जारी की\, जिसमें उन्हें पेगासस का उपयोग करके संभावित राज्य प्रायोजित हमलों के बारे में सचेत किया गया।\n\nउदाहरण: महुआ मोइत्रा (सांसद\, तृणमूल कांग्रेस): उन्होंने सार्वजनिक रूप से एप्पल की अधिसूचना साझा की\, जिसमें सरकार की संलिप्तता का आरोप लगाया गया।\n\n\n\nसाइबर अपराध क्या हैं?\n\nसाइबर अपराध डिजिटल डिवाइस और नेटवर्क का उपयोग करके की जाने वाली गैरकानूनी गतिविधियाँ हैं। इनमें वित्तीय धोखाधड़ी से लेकर हैकिंग और पहचान की चोरी तक शामिल हैं।
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