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उत्सव ज्योतिर्गमय

22 Jun, 2022

चर्चा में क्यों ?

संगीत नाटक अकादमी द्वारा 5 दिवसीय एक अनूठे उत्सव “ज्योतिर्गमय” का आयोजन किया जा रहा है, आइये जानते है इसके बारे में।

मुख्य बिंदु :-

  • आजादी का अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष का उत्सव मनाने और कीर्तिगान करने तथा विश्व संगीत दिवस होने के अवसर पर देश भर से दुर्लभ संगीत वाद्ययंत्रों की प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए संगीत नाटक अकादमी एक उत्सव ज्योतिर्गमय का आयोजन कर रही है।
  • गौरतलब है की इस उत्सव में सड़क पर प्रदर्शन करने वाले, ट्रेन में मनोरंजन करने वाले और मंदिरों से जुड़े कलाकार भी शामिल होंगे।
  • केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी किशन रेड्डी इस उत्सव का उद्घाटन करेंगे। इसका आयोजन 21 से 25 जून 2022 तक किया जायेगा।
  • दुर्लभ संगीत वाद्ययंत्र बजाने के अनुभव के साथ-साथ उन्हें तैयार करने के कौशल को संरक्षित करने की आवश्यकता के बारे में लोगों को संवेदनशील बनाने तथा उन 'गुमनाम' कलाकारों को पहचान देने के उद्देश्य से इस उत्सव की परिकल्पना की जा रही है, जो शायद ही कभी लाइमलाइट देखते हैं।
  • संगीत नाटक अकादमी का भारत से लुप्त हुई कलाओं को उबारने का यह एक अनूठा प्रयास है और यह अनूठी पहल विश्व संगीत दिवस के उत्सव के बाद भी जारी रहेगी।
  • उल्लेखनीय है की संगीत भारत के हर गली और कोने में सुनाई देता है। खुले आसमान के नीचे अपनी बांसुरी और ताली बजाते हुए राहगीरों का मिलना कोई अचरज वाली बात नहीं है। चाहे बारिश हो या धूप ये लोग आसानी से मिल जाते हैं। जिन्हें रोज़मर्रा की ज़िंदगी में थोड़ी सी भी नीरसता दूर करने लिए शायद ही कभी धन्यवाद दिया जाता है। हमारे पास दुर्लभ संगीत वाद्ययंत्रों का ढेर भी है जो अपनी कम होती लोकप्रियता और घटते संरक्षण के कारण धीरे-धीरे सार्वजनिक डोमेन से दूर होते जा रहे हैं।
  • कॉल टू एक्शन के माध्यम से इस उत्सव के लिए 'गुमनाम' प्रतिभाओं को मौका देने के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आगुंतकों से अनुरोध किया गया था कि वे अपने विवरण के साथ अपनी कला के प्रदर्शन की एक छोटी क्लिप भी भेजें।
  • संगीत के प्रमुख संस्थानों, सांस्कृतिक केंद्रों, एसएनए पुरस्कार विजेताओं और प्रख्यात संगीतकारों से भी ऐसी दुर्लभ प्रतिभाओं का पता लगाने और उनकी पहचान करने का अनुरोध किया गया था। सभी प्रविष्टियों की समीक्षा करने और भेजी गई सिफारिशों पर विचार करने के बाद 21-25 जून 2022 तक 5 दिवसीय उत्सव के लिए कुल 75 प्रदर्शन कार्यक्रमों का चयन किया गया।
  • दुर्लभ वाद्य यंत्रों के निर्माण पर 5 दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है जो शैक्षिक और इंटरैक्टिव दोनों साबित होगी। इस महोत्सव में देश के कोने-कोने से कलाकार भाग लेंगे।
  • इसके साथ ही अकादमी ने नई दिल्ली के रवीन्द्र भवन में वाद्ययंत्रों, मुखौटों और कठपुतलियों की एक गैलरी स्थापित की है। उत्सव के प्रत्येक दिन शिल्पकारों द्वारा संगीत वाद्ययंत्रों के निर्माण को प्रदर्शित करने वाली एक लाइव प्रदर्शनी भी आयोजित होगी। सभी के लिए प्रवेश निःशुल्क है।

संगीत नाटक अकादमी के बारे में-

  • संगीत नाटक अकादमी भारत सरकार द्वारा स्थापित भारत की संगीत एवं नाटक की राष्ट्रीय स्तर की सबसे बड़ी अकादमी है।
  • वर्ष 1953 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने एक संसदीय प्रस्ताव द्वारा एक स्वायत्त संस्था के रूप में संगीत नाटक अकादमी की स्थापना करने का निर्णय किया गया।
  • 1961 में अकादमी भंग कर दी गई और इसका नए रूप में संगठन किया गया। 1860 के सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन के अधीन यह संस्था पंजिकृत हो गई। इसकी नई परिषद् और कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया। अकादमी अब इसी रूप में कार्य कर रही है।
  • इसका मुख्यालय दिल्ली में है।

उद्देश्य -

  • संगीत नाटक अकादमी की स्थापना संगीत, नाटक और नृत्य कलाओं को प्रोत्साहन देने तथा उनके विकास और उन्नति के लिए विविध प्रकार के कार्यक्रमों का संचालन करने के उद्देश्य से की गयी थी।
  • संगीत नाटक अकादमी अपने मूल उद्देश्य की पूर्ति के लिए देश भर में संगीत, नृत्य और नाटक की संस्थाओं को उनकी विभिन्न कार्ययोजनाओं के लिए अनुदान देती है, सर्वेक्षण और अनुसंधान कार्य को प्रोत्साहन देती है।
  • संगीत, नृत्य और नाटक के प्रशिक्षण के लिए संस्थाओं को वार्षिक सहायता देती है। विचारगोष्ठियों और समारोहों का संगठन करती है तथा इन विषयों से संबंधित पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक सहायता देती है।

Source - PIB