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सैन्य हार्डवेयर के आयात में लगातार गिरावट

01 Aug, 2022

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में सरकार ने स्वीडन के एक थिंक टैंक के आंकड़ों के हवाले से संसद को यह जानकारी दी कि सैन्य खर्च के मामले में भारत पिछले साल दुनिया में तीसरे स्थान पर रहा। 

मुख्य बिंदु :-

  • लोकसभा में रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट ने एक लिखित उत्तर में कहा कि रक्षा मंत्रालय विश्व के अन्य देशों के सैन्य खर्च के आंकड़े नहीं रखता है। परंतु, स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी सिप्री नामक थिंक टैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 के लिए भारत का सैन्य खर्च दुनिया में तीसरे स्थान पर रहा।
  • भारत का सैन्य खर्च लगभग 76 अरब डालर रहा। पहले स्थान पर अमेरिका (800 अरब डालर) और दूसरे स्थान पर चीन (293 अरब डालर) रहा। 
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन को बताया कि उपकरण और सैन्य हार्डवेयर के आयात के लिए सशस्त्र बलों द्वारा किए गए पूंजीगत व्यय में पिछले तीन साल में लगातार गिरावट आई है।
  • वर्ष 2019-20 में सशस्त्र बलों ने सैन्य हार्डवेयर के आयात पर 38,156 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कुल पूंजीगत व्यय का 41.89 प्रतिशत रहा। 2020-21 में आयात पर 42,786 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो कुल पूंजीगत व्यय का 36 प्रतिशत है।
  • इसी तरह 2021-22 में आयात पर पूंजीगत व्यय 39,650 करोड़ रहा, जो कुल खरीद का 35.28 प्रतिशत है। 
  • रक्षा राज्यमंत्री भट्ट ने सदन को बताया कि 'वन रैंक वन पेंशन' यानी ओआरओपी के तहत पूर्व सैनिकों के लिए पेंशन में संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह संशोधन एक जुलाई, 2019 से किया जा रहा है। 
  • भट्ट ने बताया कि सरकार पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के इंजन के सह उत्पादन के लिए विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग की संभावना तलाश रही है। भारत पांचवीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम कांबैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) के विकास के लिए पांच अरब डालर की महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम कर रहा है। 

Source – IE