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महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू

04 Jul, 2022

चर्चा में क्यों ?

04 जुलाई 2022 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी आंध्रप्रदेश में महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की 125वीं जयंती के उपलक्ष्‍य में समारोहों का शुभारंभ करेंगे।

मुख्य बिंदु :-

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आंध्रप्रदेश के भीमावरम में महान स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की  125वीं जयंती समारोह का शुभारम्‍भ करेंगे।
  • श्री मोदी इस अवसर पर श्री सीताराम राजू की 30 फुट की कांस्य प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। गौरतलब है की आजादी का अमृत महोत्‍सव के अंतर्गत केंद्र सरकार गुमनाम स्‍वतंत्रता सेनानियों के योगदान को उचित सम्‍मान देने के प्रति वचनबद्ध है और देश की जनता को उनके बारे में जागरुक कर रही है।
  • चार जुलाई 1897 को जन्‍मे श्री अल्लूरी सीताराम राजू को ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष, और पूर्वी घाट क्षेत्र में जनजातीय समुदाय के हितों की रक्षा के लिए स्‍मरण किया जाता है।
  • उल्लेखनीय है की सरकार ने वर्ष भर चलने वाले आजादी का अमृत महोत्‍सव के अंतर्गत कई कार्यक्रमों की योजना बनाई है। अल्लूरी सीताराम राजू के जन्‍मस्‍थल विजयनगरम जिले में पंडरंगी और चिंतापल्‍ली पुलिस स्‍टेशन को पुनर्निमित किया जाएगा।
  • सरकार ने मोगल्‍लु के अल्‍लूरु ध्‍यान मंदिर में अल्लूरी सीताराम राजू की ध्‍यान मुद्रा में प्रतिमा के निर्माण को भी मंजूरी दी है। इस महान स्‍वतंत्रता सेनानी के जीवन से जुड़े भित्ति चित्रों को भी दर्शाया जाएगा और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के माध्‍यम से सीताराम राजू के जीवन के बारे में जानकारी दी जाएगी।

कौन थे अल्लूरी सीताराम राजू ?

  • अल्लूरी सीताराम राजू एक भारतीय क्रांतिकारी थे, जिन्होंने भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ एक सशस्त्र अभियान चलाया।
  • उनका जन्म 4 जुलाई 1897 में विशाखापटनम में हुआ था। उनका असली नाम श्रीरामराजू था, जो कि उनके नाना के नाम पर था।
  • वह छोटी उम्र में ही संत बन गए थे। सीताराम राजू वर्ष 1882 के मद्रास वन अधिनियम के खिलाफ ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गए।
  • गौरतलब है की भारत की ब्रिटिश सरकार ने मद्रास फॉरेस्ट एक्ट पास कर स्थानीय आदिवासियों को जंगल में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी को लेकर उन्होंने आदिवासियों के लिए लड़ाई लड़ी और औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का आह्वान किया।
  • महज 27 साल की उम्र में वह सीमित संसाधनों के साथ सशस्त्र विद्रोह को बढ़ावा देने और गरीबों, अंग्रेजों के खिलाफ अनपढ़ आदिवासी को प्रेरित करने में कामयाब रहे।
  • अंग्रेजों के प्रति बढ़ते असंतोष ने 1922 के रम्पा विद्रोह को जन्म दिया, जिसमें अल्लूरी सीताराम राजू ने एक नेतृत्वकर्त्ता के रूप में एक प्रमुख भूमिका निभाई।
  • 1922 से 1924 के बीच हुए इस विद्रोह में अल्लूरी ने ब्रिटिशर्स के खिलाफ विद्रोह करने के लिए विशाखापट्टनम और पूर्वी गोदावरी जिलों के आदिवासी लोगों को संगठित किया। इस विद्रोह के दौरान कई पुलिस थानों और अंग्रेजी अधिकारियों पर हमला करके लड़ाई के लिए हथियार जमा किए गए।
  • उनके वीरतापूर्ण कारनामों का ही नतीजा था कि स्थानीयों ने उन्हें ‘मान्यम वीरुडू’ (जंगलों का नायक) उपनाम दे दिया था। साल 1924 में अल्लूरी सीताराम राजू का विद्रोह जब चरम पर था तो पुलिस उनका पता लगाने के लिए आदिवासियों को सताने लगी। ऐसे में जब राजू को इस बात का पता चला तो उनका दिल पिघल गया। उन्होंने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया और खुद अपनी जानकारी देकर पुलिस को कहा कि वो कोइयूर में हैं। आकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाए।
  • ब्रिटिश पुलिस ने बिन समय को गवाए उन्हें अपनी हिरासत में लिया और बाद में उनके साथ विश्वासघात करते हुए उन्हें एक पेड़ में बाँधा, फिर सार्वजनिक रूप से उन्हें गोलियों से भून दिया गया। उनकी हत्या क्रूरता से हुई मगर आदिवासियों के लिए वह नायक बन गए।

Source - PIB