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चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के विस्तार का भारत द्वारा जोरदार विरोध

01 Aug, 2022

चर्चा में क्यों ?

हाल ही में किसी तीसरे देश में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के विस्तार का भारत ने जोरदार विरोध किया। इस तरह की खबरें हैं कि चीन और पाकिस्तान इस परियोजना का विस्तार अफगानिस्तान तक करने की योजना बना रहे हैं। 

मुख्य बिंदु :-

  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हमने इस पर स्पष्ट रूप से दो प्रमुख मुद्दों पर ध्यान दिया है-
  • पहला मुद्दा गुलाम कश्मीर में गतिविधियों से संबंधित है। यह भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है। हम इसका विरोध करते हैं।
  • दूसरी बात, किसी तीसरे देश को इसमें नहीं आना चाहिए, क्योंकि यह हमारी संप्रभुता का उल्लंघन है। हमने पहले भी कहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है। चीन-पाक गलियारे में किसी तीसरे देश को शामिल करने के प्रयासों को हम खारिज करते हैं। 
  • बागची ने म्यांमार की सैन्य सरकार द्वारा लोकतंत्र समर्थक चार कार्यकर्ताओं को फांसी दिए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। कहा कि कानून के शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखा जाना चाहिए। म्यांमार की जनता का मित्र होने के नाते हम वहां पर लोकतंत्र की बहाली और स्थिरता का समर्थन करना जारी रखेंगे। 
  • बागची ने कहा कि ताशकंद में इसी सप्ताह अफगानिस्तान पर सम्मेलन के दौरान भारत ने दोहराया कि वह मुश्किल समय में उसकी मदद करता रहेगा। अफगानिस्तान से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों का भारत समर्थन करता रहेगा। 
  • बागची ने कहा कि हम इन रिपोर्टों से अवगत हैं कि चीन का जहाज श्रीलंकाई बंदरगाह हंबनटोटा पहुंचने वाला है। सरकार उन घटनाओं पर सावधानी से नजर रखती है, जिनका देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों पर असर पड़ सकता है। राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए सरकार सभी जरूरी उपाय करती है। 
  • रूस-यूकेन खाद्यान्न निर्यात समझौते पर सतर्क प्रतिक्रिया रूस और यूक्रेन के बीच खाद्यान्न निर्यात समझौते पर भारत ने सतर्क प्रतिक्रिया दी है। बागची ने कहा कि यदि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ज्यादा अनाज की आपूर्ति में मदद मिलती है, तो फिर भारत सहित सभी देश इसका स्वागत करेंगे। 

Source – IE