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हुदहुद तूफान के नामकरण से समबन्धित दिलचस्प तथ्य;अब नीलोफर की बारी

- बंगाल की खाड़ी में उठा चक्रवाती तूफान हुदहुद आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तांडव करने के बाद थम गया है.
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इसके बाद अब इस क्षेत्र में आने वाला तूफान नीलोफर.होगा.

- हुदहुद तूफान भले ही बंगाल की खाडी में उठा लेकिन इसका नामकरण ओमान ने किया.

- हुदहुद अरबी भाषा में हूपु नाम की चिड़िया को कहा जाता है जो कठफोडवा से मिलता जुलता है.

- तूफानों के नाम रखे जाने की प्रक्रिया बडी रोचक है. तूफान के बारे में आम लोगों को जानकारी देने के लिए जरूरी था उसका नाम होना.

- इसी से शुरू हुई चक्रवातों के नामकरण की प्रक्रिया साल 1950 तक तूफानों को उनके साल के हिसाब से जाना जाता था जैसे 1946 और 1946 बी. 
- 1950
के बाद इनका स्त्रीलिंग नाम और 1979 से पुलिंग नाम रखा जाने लगा.

- वर्ष 1953 से मियामी राष्ट्रीय चक्रवात केंद्र और वि मौसम संघ.डक्ल्यूूएमओ. तूफानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता रहा है.

- डक्ल्यूूएमओ संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है. लेकिन उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम यहां नहीं रखा गया था. दरअसल जातीय विविधता वाले इस क्षेत्र में काफी सावधान और निष्पक्ष रहने की जरूरत होती है ताकि यहां के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचे.

- वर्ष 2004 में जब डब्ल्यूएमओ की अगुवाई वाला अंतरराष्ट्रीय पैनल भंग कर दिया गया और अपने.अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम खुद रखने को कहा गया तो उत्तरी हिंद महासागर से जुडे आठ देशों बंगलादेश. भारत. मालदीव. म्यांमार. ओमान. पाकिस्तान. श्रीलंका और थाइलैंड ने मिलकर 64 नामों की एक सूची बनाई.

- इसके तहत हर देश ने आने वाले चक्रवात के लिए आठ.आठ नाम सुझाए.आठ देशों की यह सूची हर देश के वर्ण क्रम के अनुसार है. 
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वर्ण क्रम के अनुसार इस बार ओमान की बारी

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