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हर शहर के लिए अलग बनेगी गंगा सफाई की योजना

- गंगा को अविरल और निर्मल बनाने की योजना कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर कारगर ढंग से लागू करने के इरादे से सरकार स्थानीय मुद्दों का अध्ययन करा रही है।
- हर शहर के स्थानीय मुद्दों के अनुरूप ही वहां गंगा को निर्मल बनाने के कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।
- केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी गंगा के किनारे बसे कस्बों और शहरों के स्थानीय मुद्दों का अध्ययन कर रहे हैं।
- इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जो कार्यक्रम गंगा को निर्मल बनाने के लिए बनाए जाएं, वे स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर ही तैयार हों। ऐसा होने पर इन कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में दिक्कत आएगी।
- गंगा के किनारे 118 कस्बे शहर और 1632 ग्राम पंचायतें हैं। फिलहाल प्रमुख शहरों के स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया जा रहा है।
- आगे चलकर यह प्रक्रिया बाकी शहरों तथा ग्राम पंचायतों के लिए दोहराई जाएगी। इसी के आधार पर हर शहर के लिए खास कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे। 
-इस प्रक्रिया में उन स्थानीय समुदायों को भी जोड़ा जाएगा जिनकी आजीविका गंगा पर निर्भर है।
- गंगा किनारे के शहरों के स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना इसलिए जरूरी है क्योंकि गंगा में गिरने वाली 80 प्रतिशत गंदगी शहरों से आती है जबकि 20 प्रतिशत औद्योगिक इकाइयों से।
- इसलिए इसे रोकने के लिए वहां के स्थानीय मुद्दों की भलीभांति जानकारी होना बेहद जरूरी है।
- इसके अलावा सरकार जल्द ही शहरी स्थानीय

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