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रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा ग्रीनहाउस गैसों का स्तर

- वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों का स्तर 2013 में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
- विश्व मौसम संस्थान (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार जबसे इनका आधिकारिक आंकड़ा रखा जाने लगा है, तब से अब तक की यह सबसे तेज वृद्धि है। 1984 में पहली बार इनका प्रामाणिक रिकॉर्ड लिया गया था।
- डब्ल्यूएमओ की वार्षिक ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन जारी करते हुए महासचिव माइकल जरौद ने कहा, "हम सभी जानते हैं कि हमारा पर्यावरण बदल रहा है। जीवाश्म ईंधन जलाने जैसे कदमों के कारण मौसम में व्यापक बदलाव हुआ है।"
- रिपोर्ट के अनुसार, 2013 में कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की सघनता ने रिकॉर्ड स्तर को छू लिया।
- ग्रीनहाउस के प्रमुख घटक कार्बन डाई ऑक्साइड का इस दौरान स्तर 396 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) रहा। 
- 1750 के औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर के मुकाबले इसमें 142 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2012 से 2013 के बीच इसमें 2.9 पीपीएम की वृद्धि हुई, जो कि पिछले तीस सालों में सर्वाधिक है।
- इस दौरान मीथेन का स्तर 1824 पार्ट्स प्रति बिलियन (पीपीबी) और नाइट्रस ऑक्साइड का स्तर 325.9 पीपीबी पर पहुंच गया। 
=>क्या हैं ग्रीनहाउस गैसें
- वातावरण में गर्मी बनाए रखने में सहायक गैसों को ग्रीनहाउस गैस कहा जाता है। 
- कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड प्रमुख ग्रीनहाउस गैसें हैं। 
- इनके प्रभाव से सूर्य की उष्मा वातावरण में बनी रहती है। इनके अभाव में सूर्यास्त होते ही वातावरण ठंडा हो जाता और धरती पर जीवन संभव नहीं होता।
=>क्या है खतरा
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