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जैवविविधता का संरक्षण

- किसी क्षेत्र में उपस्थित जीवन के विभिन्न रूपों को जैव विविधता की श्रेणी में रखा जाता है। 
- इसमें वहां उपस्थित जीवों और वनस्पतियों की सभी प्रजातियां शामिल हैं।
- विभिन्न जीवों की संतुलित उपस्थिति से उस क्षेत्र के प्राकृतिक स्वास्थ्य का पता चलता है। 
- यूएन धरती पर जैव विविधता को सुरक्षित करने पर लगातार जोर देता रहा है।
- यह प्रकृति के संतुलन के लिए आवश्यक है।

=> जीवों के लुप्त होने का बढ़ा खतरा:-
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कुछ चुनिंदा सफलताओं को छोड़ दिया जाए तो पक्षियों, स्तनधारियों और उभयचरों की बहुत सी प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

=>मनुष्यों के लिए लाभकारी है जैव विविधता:-
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यूएन के महासचिव बान की मून ने कहा कि धरती पर जीवों की रक्षा मनुष्यों के बेहतर स्वास्थ्य, गरीबी हटाने तथा ऊर्जा, भोजन और स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की दिशा में सहायक है। 
- एक अनुमान के मुताबिक अकेले मधुमक्खियों के जरिए होने वाले कीट परागण का मूल्य सालाना 190 अरब डॉलर के लगभग है।

 

=>"जैवविविधता का संरक्षण " (Most Imp Topic)

- जैवविविधता का संरक्षण और उसका निरंतर उपयोग करना भारत के लोकाचार का एक अंतरंग हिस्सा है। अभूतपूर्व भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं ने मिलकर जीव जंतुओं की इस अद्भुत विविधता में योगदान दिया है जिससे हर स्तर पर अपार जैविक विविधता देखने को मिलती है।

- भारत में दुनिया का केवल 2.4 प्रतिशत भू-भाग है जिसके 7 से 8 प्रतिशत भू-भाग पर विश्व की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं। प्रजातियों की संवृधि के मामले में भारत स्तनधारियों में 7वें, पक्षियों में 9वें और सरीसृप में 5वें स्थान पर है। विश्व के 11 प्रतिशत के मुकाबले भारत में 44 प्रतिशत भू-भाग पर फसलें बोई जाती हैं। भारत के 23.39 प्रतिशत भू-भाग पर पेड़ और जंगल फैले

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