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WTO में भारत और पश्चिमी देश

- राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रक्रिया आसान बनाने और खाद्य सुरक्षा का मुद्दा, दोनों एक दूसरे से गहराई से जुडे हुए हैं. 
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ऐसे में विकसित देशों को विश्व व्यापार संगठन के व्यापार सुविधा समझौते (टीएफए) का अनुमोदन करने के भारत के फैसले को 'बाजार में विकृती' के रुप में नहीं देखा जाना चाहिए.

- भारत ने साफ किया है कि वह विश्व व्यापार संगठन में खाद्य सुरक्षा पर अपने रुख पर कायम रहेगा क्योंकि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह गरीबों के हितों की रक्षा करे और वह खाद्य सुरक्षा मामलों पर स्थाई समाधान मिलने तक व्यापार सुविधा समझौते पर सहमति नहीं जताएगी.

- उन्होंने कहा कि भारत पर यह आरोप नहीं लगाया जा सकता है कि वह खाद्य सुरक्षा संबंधी मांग को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को बंधक बनाये हुए है. 
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भारत ने 2013 में बाली में हुए डब्ल्यूटीओ समझौते में सीमा शुल्क प्रक्रिया को आसान बनाने के संबंध में टीएफए का अनुमोदन करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि इसके साथ-साथ अनाज की सरकारी खरीद कार्यक्रम के मुद्दे का भी स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए.

- राष्ट्रपति ने कहा कि हम निश्चित तौर पर खाद्य सुरक्षा के बारे में चिंतित हैं और मैंने इसे बहुत स्पष्ट रुप से कहा, बाली मंत्रीस्तरीय बैठक में भी इस मुद्दे को बहुत ही स्पष्ट ढंग से कहा गया था.

- भारत ने विश्व व्यापार संगठन से कहा है कि वह कृषि सब्सिडी के आकलन संबंधी मानदंडों में संशोधन करे ताकि भारत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से अनाज की खरीद जारी रख सके और इसे डब्ल्यूटीओ के नियमों का उल्लंघन किए बगैर सस्ती दर पर गरीबों को उपलब्ध करा सके.

=>"क्या है डब्ल्यूटीओ का नियम ":-

- डब्यूटीओ के वर्तमान नियमों

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