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तेल के खेल से बड़े आर्थिक-राजनीतिक बदलाव के आसार

- कच्चे तेल की कीमतों में भारी का असर केवल बाजार और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। दुनिया के नक्शे और राजनीति पर भी इसका प्रभाव नजर आने है। 
- 2008 के बाद तेल के दाम में आई सबसे बड़ी गिरावट ने दुनिया को कई स्तरों पर प्रभावित किया है। आगे भी यदि यह गिरावट जारी रही तो कई चौंकाने वाले बदलाव हो सकते हैं।

- वेनेजुएला के मेरिडा स्थित मशहूर आइसक्रीम पार्लर क्रोमोटो 900 फ्लेवर्स के लिए जाना जाता है। लेकिन, नवंबर के व्यस्ततम सीजन में यह बंद रहा। वजह यह रही कि वेनेजुएला में महंगाई दर 64 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है और इस कारण वहां दूध की कमी पड़ गई है। 
- यह एक बानगी है, ऐसे देशों में मुश्किलों की जहां की अर्थव्यवस्था पेट्रोलियम निर्यात पर निर्भर है।

=>गिरावट जारी रहने पर ये बदलाव संभवः

- रूस में बिगड़ते आर्थिक हालात के बीच राजनीतिक बदलाव

- ईरान न्यूक्लियर पावर के मसले पर रवैया नरम कर सकता है

- कुछ बड़ी इकोनॉमी धराशायी होने की कगार पर पहुंच सकती हैं

- नए शक्तिशाली देशों का उदय और बड़े युद्घ भी हो सकते हैं

=>कहीं खुशी, कहीं गम:-
- तेल के गिरते दाम ने वेनेजुएला, रूस, सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों को मुश्किल में डाल दिया है। लेकिन, अमेरिका, भारत और फिलीपींस जैसे देश इसका फायदा उठा रहे हैं। वेनेजुएला में महंगाई दुनिया में सबसे अधिक है और रूस में रूबल सबसे नीचले स्तर पर आ गया है।

- ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की स्टडी के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमत 40 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आती है तो फिलीपींस सबसे तेज ग्रोथ करने वाली इकोनॉमी बन जाएगी। दूसरी तरफ रूस की इकोनॉमी 2.5 फीसद की दर से सिमटती जाएगी।
- हांग कांग सबसे ज्यादा फायदे में रहेगा और भारत को भी इसका बड़ा लाभ मिलेगा, लेकिन सऊदी अरब, रूस और संयुक्त अरब अमीरात का हाल सबसे बुरा होगा।

=> विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में जो बदलाव दिख सकते हैं, उनका अंदाजा कुछ साल पहले तक किसी ने नहीं लगाया होगा। 
- 2015 में ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम रोक सकता है और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस्तीफा देना पड़ सकता है।

- रूस की अर्थव्यवस्था पहले से परेशानी में है। स्थिति और बिगड़ी तो पुतिन को किसी और के लिए जगह बनानी पड़ सकती है या फिर रूस अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखने के लिए और आक्रामक हो सकता है। उसका यह रुख दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

- यदि तेल 40 डॉलर पर रहा तो ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स की स्टडी के मुताबिक अगले दो साल में भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी और विकास दर में इजाफा होगा।

 

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