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विलुप्त होते पक्षी और जैव विविधता पर मंडराता खतरा

- पक्षी और उनके रहवास क्षेत्रों पर शोध उनका संरक्षण करने वाली ख्यात संस्था बॉम्बे नेचरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) ने पिछले दिनों अपनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट में कहा है कि देशभर में फैले जैव-विविधता से भरपूर पक्षियों के कई रहवास स्थल गंभीरतम खतरे में हैं।
- मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा अन्य कई राज्यों में स्थित हैं। ये स्थल राज्य सरकारों द्वारा चिह्नित औरसंरक्षितहोने के बाद भी विविध चुनौतियों से जूझ रहे हैं। पक्षी संरक्षण की भाषा में इन्हेंआईबीएअर्थातइम्पार्टेन्ड बर्ड एरियाके नाम से जाना जाता है।

- बीएनएचएस के मुताबिक देश में कम से कम दस ऐसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां के विशिष्ट पक्षी और उनके रहवास के क्षेत्र हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं, यदि राज्य सरकारों ने उनकी ओर तुरंत ध्यान नहीं दिया। 
- उदाहरणार्थ मध्यप्रदेश में रतलाम के पास सैलाना में पाया जाने वाला दुर्लभ खरमोर पक्षी, सरदारपुर (धार) का छोटा फ्लोरिकन या गुजरात की फ्लैमिंगो सिटी (कच्छ) या सोलापुर-अहमदनगर (महाराष्ट्र) में लगातार कम होते ग्रेट इंडियन बस्टर्ड उन प्रजातियों में शामिल हैं, जिनके अस्तित्व पर खतरे की घंटी बज रही है।
- भारत में तो रंग-बिरंगी चिड़ियाओं के साथ बाघ, तेंदुए, हाथी जैसे वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है।

=>"पक्षियों की संख्या कम होने के कारण":-

- अधोसंरचना विकास, संरक्षण की गलत नीतियां, अवैध शिकार, तेजी से हो रहा शहरीकरण, खेती में प्रयोग होने वाली जहरीली खाद दवाइयां जैसे कारणों से पक्षियों की संख्या कम होती जा रही है।

- गौरतलब है कि विश्व के 122 देशों में फैले 12000 ‘आईबीएमें से 356 पर गंभीर संकट मंडरा रहा है, जिनमें भारत के 10 क्षेत्र शामिल हैं।

- कहना होगा कि नैसर्गिक संतुलन बनाए रखने और जलवायु बदलाव के खतरों

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