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तमिलनाडु के थैनी जिले में बोडी पहाड़ीपर न्यूट्रिनो बेधशाला का निर्माण शुरू

- ब्रह्मांड के रहस्यमयी तत्व न्यूट्रिनो कण को लेकर दुनियाभर में चल रहे शोध के बीच भारतीय वैज्ञानिक भी इस पर महाप्रयोग की तैयारी में हैं। न्यूट्रिनो पर महाप्रयोग तमिलनाडु में पहाड़ के नीचे बनाई जा रही प्रयोगशाला में होगा। न्यूट्रिनो बेधशाला का निर्माण शुरू हो चुका हैI
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केंद्र सरकार ने न्यूट्रिनो पर शोध के लिए 1600 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है।

- शोध के लिए तमिलनाडु के थैनी जिले में बोडी पहाड़ी के नीचे एक किलोमीटर गहराई में प्रयोगशाला बनाई जा रही है। 
- परियोजना का उद्देश्य न्यूट्रिनो कणों का अध्ययन करना है
- इसकी जिम्मेदारी टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान को दी गई है।
- इस प्रोजेक्ट के निदेशक प्रोफेसर नबा मंडल हैं। 
- महाप्रयोग 2020 से शुरू होगा। इसमें मुख्य डिटेक्टर "आई कैल" होगा।
- इस प्रयोग में 50 हजार टन लोहे का इस्तेमाल होगा। शोध में देश 25 विश्वविद्यालय, आईआईटी अन्य संस्थाएं शामिल होंगी। इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा सहयोग किया गया है।

=> यह प्रयोग सिर्फ न्यूट्रिनो की विस्तार से जानकारी उपलब्ध कराएगा, बल्कि ब्रह्मांड के तमाम रहस्यों को भी उजागर करेगा।

=>"न्यूट्रिनो का रहस्य"

- न्यूट्रिनो वो सूक्ष्म कण हैं, जिनका सूर्य, तारों एवं वायुमंडल में प्राकृतिक रूप से निर्माण होता है।
- न्यूट्रिनो के बारे में माना गया कि ये द्रव्यमान रहित कण हैं, लेकिन हाल ही में न्यूट्रिनो दोलन परिघटना के प्रयोग से यह बात सिद्ध नहीं हो सकी

 

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