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रुपए में गिरावट के कारण और उसका असर

रुपए में ऐसे समय गिरावट रही है, जब महंगाई बढ़ने की दर घटी है और अगले वित्त वर्ष आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। यह हैरान करने वाली स्थिति है क्योंकि ऐसे हालात में मुद्रा अक्सर मजबूत होती है।

- रुपए को इन दिनों अंतरराष्ट्रीय और घरेलू वजहों से मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 7 माह के दौरान अमेरिकी ॉलर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर में 9 प्रतिशत गिरावट चुकी है।

=>"रुपए में कमजोरी के कारण"

- कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आने की वजह से वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर चिंता पैदा हो गई है, नतीजतन विकासशील देशों की मुद्राओं में बिकवाली को बढ़ावा मिल रहा है।

- तेल की कीमतें पिछले पांच साल के निचले स्तर पर आने की वजह से रूस की मुद्रा रूबल में 45 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट आई और चीन में कारखानों का उत्पादन सात माह के निचले स्तर पर गया।

- अमेरिकी डॉलर में मजबूती आने की वजह से भी करेंसी मार्केट में अस्थिरता बढ़ी है क्योंकि भारत जैसे विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर डॉलर मजबूत होने का विपरीत असर होता है।

- घरेलू मोर्चे पर आयात में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण व्यापार घाटा पिछले 18 माह के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। ज्यादा आयात का मतलब होता है विदेशी मुद्रा अधिक मात्रा में बाहर जाना।

=>आगे और गिरेगा रुपया?

- यदि आयात (मसलन सोने का) आगे और बढ़ते हैं और विदेशी पूंजी की आमद घटती है तो रुपए में आगे और गिरावट आएगी

- यदि चालू खाता घाटा (सीएडी) बढ़ता है तो रुपए की विनिमय दर पर इसका नकारात्मक असर होगा

- यदि वैश्विक आर्थिक विकास में गिरावट आती है, तो निर्यात में घटेगा और रुपए

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