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तापमान में निरंतर वृद्धि और जलवायु परिवर्तन

- उत्तर भारत में जमीन से पांच किलोमीटर ऊपर मौजूद एक एंटीसाइक्लोन गर्मी को और गरम बनाने का काम कर रहा है.
- एंटीसाइक्लोन में हवाएं एंटीक्लॉकवाइज चलती हैं. यानी हवाएं ऊपर से नीचे की ओर आती हैं. इस स्थिति में वायुमंडलीय दाब बढ़ जाता है. वायुमंडलीय दाब बढ़ने के साथ ही तापमान भी बढ़ता है.
- इस स्थिति में गरम हवाएं और भी गरम हो गई हैं. जहां एक तरफ समूचे मैदानी इलाकों में पछुआ हवाओं ने तापमान ऊपर उठा दिया है, वहीं दूसरी तरफ कमजोर वेस्टर्न डिस्टरबेंस चढ़े हुए पारे को लगातार ऊपर ही रहने दे रहे हैं. हीट वेव कंडीशन (यानी तीव्र लू) ने गर्मी के प्रकोप को और बढ़ा दिया है. अब हालत यह है कि बढ़े हुए पारे के बीच लू का सामना भी करना पड़ रहा है.
- भारत में लू लगने से हाइपोथेमिया और हृदय व सांस से संबंधित रोगी बढ़ रहे हैं. देश के अधिकतर शहरों का अधिकतम तापमान 40-47 डिग्री सेल्सियस के बीच है.
- पिछले दिनों पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने जलवायु परिवर्तन पर ‘इंडियन नेटवर्क फॉर क्लाइमेट चेंज असेसमेंट’ की रिपोर्ट जारी करते हुए चेताया है कि यदि पृथ्वी के औसत तापमान का बढ़ना इसी प्रकार जारी रहा तो आगामी वर्षों में भारत को इसके दुष्परिणाम झेलने होंगे.
- पहाड़, मैदानी, रेगिस्तानी, दलदली क्षेत्र व पश्चिमी घाट जैसे समृद्ध क्षेत्र ग्लोबल वामिर्ंग के कहर का शिकार होंगे.
- रिपोर्ट के अनुसार भारत में कृषि, जल, पारिस्थितिकी तंत्र एवं जैव विविधता व स्वास्थ्य ग्लोबल वार्मिंग से उत्पन्न समस्याओं से जूझते रहेंगे.
- वर्ष 2030 तक औसत सतही तापमान में 1.7 से 2 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है.
- इस रिपोर्ट में चार भौगोलिक क्षेत्रों- हिमालय क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र, पश्चिमी घाट व तटीय क्षेत्र- के आधार पर पूरे देश पर जलवायु परिवर्तन का अध्ययन किया गया है. इन चारों क्षेत्रों में तापमान में वृद्धि के कारण बारिश और गर्मी-ठंड पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन कर संभावित परिणामों का अनुमान लगाया गया है.
- यह रिपोर्ट बढ़ते तापमान के कारण समुद्री जलस्तर में वृद्धि एवं तटीय क्षेत्रों में आने वाले चक्रवातों पर भी प्रकाश डालती है.चक्रवातों में वृद्धि का अनुमान .
{इस फैक्ट को हम पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के प्रत्येक प्रश्न में उपयोग कर सकते हैं.}

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