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'मिशन इंद्रधनुष

&raquo;&nbsp;कोई भी राष्ट्र तब तक स्वस्थ नहीं रह सकता जब तक कि उसके बच्चे, जो उसकी सबसे मूल्यवान संपत्ति हैं, स्वस्थ नहीं रहेंगे। ऐसा तभी हो सकता है, जब हम तमाम टीका निवारणीय रोगों के विरुद्ध सभी बच्चों का टीकाकरण कर देंगे।&#39;<br /> <br/>&raquo;&nbsp;मिशन इंद्रधनुष&#39; का उद्देश्य वर्ष 2020 तक उन सभी बच्चों को इसके दायरे में लाना है, जिनका सात &#39;टीका निवारणीय&#39; रोगों के विरुद्ध या तो टीकाकरण हुआ ही नहीं है अथवा उनका आंशिक टीकाकरण ही हुआ है।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;इन सात टीका निवारणीय रोगों में डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, टीबी, खसरा और हैपेटाइटिस बी शामिल हैं।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जीवन को खतरे में डालने वाली ऐसी सात बीमारियों से बच्चों के संरक्षण के लिए राष्ट्रव्यापी पहल की है, जिनका निवारण टीकाकरण के जरिए आसानी से हो सकता है।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;सभी बच्चों के माता-पिता तथा अभिभावकों से उनके बच्चों का पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करें।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;मिशन इंद्रधनुष के बारे में विस्तार से बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने सूचित किया कि वर्ष 2009 से वर्ष 2013 के बीच टीकाकरण का दायरा 61 फीसदी से बढ़कर 65 फीसदी हो गया। इसका मतलब यही है कि हर साल टीकाकरण के दायरे में महज 1 फीसदी की ही वृद्धि हो पाई।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;हर साल पांच फीसदी या इससे भी ज्यादा बच्चों को इसके दायरे में लाते हुए टीकाकरण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए &#39;मिशन मोड&#39; को अपनाया गया है, ताकि वर्ष 2020 तक पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य हासिल किया जा सके।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;पहले चरण में &#39;ज्यादा फोकस&#39; वाले 201 जिलों में टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इनमें से 82 जिले केवल चार राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में ही हैं। भारत में &#39;बिना टीकाकरण&#39; एवं &#39;आंशिक टीकाकरण&#39; वाले जितने भी बच्चे हैं, उनमें से तकरीबन 25 फीसदी इन चारों राज्यों के इन्हीं 82 जिलों में रहते हैं। इसी तरह दूसरे चरण में 297 जिलों को लक्षित किया जाएगा।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;इस मिशन को सफल बनाने के लिए तैयार की गई माइक्रो योजनाओं में प्रणालियों को सशक्त बनाने, टीकों के कोल्ड चेन प्रबंधन, नियमित निगरानी और पूर्ण टीकाकरण से वंचित प्रत्येक बच्चे तक पहुंच बनाने के लिए पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम से मिली सीख का इस्तेमाल किया जाएगा।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;अध्ययनों से पता चला है कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से बच्चों के वंचित रहने का कारण या तो माता-पिता और अभिभावकों को इस अभियान की जानकारी न होना अथवा टीकाकरण से संबद्ध कोई आशंका या भय था।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;इन दोनों समस्याओं से एक ऐसे जागरूकता अभियान के माध्यम से कारगर ढंग से निपटा जा सकता है, जो टीकाकरण के विशेष महत्व पर जोर दे और इस बारे में माता-पिता अथवा अभिभावक की किसी भी तरह की आशंका का निवारण करे।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;देश के आकार और ग्रामीण एवं दूरदराज के इलाकों, तटीय इलाकों, खनन इकाइयों, सुदूर गांवों आदि में बच्चों तक पहुंच बनाने की कठिनाइयों के कारण मिशन के कारगर कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतिI<br />

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