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कैंसर कोशिका को हानिरहित कोशिका में बदला

&raquo;&nbsp;अमेरिका की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के एक शोधकर्ता ने ऐसी प्रक्रिया ढूंढ़ निकाली है जो खतरनाक ल्यूकेमिया कोशिकाओं (रक्त कैंसर) को परिपक्व करके हानिरहित प्रतिरोधी कोशिकाओं में बदल सकती है।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;मेडिसीन के सहायक प्रोफेसर रवि मजेती ने एक मरीज के शरीर से ल्यूकेमिया कोशिकाओं को लेकर उन्हें कल्चर प्लेट में जीवित रखने का प्रयास किया। उसी दौरान इस प्रक्रिया की ओर उनका ध्यान गया।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;बी-सेल ल्यूकेमिया कोशिकाएं कई मायनों में मूल कोशिकाएं होती हैं जो अपरिपक्व स्थिति में रहने के लिए मजबूर होती हैं।<br /> <br/>&raquo;&nbsp; अध्ययन के दौरान मेजेती और उनके वरिष्ठ स्कॉट मैकेलन ने पाया कि कल्चर में कुछ कैंसर कोशिकाएं अपना आकार बदल रही हैं जो मेक्रोफेगस जैसा लग रहा था। टीम ने पुष्टि की कि कुछ साल पहले चूहों की मूल कोशिकाओं में बदलाव के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को इंसानों पर लागू किया जा सकता है जो मनुष्य की कैंसर कोशिकाओं को मेक्रोफेगस और पेथोजींस में बदल सकते हैं। <br/> <br /> <strong><span style="color:#800000;">क्या है मेक्रोफेगस</span></strong><br /> &raquo;&nbsp; खून में कुछ स्थिर और कुछ तैरती मेक्रोफेगस कोशिकाएं होती हैं जो कैंसर कोशिकाओं को खा और पचा जाती जाती हैं।<br /> &raquo;&nbsp;जब कैंसर कोशिकाएं मेक्रोफेगस कोशिकाओं में बदलेंगी तो वे न केवल निष्क्रिय हो जाएंगी, बल्कि कैंसर से लड़ाई में भी मददगार होंगी। शोधकर्ता अब ऐसी दवा बनाने का प्रयास करेंगे जो इस प्रक्रिया को तेज कर सके।<br />

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