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असर खोने के कगार पर हैं एंटीबायोटिक्स

&bull;&nbsp;दुनिया में जिस तेजी से एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उसी तेजी से इनका असर भी कम होता जा रहा है।<br /> <br/>&bull;&nbsp;अनुमान है कि 2010 से 2030 के बीच दुनिया में मवेशियों में इस्तेमाल होने वाले एंटीबायोटिक्स में 67 फीसद इजाफा होगा।<br /> <br/>&bull;&nbsp;वैज्ञानिकों का कहना है कि समान अवधि के दौरान भारत समेत ब्रिक्स के अन्य चारों देश ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका में एंटीबायोटिक्स की खपत में 99 फीसद की बढ़ोतरी हो जाएगी।<br /> <br/>&bull;&nbsp;वीं शताब्दी में एंटीबायोटिक्स की खोज मानव स्वास्थ्य की दिशा में एक क्रांति थी।<br /> <br/>&bull;&nbsp;लेकिन इनकी बढ़ती खपत के कारण इनके प्रति बढ़ती प्रतिरोधी क्षमता ने इनके प्रभाव और साथ ही करोड़ों लोगों की जिंदगी खतरे में डाल दी है।&#39;<br /> <br/>&bull;&nbsp; पहले भी एंटीमाइक्रोबियल्स के इस्तेमाल और मवेशियों में इनके प्रति पैदा हो रही प्रतिरोधी क्षमता के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर शोध किए जा चुके हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि एंटीबायोटिक्स की खपत में होने वाला दो तिहाई इजाफा मांस के लिए बढ़ने वाले मवेशियों के कारण होगा जबकि एक तिहाई इन मवेशियों को तैयार करने की प्रक्रिया में बदलाव के कारण।<br /> <br/>&bull;&nbsp;शोधकर्ताओं ने कहा कि दुनियाभर में मांस प्रोटीन की मांग तेजी से बढ़ी है और इसी प्रतिस्पर्धा में एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है।<br />

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