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चुनाव सुधार से संबंधित ये सुझाव आप विभिन्न प्रश्नों के उत्तरों के साथ साथ सम्बद्ध निबंध में भी उप

strong><span style="color:#800000;">&quot;चुनाव सुधार पर विधि आयोग की महत्वपूर्ण सिफारिशें&quot;</span></strong><br /> &raquo;&nbsp;विधि आयोग ने चुनाव सुधार पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी दी है।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एपी शाहI <p style="margin-left: 40px;"> <br /> 1.- रिपोर्ट में आयोग ने निर्दलीय उम्मीदवार के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की सिफारिश की है। कहा है कि निर्दलीय उम्मीदवार ज्यादातर या तो डमी उम्मीदवार होते हैं या फिर गंभीर उम्मीदवार नहीं होते हैं।</p> <br /> <br/>&raquo;&nbsp; कुछ निर्दलीय तो अन्य उम्मीदवार के समान नाम होने के कारण मतदाताओं में भ्रम पैदा करने के लिए चुनाव में खड़े हो जाते हैं।<br /> <br/>&raquo;&nbsp;आयोग ने कहा है कि जनप्रतिनिधित्व कानून (आरपी एक्ट) की धारा चार और पांच में संशोधन किया जाए और सिर्फ पंजीकृत राजनीतिक दल को ही लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की इजाजत दी जाए।</p> <p style="margin-left: 40px;"> <br /> 2. इसके अलावा चुनाव खर्च के साथ मतदाताओं और तंत्र को होने वाली बेवजह की परेशानी रोकने के लिए किसी भी प्रत्याशी को सिर्फ एक ही सीट से चुनाव लड़ने की इजाजत दी जाए। इसके लिए आयोग ने आरपी एक्ट की धारा 33 (7) संशोधित करने की बात की है जिसमें अभी उम्मीदवार को दो सीटों से चुनाव लड़ने की इजाजत है।<br /> 3. विधि आयोग ने लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव में एक ही मतदाता सूची इस्तेमाल करने के चुनाव आयोग के सुझाव का भी समर्थन किया है।<br /> 4. स्पीकर आफिस की गरिमा बनाए रखने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची में संशोधन कर दल बदल कानून के तहत सदस्य को अयोग्य ठहराने का अधिकार राष्ट्रपति और राज्यपाल को दिए जाने की सिफारिश की है। यह भी कहा है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल ऐसे मामले में चुनाव आयोग की सलाह पर फैसला लेंगे।<br /> 5. राजनैतिक दलों और प्रत्याशी के चुनाव खर्च व पार्टी चंदे के बारे में आयोग ने विस्तृत सिफारिशें की हैं। कहा है कि प्रत्याशी के चुनाव खर्च की गिनती की अवधि में बदलाव किया जाए। अगर किसी राजनीतिक दल को 20000 से कम चंदे के जरिये कुल 20 करोड़ से ज्यादा या पार्टी को मिले कुल चंदे का 20 फीसद मिलता है तो उसे उसका ब्योरा देना होगा।<br /> 6. इसके अलावा कारपोरेट कंपनियों को राजनीतिक दलों को चंदा देने से पहले एजीएम में प्रस्ताव पास कराना होगा। चुनाव की शुचिता बनाए रखने के लिए लोकसभा और विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के छह महीने पहले सरकार की उपलब्धियों का बखान करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगा दी जाए।<br /> 7. हालांकि विधि आयोग अनिवार्य मतदान और नोटा में पड़े मतों के आधार पर उम्मीदवार का चुनाव निरस्त करने और चुने गए उम्मीदवार को वापस बुलाने के लिए राइट टु रिकाल का अधिकार देने के पक्ष में नहीं है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एपी शाह का कहना है कि मौजूदा स्थिति में वे ऐसे अधिकार नहीं दिए जा सकते।</p> <p> <br /> <span style="color:#800000;">Note:- चुनाव सुधार पर विधि आयोग की यह दूसरी रिपोर्ट है इससे पहले आयोग ने राजनीति का अपराधीकरण रोकने के लिए दागियों को चुनाव से बाहर रखने के बारे में रिपोर्ट दी थी।</span><br /> &nbsp;</p>

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