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चुनाव सुधार पर विधि आयोग की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु

<p> <strong><span style="color:#800000;">मुख्य सिफारिशें:-</span></strong><br /> 1. सिर्फ पंजीकृत राजनीतिक दलों को ही चुनाव में उम्मीदवार उतारने की हो इजाजत<br /> 2. एक उम्मीदवार को एक ही जगह से चुनाव लड़ने की हो इजाजत<br /> 3. कॉरपोरेट कंपनियों के लिए अनिवार्य हो कि वे राजनीतिक दलों को चंदा देने से पहले एजीएम में शेयर होल्डर्स की मंजूरी लें<br /> 4. लोकसभा विधानसभा कार्यकाल पूरा होने से छह महीने पहले से सरकार की उपलब्धियों का बखान करने वाले सरकारी विज्ञापनों पर लगे रोक<br /> 5. ओपीनियन पोल करने वाली एजेंसी का पूरा ब्योरा और सर्वे की प्रक्रिया लोगों को बताई जाए<br /> 6. लंबे अरसे से चुनाव में भाग न लेने वाली पार्टियों को पंजीकरण रद किया जाए<br /> 7. चुनाव के दौरान पेड न्यूज को रोकने के लिए नियमों को सख्त किया जाए<br /> 8. चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, लोकसभा के नेता विपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश की तीन सदस्यीय कोलेजियम करे<br /> 9. दल बदल के मामले में किसी सांसद विधायक की सदस्यता रद करने का अधिकार सदन के अध्यक्ष के बजाए राष्ट्रपति या राज्यपाल को दिया जाए<br /> 10. पार्टियों के आंतरिक लोकतंत्र के नियम जैसे संगठन चुनाव, उम्मीदवार के चयन आदि के नियम बनाए जाएं और नियमों का उल्लंघन करने वाली पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद किया जाए और उन्हें 10 साल तक चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए<br /> 11. चुनाव खर्च का हिसाब ने देने वाले उम्मीदवार को पांच साल के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया जाए<br /> 12. चुनाव की सरकारी फंडिग व्यवहारिक नहीं<br /> 13. अगर राजनीतिक दल 20 हजार रुपये से कम के चंदे के जरिये 20 करोड़ से ज्यादा रकम पाते हैं या यह रकम उनके कुल चंदे की 20 फीसद से ज्यादा होती है तो उन्हें चंदा देने वालों का ब्योरा देना होगा।<br /> 14. प्रत्याशी का चुनाव खर्च नामांकन से नतीजे आने तक के बजाए चुनाव अधिसूचना जारी होने से नतीजे आने तक गिना जाए</p> <p> <br /> <strong><span style="color:#800000;">विधि आयोग इन पर नहीं है सहमत</span></strong><br /> 1. नोटा को राइट टु रिजेक्ट मानना और इसके आधार पर चुनाव निरस्त करना<br /> 2. लोकसभा विधानसभा चुनाव में राइट टु रिकाल यानि निर्वाचित सदस्य को वापस बुलाने का अधिकार<br /> 3. मतदान की अनिवार्यता<br /> &nbsp;</p>

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