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मतदाता सूची में दोहराव न होने वाला पहला देश बनेगा भारत

&bull;&nbsp;दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपनी पहचान में एक और आयाम जोड़ने जा रहा है। भारत दुनिया का ऐसा पहला देश बनने जा रहा है, जहां मतदाता सूची में दोहराव नहीं होगा। अर्थात एक मतदाता का नाम दो जगहों पर नहीं होगा। इसके लिए मतदाता सूची को आधार नंबर युक्त मतदाता पहचान पत्र से जोड़ा जाएगा।<br /> <br/>&bull;&nbsp;इसके बाद भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन जाएगा, जहां सारे मतदाता बायोमेट्रिक पहचान वाले होंगे। <br/><br /> <strong><span style="color:#800000;">दो जगह नाम होना दंडनीय अपराध</span></strong><br /> &bull;&nbsp;मतदाता सूची में दो जगहों पर नाम दर्ज कराने से बचने की अपील करते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि यह एक अपराध है और इसके लिए एक साल तक कैद की सजा हो सकती है।<br /> &bull;&nbsp;चुनाव आयोग ने कहा कि जब एक बार आधार नंबर मतदाता सूची में दर्ज हो जाएगा, उसके बाद मतदाता ऑनलाइन ही अपना पता भी बदल सकते हैं। आधार ही मूल पहचान होगी। इससे मतदाता सूची में दोहराव तथा पता बदलवाने में परेशानी की शिकायत भी दूर हो जाएगी। <br/><br/> <strong><span style="color:#800000;">अगस्त तक सभी के पास होगा आधार</span></strong><br /> &bull;&nbsp;चुनाव आयोग ने कहा अब तक 85 करोड़ भारतीयों के पास आधार नंबर है। उम्मीद है कि शेष 25-30 करोड़ लोगों को इस साल अगस्त तक आधार कार्ड मिल जाएंगे। <br/><br/> <strong><span style="color:#800000;">तो 95 फीसद समस्याएं हल</span></strong><br /> &bull;&nbsp; चुनाव सुधार के बारे में आयोग ने कहा कि राजनीतिक सुधार पर भी उसी जज्बे से बात होनी चाहिए। सरकार ने यदि विधि आयोग की सिफारिशें मान ली तो चुनाव सुधार की 95 फीसदी समस्याएं हल हो जाएंगी। <br/><br/>&bull;&nbsp; चुनाव में उम्मीदवारों के खर्च की सीमा के बारे में चुनाव आयोग ने कहा कि इस मामले में चौकस रहना होगा ताकि धन और बाहुबल चुनाव में निर्णायक नहीं हों। आयोग ने कहा कि नामांकन भी ऑनलाइन भरा जाना चाहिए ताकि लोग उम्मीदवारों के गुण-दोष के बारे में जान सकें।</p> <br/><br/> <strong><span style="color:#800000;">चुनाव नहीं लड़ने वाली पार्टियों का पंजीयन हो सकता है रद्द</span></strong><br /> &bull;&nbsp;चुनाव आयोग ने कहा कि आयोग उन पार्टियों का पंजीयन रद्द करने की योजना बना रहा है, जिन्होंने पिछले पांच-दस सालों में चुनाव नहीं लड़े हैं। इस समय देश में 1600 पार्टियां पंजीकृत हैं, जिनमें से 200 से भी कम पार्टियां चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेती हैं। <br/><br/> &bull;&nbsp;पंजीयन होने से राजनीतिक दलों को आयकर में छूट के अलावा सरकार से कई लाभ मिलते हैं। ऐसे कई उदाहरण हैं कि पार्टियों ने नगर निगम या पंचायत चुनाव तक नहीं लड़े हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

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