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विदेशियों के लिए गोद लेने के नियम हुए उदार

&bull;&nbsp;विदेशी दंपत्तियों को बच्चा गोद लेने में कोई खास दिक्कत न हो, इसके लिए सरकार ने इससे संबंधित नियमों को उदार कर दिया है।<br /> <br/>&bull;&nbsp;विदेश मंत्रालय ने अपने सभी पासपोर्ट कार्यालयों को निर्देश दिया है कि गोद लिए बच्चे को पासपोर्ट जारी करते समय जन्म प्रमाण पत्र दाखिल करने पर जोर न दिया जाए। कोर्ट के आदेश में दी गई बच्चे की जन्म तिथि को ही स्वीकार कर पासपोर्ट दे दिया जाए।<br /> <br/>&bull;&nbsp; विदेश मंत्रालय ने इस बारे में बाकायदा परिपत्र जारी किया है। उसके अनुसार पासपोर्ट अधिकारी अब गोद लेने के लिए कोर्ट के आदेश में दी गई जन्म तिथि को ही स्वीकार कर पासपोर्ट जारी करेंगे। लेकिन इसके साथ सेंट्रल एडाप्शन रिसोर्स अथाॅरिटी (सीएआरए) द्वारा प्रदत्त अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) संलग्न किया जाना जरूरी होगा।<br /> <br/>&bull;&nbsp;विदेश मंत्रालय ने यह कदम महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के उस पत्र के बाद उठाया है, जिसमें कहा गया था कि गोद लिए गए कुछ परित्यक्त एवं अनाथ बच्चों को पासपोर्ट के लिए अनिवार्य जन्म प्रमाण पत्र हासिल करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर 19 मार्च को जारी अपने परिपत्र में विदेश मंत्रालय ने इन दिक्कतों को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठाया है।<br /> <br/>&bull;&nbsp;परिपत्र में कहा गया है, &quot;गोद लिए गए बच्चों की परेशानी कम करने के लिए पासपोर्ट जारी करने के लिए नियमों में ढील दी गई है। पासपोर्ट अधिकारी जन्म प्रमाण पत्र की प्रति या कोर्ट के आदेश में वर्णित जन्म तिथि को सीएआरए के एनओसी के साथ स्वीकार कर पासपोर्ट जारी कर सकता है। सीएआरए के एनओसी में उल्लिखित जन्मतिथि को जन्म प्रमाण के रूप में मान लिया जाएगा।&#39;&#39;<br /> <br/>&bull;&nbsp;इससे पूर्व सरकार ने ऐसे बच्चों के पुलिस सत्यापन कराने वाले प्रावधान को खत्म कर दिया था। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने देश में गोद लेने की धीमी रफ्तार पर गहरी चिंता जताई है। उनके अनुसार देश में करीब 50 हजार अनाथ बच्चों का होना शर्मनाक है। इनमें से करीब एक हजार बच्चों को ही हर साल गोद लिया जाता है।<br />

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