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सामाजिक व्यवस्था: भारतीय परिवारों की बदली सोच- देर से शादी और कम बच्चे

&raquo;&nbsp;भारतीय परिवारों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले देश में जल्दी शादी और ज्यादा बच्चों की प्रथा थी, वहीं अब भारतीय महिलाओं की सोच देर से शादी और कम बच्चों की हो गई है।<br/><br /> &raquo;&nbsp;जनगणना विभाग द्वारा करीब 73 लाख (7.35 मिलियन) लोगों पर किए गए सेंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे-2012 में कुछ महत्वपूर्ण बातें सामने आईं हैं।<br /><br/> &raquo;&nbsp;कम बच्चों और बच्चों में जन्म के अंतर से शिशु मृत्यु दर पहले से बहुत कम हो गई है। साल 2012 में 15 से 49 उम्र के बीच की महिलाओं ने 25 लाख बच्चों को जन्म दिया।</p> <br /> <strong><span style="color:#800000;">घटने लगी कम उम्र में शादी</span></strong><br /> &raquo;&nbsp;प्रति एक हजार महिलाओं में 82 बच्चों के जन्म को जनरल फर्टीलिटी रेट (जीएफआर) कहा जाता है।<br/><br /> &raquo;&nbsp;पिछले एक दशक के दौरान 100 जीएफआर 18 प्रतिशत तक घट गई है। यह भारतीय परिवारों में आ रहे बदलावों को साफ दर्शाता है।<br /><br/> &raquo;&nbsp;इस दौरान कम उम्र में शादी और बच्चों की प्रथा 32 प्रतिशत घटी है।<br /><br/> &raquo;&nbsp;करीब 43 प्रतिशत बच्चों को जन्म देने वाली मांओं की उम्र 20 से 24 साल के बीच है।<br /><br/> &raquo;&nbsp;ग्रामीण क्षेत्रों में 20 से 24 उम्र समूह और शहरी क्षेत्रों में 25 से 29 उम्र समूह की फर्टीलिटी रेट ज्यादा रही।<br />

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