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ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था ज्ञान के द्वारा विकास में तेजी

<p> आज के युग में ज्ञान का अभाव एक अक्षम्य अपराध है। जब कम्प्यूटर व इन्टरनेट पर करोड़ों शब्दों में जानकारी आपके &#39;माऊस&rsquo; पर एक क्लिक करने से उपलब्ध हो जाती है, तो भलाई इसी में है कि हर संस्था, कंपनी, व्यक्ति अपने काम में बढ़ोतरी और कुशलता लाने के लिए नवीनतम सुसंगत जानकारी को बटोरे, और उसके आधार पर अपने लक्ष्यों का निर्धारण करें। नई से नई, कार्य-प्रणाली विकसित करें। हर विषय में &#39;हरकत में ही बरकत है&rsquo; वाला मुहावरा तो लागू होता ही है। जब तक कोई इन जानकारियों को बटोरेगा नहीं उनका ध्यान, मनन, विश्लेषण करेगा नहीं तब तक विशुद्ध जानकारी ज्ञान कैसे बनेगी?<br /> <br /> <strong><span style="color:#800000;">पूरी पृथ्वी का लेखा जोखा</span></strong><br /> विकास का विश्व-स्तरीय अगुआ, विश्व बैंक है। ये वह मानते हैं, कि ज्ञान-प्रबंधन 80 प्रतिशत बुद्धि का खेल है, और 20 प्रतिशत तकनीक का। वे अरबन नॉलेज इंजीनियरिंग अथवा शहरी ज्ञान यांत्रिकी का एक आधारभूत आंकड़े तैयार कर रहे हैं। इसमें शामिल होगी अखिल विश्व की बातें, जैसे-</p> <p> &nbsp;</p> <p style="margin-left: 40px;"> <br /> 1. भूमि के इस्तेमाल की योजना<br /> 2. शहरों का नवीनीकरण<br /> 3. प्रदूषण<br /> 4. यातायात<br /> 5. ग्रीन पीस सेटेलाईट मैपिंग अथवा उपग्रह से जाकर धरती के भौगोलिक/खनिज स्वरूप की पैमाईश। इसका एक उदाहरण : (उन्होंने एक रूसी लुगदी वाले कागज कारखाने को प्रेरित किया कि वे वनों को विनाश से बचाने की खातिर अपने उद्योग की प्रणाली में परिवर्तन करें)।</p> <br /> <br /> <p> <strong><span style="color:#800000;">चिरस्थायी /सतत विकास क्या है?</span></strong><br /> &raquo;&nbsp;चिरस्थायी विकास की धारणा, उसके लिए तथा प्रणाली व प्रक्रिया निर्धारण से व्यापक लाभ के अवसरों के आने को बढ़ावा मिलता है, तथा उत्पादों के डिजाइनिंग तथा प्रबंधन व्यवस्था निरूपित हो पाती है। इससे वर्तमान ज्ञान-भंडार में वह वैज्ञानिक जानकारी शामिल करते हुए नये यंत्र तथा प्रणालियों का विकास करने हेतु बढ़ावा भी मिलता है, जिससे विकास चिरस्थायी रह सके।<br /> &raquo;&nbsp;वैसे परिभाषा की बात करें, तो चिरस्थायी विकास कहते किसे हैं? उस विकास को, जो आज की आवश्यकता पूर्ति के खातिर आने वाले कल के लिये आवश्यक साधनों का आज ही अनावश्यक दोहन नहीं करता है। चाहे यह साधन जल, भूमि, वायु, खनिज, वन और किसी भी प्राकृतिक संपत्ति के रूप में हो।<br /> <br /> <strong><span style="color:#800000;">बौद्धिक सम्पदा का साधन</span></strong><br /> आज हमारे पास ऐसा भी अमूर्त स्रोत है, जिसे बौद्धिक संपदा कहा जाता है। जिसका आकलन पहले नहीं किया जाता था। कोई व्यक्ति यदि कहीं भी काम कर लेता है तो उस अनुभव की बौद्धिक संपदा उसके पास आ जाती है। फिर वह जहां भी जाता है, उस संपदा को औरों के साथ बांट सकता है। दुनिया में विभिन्न श्रेणी के उत्पादों की ऐसी भरभार है कि यदि हमारे उत्पाद में आज की पसन्द के अनुसार परिवर्तन नहीं लाया जाता, तो वह मार्केट से बाहर हो जाता है।<br /> <span style="color:#008000;">उदाहरण के लिये, माईक्रोवेव, कुकर वाले कांच के बर्तन साधारण कांच के बर्तनों से चार गुना महंगे होते हंै। फिर भी वे साधारण कांच के बर्तनों को बाजार से बाहर कर रहे हैं। चूंकि माइक्रोवेव पर भोजन पकाने का चलन बहुत बढ़ गया है। फिर अब बारी आई है इस जानकारी की, कि प्लास्टिक के बर्तनों में माईक्रोवेव पर भी खाना गर्म करना हानिकारक है, तो वे बर्तन भी बाजार से तत्काल बाहर होते जायेंगे। अब टपरवेयर के बर्तन चले हंै जिन्हें बेचने की तकनीक भी नई है। इनका विज्ञापन बाहर खुले में (अखबारों आदि में) नहीं होगा, बल्कि किसी सम्भ्रान्त घर में लंच/डिनर पर होगा, जिसमें उच्च वर्ग के लोग ही आमंत्रित होंगे, जो स्वभावत: उस नये उत्पाद को खरीदने को उद्यत होंगे। समाज के अन्य वर्गों की प्रवृत्ति होती है कि वे उच्च वर्ग की नकल कर सकें।</span><br /> <br /> <strong><span style="color:#800000;">सटीक जानकारी का अभाव</span></strong><br /> आज आप बाजार जाकर घंटों ट्रैफिक का सामना करने की परेशानी से बच सकते हैं तथा अपनी जरूरत की चीजों की ऑन लाईन खरीदारी कर सकते हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां यही अध्ययन करने में लगी हुई हंै कि किस प्रकार से वे ऑन लाईन अपने उत्पाद अधिक से अधिक बेच सकें। फिर भी वे इस दिशा में और आगे बढऩे के लिए प्रयासशील हंै।<br /> &raquo;&nbsp;प्राइसवाटर हाउस कूपर&rsquo; (पीवीसी) नामक मशहूर विक्रय सलाहकार कंपनी का अध्ययन बताता है कि उन्होंने 800 कंपनियों के मुख्य प्रबंधक से जानकारी ली है व पाया कि लगभग वे सभी 97 प्रतिशत विषय पर प्राप्त ज्ञान को अपनी कंपनी की आगामी सफलता की कुंजी मानते हैं। इसके साथ ही, उन्हें स्पष्ट हुआ है कि 85 प्रतिशत कम्पनियां यह मानती हैं कि उनके पास सटीक जानकारी होती नहीं हैं या बहुत कमजोर होती हंै साथ ही सभी कम्पनियां इस बारे में जागरुक हो रही हैं कि पर्यावरण के मुद्दे को अब वे नकार नहीं सकतीं। यह स्वस्थ विकास के लिए भी जरूरी है और ग्राहक को राजी करने के लिए भी। यहां पर यह फर्क रेखांकित है कि संचित जानकारी तथा ज्ञान व तथा उसके/उसके माध्यम से प्रबंधन में यह अन्तर है कि जानकारी तो सामान्य सूचना है, जो आती चली जाती है, किन्तु ज्ञान उस बिन्दु पर होता है जब उन सूचनाओं के आधार पर हम अपना सटीक कार्य निर्धारण कर सकें। जैसे कि टेलीफोन कैसे काम करता है, यह जानना एक बात है, और उसकी सुनने वाली डोरी बदल सकना सटीक ज्ञान है।<br /> लोग जानकारी का संग्रह अपने अन्दर करते रह सकते हैं, किन्तु वह चीज काम की तब बनती है, जब वे शब्दों में अपना ज्ञान दूसरों तक पहुंचाते हैं। सूक्ष्म अवलोकन और प्रशिक्षु-यांत्रिकता से वह जानकारी दूसरे को भी मिलती है या उस तक पहुंचती है। अतएव व्यावहारिक प्रशिक्षु होने का चरण बहुत जरूरी होता है।<br /> &raquo;&nbsp;अत: ज्ञान का प्रबंधन संक्षेप में यह कह कर बताया जा सकता है कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा बौद्धिक संपदा का आदान प्रदान उत्पाद में गुणवत्ता बढ़ाने, नवाचार, ज्ञानवर्धन, नियोजन, ठोस उत्पाद पर लागू करने बांटने तथा ज्ञान में अधूरेपन को दूर करने के लिये किया जा सकता है। उत्तरोत्तर ज्ञान में वृद्धि करते हुए सटीक निर्णय की क्षमता बढ़ाना ही इसका चरम उद्देश्य है।<br /> &raquo;&nbsp; ज्ञान के जरिये बेहतर प्रबंधन करते हुए हम बाजार को काबू करने की कई सीढिय़ां तय कर सकते हैं। हम यह दावा कर सकते हैं कि हमारा उत्पाद नवीन है, आज की जरूरत के अनुरूप है और पर्यावरण की स्वच्छता के अनुकूल है।</p>

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