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191 साल पहले हुआ था पहला सरकारी भूमि अधिग्रहण

&raquo;&nbsp;क्या आप जानते हैं कि भारत में पहली बार कब कानून के तहत भूमि अधिग्रहण किया गया था। 19वीं शताब्दी में......।<br/><br /> &raquo;&nbsp;1824 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने पहली बार कानून बनाकर जमीन का अधिग्रहण किया था। इसके लिए बाकायदा बंगाल रेजालुशन-1 नाम का कानून बनाया गया था।<br/><br /> &raquo;&nbsp;इसमें सरकार को यह शक्ति प्राप्त थी कि वो सड़क, नहर और सार्वजनिक उपयोग के लिए अचल संपति और जमीनों का अधिग्रहण कर सकती है और उसके बदले मूल्यांकन के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।<br/><br /> &raquo;&nbsp;यह वही समय था, जब ब्रिटिश सरकार भारत में रेल नेटवर्क खड़ा कर रही थी। इसके लिए उसे जमीनों की जरूरत थी और इस कानून से उसे अधिग्रहण की वैधानिक शक्ति मिल गई थी।<br /><br/> &raquo;&nbsp;रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए सरकार ने 1850 में एक और कानून बनाया जिसमें रेलवे को सार्वजनिक उपक्रम माना गया।<br /><br/> &raquo;&nbsp;ब्रिटिश शासनकाल में रेलवे के लिए जमीन अधिग्रहण की जरूरतों को देखते हुए कलकत्ता (अब कोलकाता), बॉम्बे (अब मुंबई) और 1852 में मद्रास (अब चेन्नई) में भी यही कानून लागू किए गए।<br /><br/> &raquo;&nbsp; 1857 में इस कानून को पूरे ब्रिटिश भारत में लागू कर दिया गया था। लेकिन इसकी आड़े में होने वाले भ्रष्टाचार को देखते हुए 1861, 1863 और 1870 में इसमें संशोधन भी किए गए।<br /><br/> &raquo;&nbsp;1894 में एक और संशोधन किया गया, जिससे जमीन मालिक, कलेक्टर द्वारा तय मुआवजे से संतुष्ट न होने की स्थिति में भू-अधिग्रहण को सिविल अदालत में चुनौती दे सकता था। हालांकि यह कानून हैदराबाद, मैसूर और त्रावणकोर की रियासतों पर लागू नहीं था।<br /><br/> &raquo;&nbsp;1947 में आजादी के बाद भारत सरकार ने 1894 का भूमि अधिग्रहण कानून लागू किया।<br /><br/> &raquo;&nbsp;1998 में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस कानून में बदलाव की कवायद शुरू की और 2007 में भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को संसद में पेश किया गया, लेकिन यह पास नहीं हो सका।<br /><br/> &nbsp;</p>

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