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भारत में महिला सशक्तीकरण सरकारी आकलन

महिलाओं महिलाओं की स्थिति और उनके साथ किये जानेवाले व्यवहार में सुधार लाना विकास की प्रमुख चुनौती है. माननीय प्रधनमंत्री जी ने 22 जनवरी, 2015 को हरियाणा के पानीपत से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरुआत की थी. इस अभियान का उद्देश्य भारतीय समाज द्वारा लड़कियों को कमतर आंकने की सोच में सकारात्मक बदलाव लाना है.<br /><br /> भारतीय समाज में लड़कियों के साथ भेदभाव करने की परस्पर विरोधी सोच विद्यमान है. एक तरफ तो भारत में महिला राष्ट्रपति और महिला प्रधानमंत्री के रूप में जानीमानी महिलाएं हुई हैं तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तरों पर बड़े राजनीतिक दलों की प्रमुख भी महिलाएं हैं. इसके अलावा कई महिलाएं कैबिनेट रैंक के मंत्रीपद तक पहुंची हैं तथा कई महिलाएं उद्योग प्रमुख, विशेषकर बैंकिंग क्षेत्र में, हुई हैं.<br /><br /> इसके बावजूद यूएनडीपी की अद्यतन मानव विकास रिपोर्ट-2014 के अनुसार, मानव विकास सूचकांक (एचडीआइ) में 187 देशों में भारत 135वें स्थान पर है और लिंग असमानता सूचकांक (जीआइआइ) में भारत का स्थान 152 देशों में 127वां है. जीआइआइ स्त्री और पुरुष के बीच उपलब्धियों में असमानता दर्शानेवाले समग्र उपायों को तीन प्रकार- प्रजनन स्वास्थ्य, अधिकारिता और श्रम बाजार के आधार पर देखता है. इसके अनुसार, भारत एचडीआइ पर सभी देशों से 25 प्रतिशत नीचे है और जीआइआइ में तो यह प्रतिशत और भी गिर कर 20 प्रतिशत ही रह जाता है.<br /><br /> इसके अलावा भारत में लड़कों की तुलना में लड़कियों की जन्मदर सापेक्षतया पूरी दुनिया में कम है और 2001 में जहां यह गिरावट एक हजार लड़कों की तुलना में 927 लड़कियां थीं, वहीं 2011 में एक हजार लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या 918 ही रह गयी. चीन उन कुछ देशों में ऐसा देश है, जहां लड़कों की तुलना में लड़कियों की जन्मदर और भी कम है.<br /><br /> अधिकांशतया जन्मदर नियंत्रण पर ध्यान देनेवाली जनसंख्या नियंत्रण नीति को बढ़ावा देने में आनेवाली नकारात्मक बातों से शिशुलिंग अनुपात में गिरावट आयी है. यदि प्रत्येक परिवार में कम बच्चे हों, तो मन में यह भावना अधिक बलवती रहती है कि परिवार में कम से कम एक लड़का तो होना ही चाहिए.<br /><br /> <br />ऐसे में सरकार के सामने क्या करें और कैसे करें की स्थिति आ जाती है. उदाहरण के लिए लक्ष्य निर्धारित किये बिना (इएलए अथवा उपलब्धि के अपेक्षित स्तर), महिला नलबंदी और नसबंदी अभियान शिविरों संबंधी प्रोत्साहनों को वापस लेना.<br /> <br />इसके अलावा सरकार निम्नलिखित कार्य कर सकती है:-</p> <br /><p style="margin-left: 40px;"> <br /> (1) भारत में परिवार नियोजन कार्यक्रम की समीक्षा करना, ताकि यह महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों और भारत की जनसंख्या संबंधी जरूरतों के बीच सामंजस्य बैठाया जा सके.<br /> (2) गुणवत्तापूर्ण सेवाओं, स्टैटिक परिवार नियोजन क्लिनिकों और गुणवत्तापूर्ण मानीटरिंग और पर्यवेक्षण के लिए बजट बढ़ाना.<br /> (3) युवाओं की जरूरतों को पूरा करना, यौन स्वास्थ्य के लिए अधिक परामर्शदाताओं को लेना, ऐसी सेवाएं प्रदान करना, जो युवाओं के लिए अधिक अनुकूल हो और स्पेसिंग मैथड की पर्याप्त आपूर्ति करना.</p> <p> <br /> <span style="color:#800000;">(वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा 27 फरवरी, 2015 को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा, 2014-15 से)</span><br /> &nbsp;</p>

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