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आबादी पर लगाम लगाने में केरल नंबर एक

&bull;&nbsp;भारत में तेजी से बढ़ती आबादी के बीच केरल इस पर अंकुश लगाने में पहले नंबर पर है।<br /><br/> &bull;&nbsp;देश के अन्य राज्यों की तुलना में यहां सबसे कम जनसंख्या वृद्धि दर दर्ज की गई है। राज्य में यह दर शून्य के स्तर पर भी पहुंच सकती है।<br /><br/> &bull;&nbsp;राज्य योजना बोर्ड द्वारा तैयार रिपोर्ट के मुताबिक केरल में जनसंख्या वृद्धि अन्य राज्यों की तुलना में सबसे कम रही। पिछले दस वर्षों (2001-11) में राष्ट्रीय जनसंख्या वृद्धि दर जहां 17.6 फीसद रही, वहीं केरल में यह 4.9 ही रहा।<br /><br/> &bull;&nbsp;रिपोर्ट के अनुसार जनसंख्या में मौजूदा वृद्धि का रुझान दिखाता है कि केरल शून्य या नकारात्मक वृद्धि दर की ओर बढ़ रहा है।<br /><br/> &bull;&nbsp;गौरतलब है कि वर्ष 2001 में राज्य की जनसंख्या 3.18 करोड़ थी जो मार्च, 2011 में 3.34 तक हो गई। इनमें 52 फीसद महिलाएं और 48 प्रतिशत पुरुष हैं। - राज्य की कुल आबादी का 64.1 फीसद हिस्सा कार्यशील (15-59 आयुवर्ग) में और 36 प्रतिशत आश्रित समूह में आते हैं। इसमें 23.3 फीसद किशोर और बच्चे हैं।<br /><br/> &bull;&nbsp;समीक्षा में चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आए हैं। संबंधित अवधि में बच्चों (0-6 वर्ष आयुवर्ग) की वृद्धि दर नकारात्मक रही।<br /><br/> &bull;&nbsp;वर्ष 2001 में इस आयुवर्ग की जनसंख्या 37.93 लाख थी जो 2011 में घटकर 34.72 लाख तक पहुंच गया।<br /><br/> &bull;&nbsp;हालांकि, केरल का जनसंख्या घनत्व राष्ट्रीय स्तर से दोगुने से भी ज्यादा है।<br /><br/>

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