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थाईलैंड में विपल्व: क्या थाईलैंड अराजकता की ओर बढ़ रहा है

भारत के पड़ोसी देश थाईलैंड की राजनीति बड़ी तेजी से बदल रही है और प्राप्त संकेतों से ऐसा लगता है कि वह देश धीरे-धीरे गृहयुद्व की ओर बढ़ रहा है। थाईलैंड के साथ भारत का रिश्ता बहुत पुराना है। मेकांग नदी के तट पर बसे हुए इस समृद्धशाली देश को पहले &#39;सिआम कहते थे। सम्राट अशोक के समय हजारों बौद्ध भिक्षु बर्मा होकर पैदल थाईलैंड गये थे। बौद्ध धर्म का प्रचार करने और फिर वहां से मेकांग नदी पार कर लाओस, कंबोडिया, वियतनाम और दूसरे दक्षिण-पूवी एशियाई देशों में चले गये थे। ये सभी बौद्ध भिक्षु जो हजारों की संख्या में थे कालांतर में इन्हीं देशों में बस गये थे। परन्तु सबसे अधिक बौद्ध भिक्षु थाईलैंड में बसे थे। बौद्ध धर्म अभी भी थाईलैंड का राजकीय धर्म है और उस देश में प्राय: हर घर की बाहरी दीवार पर भगवान बुद्ध की छोटी सी प्रतिमा स्थापित रहती है। थाईलैंड में लाखों भारतीय बसे हुए हैं। कुछ तो वहां व्यापार करते हैं और कुछ नौकरीपेशा लोग हैं। प्रथम विश्वयुद्ध के समय से ही थाईलैंड में बड़ी संख्या में भारतीयों का आना और वहीं बस जाना लगा रहा। अकेले बैंकाक में जो थाईलैंड की राजधानी है, लाखों भारतीय रह रहे हैं। थाईलैंड के व्यापार में भारत मूल के लोगों का बहुत बड़ा योगदान है। जब से भारत ने &#39;लुक ईस्ट&Oacute; विदेश नीति बनाई तब से उसने थाईलैंड को बहुत अधिक महत्व दिया। थाईलैंड को महत्व देने के लिए कुछ अरसे पहले थाईलैंड की प्रधानमंत्री &#39;इंगलक शिनवात्रा&Oacute; को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनाया गया था।<br /> सन् 2014 में एक सैनिक क्रांति में इंगलक को पदच्युत कर दिया गया था। इंगलक थाईलैंड के भूतपूर्व प्रधानमंत्री &#39;थैक्सिन शिनवात्रा&Oacute; की बहन हैं। थाईलैंड की राजनीति में शिनवात्रा का दबदबा वर्षों से रहा है। सन् 2001 में थैक्सिन शिनवात्रा जो टेलीकोम के एशिया के बहुत बड़े उद्योगपति थे, वे देश के प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए थे। सन् 2005 में उनका पुनर्निवाचन हुआ था। थैक्सिन एक धूर्त व्यक्ति थे। उन्होंने अपने अनुभव से पाया कि लोकतांत्रिक तरीके से जीत तभी हो सकती है जब देश की अधिकांश जनता उनके साथ हो। उन्होंने अपने अनुभव से यह भी पाया कि थाईलैंड के उत्तर और पूर्वी भाग में देश की अधिकतर जनसंख्या रहती है। वे कृषि पर आश्रित हैं और अपेक्षाकृत बहुत ही गरीब हैं। यह कृषि पर आधारित जनता अधिकतर चावल की खेती करती है। थैक्सिन ने यह आदेश दिया कि सरकार चावल का उत्पादन करने वाले किसानों से बाजार से कई गुना अधिक मूल्य पर चावल खरीदेगी जिससे इन किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। फिर उन्होंने एक नियम और भी बना दिया कि इन गरीब किसानों का देश के बड़े से बड़े अस्पताल में नि:शुल्क इलाज हो सकेगा। इस तरह देश की अधिकतर जनता जो उत्तर और पूर्व म रहती थी, थैक्सिन के साथ हो गई। थैक्सिन ने उन किसानों के बच्चों को भी पढ़ाई में पूरी मदद देने की कोशिश की।<br /> परन्तु थैक्सिन आकंठ भ्रष्टाचार में लिप्त थे और उन्होंने धीरे-धीरे देश का धन अपनी पत्नी के नाम से सिंगापुर के बैंकों में जमा करना शुरू कर दिया। जब यह भेद थाईलैंड की जनता को पता चला तो थैक्सिन के विरूद्व बगावत सी होने लगी। जगह-जगह थैक्सिन के विरूद्व प्रदर्शन होने लगे। यह देखकर थाईलैंड की सेना ने एक सैनिक क्रांति के द्वारा थैक्सिन को पदच्युत कर दिया और सत्ता अपने हाथ में ले ली। देश में फिर से चुनाव हुआ और थैक्सिन समर्थक &#39;पीपुल्स पावर पार्टी&Oacute; जिसे &#39;पीपीपी&Oacute; भी कहते हैं, चुनाव में जीत गई। यह देखकर सेना आग बबूला हो गई और वह थैक्सिन को भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सजा देना चाहती थी। थैक्सिन कोई बहाना बनाकर देश से भाग निकले। थाईलैंड के सर्वोच्च न्यायालय ने उनके देश से भागने के बावजूद भी उन्हें जेल की कड़ी सजा सुनाई और उनकी पार्टी को चुनाव लडऩे के अयोग्य घोषित कर दिया।<br /> थाईलैंड में फिर से चुनाव हुआ और थैक्सिन की बहन &#39;इंगलक शिनवात्रा को देश का प्रधानमंत्री चुन लिया गया। सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। इसी बीच इंगलक ने संसद से एक कानून पास कराना चाहा जिसमें प्रावधान था कि इंगलक के भाई पूर्व प्रधानमंत्री थैक्सिन की सारी गलतियां माफ की जाती हैं और उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप रद्द किए जाते हैं और उन्हें आदरपूर्वक थाईलैंड आने की अनुमति दी जाती है। जब यह खबर मीडिया में फैली तब लोगों ने इंगलक का घोर विरोध करना शुरू कर दिया। जगह-जगह प्रदर्शन हुए। देश के &#39;कंस्टीट्यूशनल कोर्ट&Oacute; ने इंगलक के चुनाव को रद्द कर दिया और देश की सेना ने एक बार फिर से सैनिक विद्रोह कर दिया। तब से आज तक थाईलैंड में सेना का शासन है।<br /> थैक्सिन परिवार को पूरी तरह राजनीति से अलग करने के लिए गत 23 जनवरी को थाईलैंड की संसद में, जो पूरी तरह सेना की पिट्ठू है, एक प्रस्ताव पास किया जिसमें इंगलक को पिछले दिनों से ही भ्रष्टाचार के आरोप में &#39;महाअभियोग&Oacute; लगाया जिसका अर्थ है कि इंगलक को 10 वर्षों की कठोर कारावास की सजा होगी। जानकार सूत्रों का कहना है कि सेना चाहती है कि इंगलक कोई बहाना बनाकर थाईलैंड से बाहर भाग जाए जिससे थाईलैंड में थैक्सिन परिवार का कोई व्यक्ति कभी दुबारा से सत्ता में नहीं आ सके।<br /> थाईलैंड के राजा भूमिबोल सख्त बीमार हैं और कभी भी उनका देहान्त हो सकता है। उनके एकमात्र वारिस राजकुमार महावजिरालोंगकोर्न का समर्थन सेना को प्राप्त है। सेना जानती है कि राजकुमार जो देश में पूरी तरह अलोकप्रिय हैं, उनका पूरा समर्थन उसे मिलेगा और वे सेना के हाथ में कठपुतली बनकर रहेंगे। सैनिक शासकों ने उत्तर और पूरब के किसानों को थैक्सिन और उनकी बहन इंगलक के द्वारा की गई सारी सुविधाएं समाप्त करने का प्रस्ताव किया है। यह जानकर देश की अधिकांश जनता सेना के खिलाफ हो गई है, सेना के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गये हैं और ऐसा लग रहा है कि वहां कभी भी गृहयुद्ध शुरु हो सकता है। एशिया के सभी देश सांस रोककर प्रतीक्षा कर रहे हैं कि थाईलैंड में राजनीति किस करवट बैठती है। एक बात तो तय लगती है कि थाईलैंड में लोकतंत्र शायद सदा के लिए समाप्त हो जाए।<br />

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