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एक्ट ईस्ट पॉलिसी: भारत - ऑस्ट्रेलिया सम्बन्धो का महत्त्व

&bull;&nbsp; संसार भर के कुल यूरेनियम भंडार का तीसरा हिस्सा ऑस्ट्रेलिया में है. यह देश हर साल 7,000 टन यूरेनियम का निर्यात करता है. लेकिन, 2012 में भारत को किये जानेवाले निर्यात पर रोक लगा दी गयी थी, क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था.<br /><br/> &bull;&nbsp;अमेरिका के साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर करार के बाद भी ऑस्ट्रेलिया अपना फैसला बदलने को तैयार नहीं हुआ था. बाद में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के भारत दौरे के मौके पर दो देशों के बीच यह समझौता संपन्न हो सका I<br /><br/> &bull;&nbsp;यह मुद्दा परमाणविक ईंधन और ऊर्जा सुरक्षा का हैI<br /><br/> &bull;&nbsp;यह स्पष्ट है कि स्थायी सरकार की ताजपोशी के बाद विश्व भर में भारत की छवि में अभूतपूर्व सुधार हुआ है और कई देश हमारे भविष्य के बारे में नये सिरे से सोचने को मजबूर हुए हैं. ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने बेहिचक यह बात स्वीकार की है कि आज भारत असाधारण रूप से गतिशील है और उसके साथ घनिष्ठ संबंध बनाना लाभप्रद है. जो भी देश भारत का बहिष्कार करेगा, यह सरकार निश्चय ही उसको मित्र नहीं समङोगी और अपना बाजार उसके उत्पादों के लिए खुला नहीं छोड़ेगी.<br /> &bull;&nbsp;कुशल कारीगर-पेशेवर आप्रवासियों के बिना ऑस्ट्रेलिया प्रगति नहीं कर सकता. वह हमसे कहीं अधिक खुशहाल है, लेकिन भारतीय पूंजी का तिरस्कार नहीं कर सकता. अदानी ऑस्ट्रेलिया की खदानों को खरीदने के लिए 16 अरब अमेरिकी डॉलर की बोली लगा चुके हैं. फिलवक्त पर्यावरण की रक्षा की मुहिम चलानेवाले इस सौदे पर आपत्ति कर रहे हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री यह स्पष्ट कर चुके हैं कि बहुत जल्दी इस समस्या का समाधान तलाश लिया जायेगा.<br /><br/> &bull;&nbsp;भारत की ही तरह ऑस्ट्रेलिया भी कट्टरपंथी इसलामी दहशतगर्दी का शिकार रहा है. बाली नाइट क्लब धमाके में हताहत होनेवालों में ऑस्ट्रेलियाइ पर्यटक सबसे ज्यादा थे. भारत के साथ इस क्षेत्र में सामरिक सहकार की संभावनाओं ने भी मतैक्य को सहज बनाया लगता है. ऑस्ट्रेलिया की सरकार चाहे किसी दल की हो, अपनी खेतीबारी की उपज, डेरी उद्योग के उत्पादों, मदिरा आदि के निर्यात के लिए भारत जैसा बड़ा बाजार तलाशती रही है.<br /><br/> &bull;&nbsp; क्रिकेट का खेल तो अनोखी दोस्ती की नुमाइश का सिर्फ एक बहाना है! यह भी अनदेखा ना करें कि खुद ऑस्ट्रेलिया भारत में खनिज उत्खनन में दिलचस्पी रखता है. बैलडीला खदान इसी का उदाहरण है. इसके अलावा दक्षिण पूर्व एशिया पर गहराती चीन की दैत्याकार छाया के प्रति भी ऑस्ट्रेलिया आशंकित है. विडंबना है कि आज ऑस्ट्रेलिया यह कह रहा है कि हमने भारत के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर इसलिए किये हैं, क्योंकि हम उसका भरोसा करते हैं. हमें पता है कि ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम का इस्तेमाल हथियारों के लिए नहीं किया जायेगा. अंतरराष्ट्रीय कानून के मामले में भारत का आचरण हमेशा आदर्श रहा है!<br /><br/> &bull;&nbsp;नयी सरकार की विदेश नीति लुक सात पालिसी का ही विस्तार मात्र है जिसे एक्ट ईस्ट पालिसी नाम दिया गया है। इस क्षेत्र में भारत लोकतान्त्रिक देशों के साथ अपने संबंधों की पुनः परिभाषित करते हुए हुए और अधिक गतिशील बनाना चाहता है।<br /><br/>

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