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हिन्द महासागर क्षेत्र में भारत के हित

&bull;&nbsp;दक्षिण अफ्रीका का द्वार&rsquo; कहे जानेवाले सेशेल्स में भारतीय प्रधानमंत्री के बड़े-बड़े बैनर लगे हैं. भारतीय प्रधानमंत्री की 11 मार्च की यात्रा पर सेशेल्स में भारत के उच्चायुक्त संजय पांडा की टिप्प्पणी थी, &lsquo;प्रधानमंत्री की यात्रा संक्षिप्त, किंतु मौलिक है.&rsquo; 115 द्वीपों के इस देश में भारत, सैन्य समुद्री सुरक्षा और अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग करने पर समझौता हुआ है, जिसे लेकर चीन समेत कई पश्चिमी देशों के कान खड़े हैं.<br /><br/> &bull;&nbsp;दिएगोगार्सिया से 600 मील दूर, हिंद महासागर की गोद में बसा यह देश 1976 में ब्रिटेन से आजाद हुआ. सेशेल्स में भारत की दिलचस्पी कई वजहों से है.<br /><br/> &bull;&nbsp;मॉरीशस के बाद सेशेल्स, हिंद महासागर का सबसे बड़ा &lsquo;टैक्स हेवेन&rsquo; है, जो काले धन और हवाला के कारोबार से जुड़ा हुआ है.<br /><br/> &bull;&nbsp;दूसरा, भारत को यदि अपनी समुद्री सीमाएं महफूज रखनी है, तो उसकी शुरुआत सेशेल्स से करनी होगी.<br /><br/> &bull;&nbsp;सेशेल्स दूसरा तटवर्ती देश है, जहां भारत ने जून 1986 में तख्तापलट रोकने में मदद की थी.<br /><br/> &bull;&nbsp;उसके दो साल बाद 1988 में मालदीव में सत्तापलट के प्रयास को भारत सरकार ने विफल किया था. जून 1986 में सेशेल्स के तत्कालीन राष्ट्रपति रेने ने अपने रक्षामंत्री ओग्ल्विी बलरुइस की साजिशों को विफल करने के लिए नयी दिल्ली से मदद मांगी थी. तब राजीव गांधी ने तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल आरएच़ तहलियानी को इस ऑपरेशन की जिम्मेवारी दी थी, जिसका कोड नाम था &lsquo;फ्लॉवर्स आर ब्लूमिंग&rsquo;.<br /><br/> &bull;&nbsp;हिंद महासागर में भारतीय नौसेना का यह पहला अभियान था, जिसमें नेवल शिप &lsquo;आइएनएस विंध्यागिरी&rsquo; को डायरेक्टर नेवल इंटेलीजेंस और डायरेक्टर नेवल ऑपरेशंस की निगरानी में पूरा किया गया था.<br /><br/> &bull;&nbsp;राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते, जिस सागर कूटनीति (मेरीटाइम डिप्लोमेसी) की शुरुआत हुई थी, उसे 2003 में अटल जी के समय &lsquo;सागर माला&rsquo; के नाम से गति देने की चेष्टा हुई. लेकिन शशक रफ्तार वाली समुद्री सुरक्षा कूटनीति कब शुतुरमुर्ग के सिर की तरह बालू में घुस गयी, पता ही नहीं चला. इस बीच सेशेल्स, जिबोटी, सूडान, मेडागास्कर, मोंबासा, बुरकिना फासो और मॉरीशस अंतरराष्ट्रीय खुफियागीरी के केंद्र बनते चले गये.<br /><br/> &bull;&nbsp;दिसंबर 2011 में सेशेल्स में अमेरिका का एक ड्रोन विमान एमक्यू-9 दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसके बाद पता चला कि 2009 से ही अमेरिका ने सेशेल्स में अपना नौसैनिक अड्डा बना रखा है. अस्सी के दशक में अमेरिका, सेशेल्स के अलडाब्रा आइलैंड पर अपना अड्डा बना चुका था, ताकि उसके बी-52 युद्धक विमान &lsquo;हार्न ऑफ अफ्रीका को लक्ष्य कर उड़ानें भर सकें. सेशेल्स के माहे द्वीप से भी अमेरिका सोवियत गतिविधियों पर निगरानी रखता था.<br /><br/> &bull;&nbsp;अमेरिका के बाद चीन की सर्वाधिक दिलचस्पी सेशेल्स में रही है. 2007 में राष्ट्रपति हू जिंताओ की यात्रा के बाद चीन सेशेल्स में दो वाइ-12 विमान, निगरानी के वास्ते तैनात कर चुका है. सेशेल्स के सैकड़ों सैनिकों को चीन ने प्रशिक्षित किये हैं. सवाल है कि क्या सेशेल्स में अमेरिका, चीन को &lsquo;काउंटर&rsquo; करने के वास्ते भारत की मजबूत उपस्थिति चाहता है? कारण जो हो, पर यह अच्छी बात है कि 2003 में अटल जी ने समुद्री सुरक्षा के लिए &lsquo;सागर माला&rsquo; का जो ख्वाब देखा था, लंबे अंतराल के बाद उसे पूरा करने के लिए मोदी जी निकल पड़े हैं. हिंद महासागर के जिस क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी &lsquo;सागर माला अभियान&rsquo; पर निकले हैं, वहां दूसरे कारणों से भी भारत को अपने प्रभामंडल का विस्तार जरूरी है.<br /><br/> &bull;&nbsp;मात्र नब्बे हजार की आबादी वाला सेशेल्स अफ्रीका का सबसे अमीर देश है. यहां प्रति व्यक्ति सालाना आय पच्चीस हजार डॉलर से अधिक है. न तो इस देश में खनिज है, न उद्योग.<br /><br/> &bull;&nbsp;पर्यटन से अधिक, यहां पैसे की खेती होती है. काले पैसे जमा करनेवालों के लिए सेशेल्स एक &lsquo;टैक्स हेवेन&rsquo; है. स्वयं राष्ट्रपति जेम्स अलेक्स माइकल्स की ब्रिटिश वजिर्न आइलैंड में &lsquo;सोलेइल ओवरसीज होल्डिंग लिमिटेड&rsquo; नामक कंपनी में करोड़ों डॉलर के शेयर हैं. 2004 से माइकल्स सेशेल्स के शासन प्रमुख हैं.<br /><br/> &bull;&nbsp;सेशेल्स के राष्ट्रपति माइकल्स मोदी से भी मजबूत स्थिति में हैं. वहां की संसद &lsquo;नेशनल असेंबली&rsquo; की 32 में से 31 सीटों पर राष्ट्रपति माइकल्स के सांसद जीत कर आये हैं. ऐसे मजबूत राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री मोदी यह उम्मीद करें कि सेशेल्स में काले धन जमा करने और हवाला के कारोबार में सक्रिय भारतीयों का पता मिल जायेगा, तो इसे हम भ्रम की स्थिति ही कहेंगे.<br/><br/> <br/> <br /> <strong><span style="color:#800000;">भारत-मॉरीशस के बीच कूटनीतिक संबंध:</span></strong><br /> &bull;&nbsp;1948 से भारत-मॉरीशस के बीच कूटनीतिक संबंध हैं. मॉरीशस, भारत के लिए प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश का बहुत बड़ा स्नेत है.<br /><br/> &bull;&nbsp;मारीशस कालेधन, हवाला और अपतटीय (ऑफ शोर) बैंकिंग का ऐसा मार्ग है, जहां से अरबों डॉलर भारत में खपते रहे हैं.<br /><br/> &bull;&nbsp;2011 में 55.2 अरब डॉलर का निवेश मॉरीशस ने भारत में किया था. दिसंबर 2014 में खबर आयी कि भारत पहली बार मॉरीशस के कोस्ट गार्ड के लिए दो गश्ती नौकाएं तैयार कर रहा है. ऐसे ही दो ओपीवी (ऑफ शोर पेट्रोल व्हीकल) गोवा के शिपयार्ड में श्रीलंका के लिए भी निर्मित किये जा रहे हैं.<br /><br/> &bull;&nbsp;इंडियन ऑयल&rsquo;, मारीशस में अपने ऑपरेशन को काफी आगे बढ़ा चुका है. ऐसी शुरुआत की सराहना की जानी चाहिए.<br /><br/> &bull;&nbsp;श्रीलंका में चीन इस समय बैकफुट पर है. यह अच्छा मौका है, जब अमेरिका समेत पश्चिमी ताकतें वहां पर भारत को मजबूत स्थिति में देखना चाहती हैं. लेकिन उससे पहले मछुआरों को लेकर जो बाधा पैदा हुई है, उसका रास्ता निकालना जरूरी है.<br /><br/>

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