Current Details

इंटरनेशनल एक्सपोर्ट कंट्रोल रिजिम

&bull;&nbsp;अपने परमाणु ऊर्जा स्त्रोत का शांति से इस्तेमाल करने का भारत की बेदाग छवि के कारण, अमेरिका भारत को परमाणु हथियार और मिसाइल तकनीक रखने वाले देशों के बेहद &quot;एक्सक्लूसिव&quot; कल्ब में शामिल करने को तैयार हो गया है।<br /><br/> &bull;&nbsp;भारत वर्ष 2001 से ही बड़े देशों से हर मंच पर &quot;इंटरनेशनल एक्सपोर्ट कंट्रोल रिजिम&quot; (आइईसीआर-अंतरराष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था) के तहत आने वाले चार समझौतों में शामिल होने की मांग करता रहा है।<br /><br/> &bull;&nbsp;इस समूह में शामिल होने से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आण्विक व मिसाइल तकनीक में सहयोग करना आसान तो हो जाएगा लेकिन साथ ही उसके इससे संबंधित सारे कार्यक्रम पहले से भी ज्यादा पारदर्शी भी हो जाएंगे।<br /><br/> &bull;&nbsp;जानकारों का भी मानना है कि विकसित देशों के इस बेहद एक्सक्लूसिव क्लब में शामिल होना भारत की एक कूटनीतिक जीत है।<br /><br/> &raquo;&nbsp;आइईसीआर के तहत चार तरह के अंतरराष्ट्रीय समझौते आते हैं।<br /><br/> &raquo;&nbsp;वासेनार एग्र्रीमेंट:- इनमें पहला है वासेनार एग्र्रीमेंट जो पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण और इससे जुड़ी तकनीक व कारोबार पर निगरानी व सहयोग से जुड़ी हुई है।<br /><br/> &raquo;&nbsp;दूसरा है न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) जो यह परमाणु ऊर्जा व हथियार से जुड़ी तकनीक पर नियंत्रण के लिए है।<br /><br/> &raquo;&nbsp;तीसरे रिजिम को आस्ट्रेलिया समूह (एजी) के नाम से जाना जाता है और यह रसायनिक व जैविक हथियारों पर नियंत्रण के लिए बनाई गई है।<br /><br/> &raquo;&nbsp;चौथा व अंतिम है मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजिम (एमटीसीआर)। यह व्यवस्था मिसाइल तकनीक व बेहद खतरनाक हथियारों के नियंत्रण से जुड़ा हुआ है।<br /><br/> &bull;&nbsp; इन सभी चारों व्यवस्थाओं से जुड़े देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियम तैयार करते हैं लेकिन उनका पालन हर देश को करना पड़ता है।<br /><br/> &bull;&nbsp;भारत अभी तक इस व्यवस्था से बाहर है। जाहिर है कि जब भारत इसमें शामिल होगा तो उसकी बात भी अंतरराष्ट्रीय नियम बनाने में सुनी जाएगी। साथ ही एक संयमित व उत्तरदायी परमाणु शक्ति संपन्न देश के तौर पर भारत की छवि मजबूत होगी।<br /><br/>

Back to Top