Current Details

हिन्द महासागर में भारत: चीन से मुकाबले को भारत की कूटनीति

&bull;&nbsp; रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र हिन्द महासागर में अपनी स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेशेल्स, मॉरीशस और श्रीलंका की यात्रा की। हिन्द महासागर में बसे राष्ट्र द्वीप देखने में भले ही छोटे हों परन्तु संसार के मानचित्र में उनकी उपस्थिति सामरिक दृष्टिकोण से अत्यन्त महत्वपूर्ण है।<br /><br/> &bull;&nbsp;दुर्लभ खनिजों और तेल का अकूत भंडार अपने गर्भ में छिपाए बैठा हिन्द महासागर व्यापारिक यातायात का अत्यन्त महत्वपूर्ण माध्यम है। इसीलिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि इस सामुद्रिक मार्ग से जलयानों का आवागमन सुरक्षित और बिना रोक-टोक के हो।<br/><br/> &bull;&nbsp;हिन्द महासागर में इस अत्यन्त संवेदनशील सामरिक महत्व वाले देश को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की यात्रा की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति जेम्स एलिक्स माइकल की मौजूदगी में चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स को विश्वसनीय मित्र और रणनीतिक भागीदार बताया। वहीं सेशेल्स ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है।<br /><br/> &bull;&nbsp; दोनों देशों के मध्य जो चार समझौते हुए, उनमें पहला जल क्षेत्र मापन में भारत सेशेल्स की मदद करेगा। इसमें समुद्री संपदा की मैपिंग में सहयोग भी शामिल है। इसे हिन्द महासागर में भारत की सामरिक मौजूदगी को और अधिक पुख्ता करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दूसरा समझौता अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र का है। तीसरा समझौता ढांचागत सुविधाओं के विकास का है। चौथा समझौता अन्य देशों को बेचे जाने के लिए संयुक्त रूप से नौवहन चार्ट का विकास एवं इलेक्ट्रॉनिक नौसंचालन संबंधी चार्ट तैयार किए जाने की सहमति का है।<br/><br/> &bull;&nbsp; प्रधानमंत्री सुरक्षा के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग को मजबूत करने के लिए तटवर्ती क्षेत्र निगरानी राडार (सीएसआर) परियोजना का उद्घाटन किया। पहला सीएसआर सेशेल्स की राजधानी द्वीप पर स्थित होगा। इससे तटवर्ती क्षेत्रों तथा विशेष आर्थिक क्षेत्र की निगरानी रखने तथा समुद्री डाकुओं को रोकने में मदद मिलेगी।<br/><br/> &bull;&nbsp;मॉरीशस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिन्द महासागर में शान्ति, स्थिरता व समृद्धि लाना यहां के लोगों की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने समुद्री विवादों के शान्तिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के सम्मान की जोरदार वकालत की। दक्षिण चीन सागर में चीन के रुख को देखते हुए ये बातें पड़ोसी देश को एक संदेश के रूप में देखी गईं। इस यात्रा में मॉरीशस के साथ समुद्री अर्थव्यवस्था सहित पांच समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत निर्मित एक नौसैनिक तटीय गश्ती पोत बाराकुड़ा का जलावतरण करके मॉरीशस के राष्ट्रीय रक्षा बल में शामिल किया। इसकी मदद से मॉरीशस को अपने व्यापक एक्सक्लूसिव इकॉनामी जोन की निगरानी में मदद मिलेगी। भारत और मॉरीशस दोहरा कराधान बचाव संधि (डीटीएटी ) के दुरुपयोग को रोकने के लिए मिलकर काम करने को सहमत हो गए हैं।<br/><br/> &bull;&nbsp;अन्तिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी श्रीलंका पहुंचे और सामुद्रिक अर्थव्यवस्था पर ज्वाइंट फोर्स बनाने पर सहमति कायम की। 28 वर्षों के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। मोदी के इस दौरे को हिन्द महासागर में चीन के खिलाफ भारत की सामरिक हित साधने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।<br /><br/> &bull;&nbsp; प्रधानमंत्री की यह यात्रा इन चुनौतियों के मद्देनजर थी कि पाकिस्तान ने ग्वादर बन्दरगाह का संचालन चीन के हाथों में सौंप दिया है और चीन ने इस पर अपना नियन्त्रण हासिल कर लिया है। इससे अरब सागर में चीन के जहाजों की आवाजाही व चीनी दखल बढ़ जाएगा और अफगानिस्तान व मध्य एशिया के सभी देशों से व्यापार सम्भव हो जाएगा जो भारत की सुरक्षा के लिए गम्भीर खतरा बन सकता है। चीन ने म्यांमार के द्वीपों पर नौसैनिक सुविधाएं बढ़ा रखी हैं, जिससे हिन्द महासागर में भारतीय नौसेना की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। म्यांमार के क्याकप्यू में भी चीन बन्दरगाह बना रहा है और थिलावा बन्दरगाह पर भी चीन का आवागमन है।<br/><br/> &bull;&nbsp;सैन्य सहयोग सुरक्षित रखने के लिए मालदीव साथ चीन के बेहतर सम्बन्ध बन चुके हैं। मालदीव ने चीन को मराओ द्वीप लीज पर दे रखा है। चीन इसका उपयोग निगरानी अड्डे के रूप में कर रहा है। चीन बांग्लादेश के चटगांव बन्दरगाह का विस्तार कर रहा है। चीन श्रीलंका के हम्बन टोटा में बन्दरगाह बना रहा है। चटगांव व हम्बन टोटा भारत के समुद्री तटों के अति निकट पड़ते हैं। चीन जिबूती, ओमान व यमन जैसे देशों के बन्दरगाहों का इस्तेमाल अपने लिए करने हेतु ताकत बढ़ा चुका है। चीन सेशेल्स द्वीप पर सैन्य अड्डा खोल चुका है । यह स्थिति भारत के लिए खतरे का संकेत है।<br /><br/> &bull;&nbsp;इस प्रकार भारत हिन्द महासागर में चीन के बढ़ते सामरिक दबाव को कम करने की तैयारी कर रहा है I<br/>

Back to Top