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मैरीटाइम सिल्क रोड" (एमएसआर): सिल्क रोड प्रोजेक्ट में कोलकाता भी शामिल

&bull;&nbsp;चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 40 अरब डॉलर की महात्वाकांक्षी आधारभूत परियोजना &quot;मैरीटाइम सिल्क रोड&quot; (एमएसआर) पर अमल का ब्लूप्रिंट पेश किया।<br /><br/> &bull;&nbsp; इस परियोजना से चीन मध्य एशिया के रास्ते यूरोप से जुड़ेगा। कोलकाता एकमात्र भारतीय बंदरगाह है जिसे इस अंतिम ब्लूप्रिंट में जगह मिली है। चीन में चल रहे बोआओ फोरम में इसे सार्वजनिक किया गया।<br /><br/> &bull;&nbsp;एमएसआर दो हजार साल पुराने समुद्री रेशम मार्ग से प्रेरित है। यह हिंद महासागर स्थित श्रीलंका में कोलंबो बंदरगाह से जुड़ा हुआ है।<br /><br/> &bull;&nbsp;जबकि बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार कॉरीडोर (बीसीआईएम) और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर जाने वाला पाकिस्तान-चीन कॉरीडोर भी इसका हिस्सा हैं।<br /><br/> &bull;&nbsp;भारत बीसीआईएम में हिस्सा ले रहा है, लेकिन एमएसआर को लेकर चुप है। इससे उसे हिंद महासागर में चीन का प्रभाव बढ़ने की आशंका है।<br /><br/> &bull;&nbsp;चीन ने कहा है कि दक्षिण एशिया में सहयोग के संबंध में उसकी भारत के साथ बातचीत जारी है। &quot;बेल्ट और रोड&quot; पहल के तौर पर जानी जा रही सिल्क रोड परियोजना एशिया, यूरोप और अफ्रीका से गुजरेगी। इसमें आर्थिक विकास के लिए भरपूर संभावनाएं होंगी। परियोजना से चीन के पोर्ट वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया, भारत, श्रीलंका, यूनान और केन्या के बंदरगाहों से जुड़ जाएंगे।<br /><br/> &bull;&nbsp;ब्लूप्रिंट में कहा गया है कि इस पहल में हिस्सा लेने वाले देशों को अपने यहां का बुनियादी ढांचा सुधारना होगा। साथ ही जल, थल व वायु मार्ग के नेटवर्क को सुरक्षित और कारगर बनाना होगा। आर्थिक संबंधों को बनाए रखने के साथ आपसी विश्वास में गहराई लानी होगी<br /><br/>

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