Current Details

लघु पनबिजली परियोजनाएं: पर्यावरणीय हितैषी ऊर्जा का दोहन

&bull;&nbsp; बिजली पैदा करने के लिए पनबिजली ऊर्जा के सबसे बड़े अक्षय स्रोतो में से एक है। भारत में लघु पनबिजली (एसएचपी) को 25 मेगावाट तक मानकीकृत किया गया है। <br/>&bull;&nbsp; भारत में लगभग 15 हजार मेगावाट की अनुमानित लघु पनबिजली क्षमता है जिसमें से मात्र 20 प्रतिशत का दोहन किया गया है। अत: हमारी बढ़ती हुई मांगों को पूरा करने के लिए निकट भविष्य में इसका अत्यधिक उपयोग किया जा सकता है।<br/>&bull;&nbsp;पनबिजली एक ऊँचाई से गिरने वाले पानी से प्राप्त की जाती है। ऊर्जा को जनरेटर के साथ टर्बाइन का प्रयोग करके विद्युत में बदला जाता है। किसी स्थान की पनबिजली क्षमता पानी के छोड़े जाने और उसके मुहाने पर निर्भर करती है। ये परियोजनाएं नदियों, नहरों और बांधों पर लगाई जा सकती हैं। इन्हें इस प्रकार वर्गीकृत किया गया है &ndash; सूक्ष्म पन (100 किलोवाट तक), मिनी पन (101 से 2000 किलोवाट या 2 मेगावाट) और लघु पन (2 मेगावाट से 25 मेगावाट तक)।<br/>&bull;&nbsp;लघु पनबिजली (एसएचपी) किफायती है और इसके साथ-साथ अन्य उद्देश्यों जैसे पीने, सिंचाई आदि के लिए पानी के उपयोग के साथ संगत है। यह विकेन्द्रिकृत रूप में विद्युत भी उपलब्ध करा सकता है। इसकी स्थापना और उत्पादन स्वरूप को आवश्यकतानुसार बदला जा सकता है।&nbsp;<br/>&bull;&nbsp;इस प्रकार का बिजली उत्पादन पर्यावरणीय रूप में हितैषी है, क्योंकि इसमें वनों का कटाव कम से कम अथवा नगण्य होता है और इस प्रकार इसका जीव&ndash;जंतुओं, वनों और जैव विविधता पर अत्यधिक कम प्रभाव पड़ता है। एसएचपी के लिए स्वदेशी मानक प्रौद्योगिकियां उपलब्ध हैं और इस प्रकार किसी स्थान विशेष की स्थितियों में ढालने की मामूली आवश्यकता पड़ती है।<br/>&bull;&nbsp;पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में विशेष प्रोत्साहन कार्यक्रम तैयार किया गया है।<br/>&bull;&nbsp;ये पन चक्कियां देश के उत्तरी भाग में घरट के नाम से भी जानी जाती है। ये परम्परागत रूप में यांत्रिकी ऊर्जा के लिए प्रयोग में लाई जाती है। अकेले हिमालय क्षेत्र में लगभग एक लाख पन चक्कियां हैं और इनका अनाज पीसने और तेल निकालने जैसे यांत्रिकी प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यांत्रिकृत प्रयोग और बिजली पैदा करने के लिए पन चक्कियों की रूपांतरण क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है और इसलिए संवर्धित पन चक्कियां विकसित की गई हैं।

Back to Top