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वनों की अंधाधुंध कटाई से बढ़ेगी मानसून की रुसवाई

<span style="color:#800000;">&quot;वनों की अंधाधुंध कटाई से बढ़ेगी मानसून की रुसवाई&quot; ( दक्षिण एशियाई मानसून हवा आधारित मौसम का सालाना स्वरूप है जो कि भारत की 85 फीसदी बारिश का कारण है। यह मानसूनी बारिश यहां की कृषि के लिए बेहद संवेदनशील है।)</span><br/>&bull;&nbsp;पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि वनों की अत्यधिक कटाई की वजह से हमारा देश मानसून से वंचित हो सकता है। उनका दावा है कि इससे मानसून का रुख दक्षिणी हो सकता है और बारिश में एक इकाई के पांचवे हिस्से के बराबर कटौती हो सकती है।<br/>&bull;&nbsp;अब तक वनों की कटाई को, तापमान में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। लेकिन एक नए शोध में बताया गया है कि इससे मानसून की बारिश पर व्यापक असर की संभावना बन जाती है।<br/>&bull;&nbsp;वातावरण में कार्बन डाय ऑक्साइड घुलने के साथ्ा ही वनों की कटाई से धरती की सतह पर पड़ने वाली प्रकाश की किरणों और पौधों के वाष्पीकरण से वातावरण में आने वाली नमी में भी बदलाव आता है।<br/>&bull;&nbsp;बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में वातावरण के संचार, वाष्पीकरण और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया का अनुकरण करते हुए एक मॉडल का उपयोग किया गया, जिसमें समुद्र सतह की गर्मी और बर्फ का पिघलना भी दर्शाया गया।<br/>&bull;&nbsp;लेखकों ने अपने वक्तव्य में कहा कि &#39;हम बड़े पैमाने पर होने वाले वनों के कटाव से विभिन्न स्थानों पर मानसून की बारिश पर होने वाले प्रभावों पर एक आधारभूत बात समझना चाहते थे।&#39;<br/>&bull;&nbsp;उन्होंने वनों की कटाई के तीन प्रायोगिक उदाहरणों का प्रदर्शन किया।&nbsp;<br/>&bull;&nbsp;इसमें उष्णकटिबंधीय, नरम, उच्च अक्षांश वाले क्षेत्रों से वृक्षों को हटाया ताकि वे इनके नष्ट होने के प्रभावों को सीधे तौर पर देख सकें।<br/>&bull;&nbsp;नरम और उच्च अक्षांश वाले क्षेत्रों में वनों के कटाव से वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव आया जिसके परिणामस्वरूप मानसून की बारिश का रूख दक्षिण की ओर हो गया।<br/>&bull;&nbsp;यह पूर्वी एशिया, उत्तरी अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका, दक्षिणी एशिया और उत्तरी गोलार्द्ध के मानसून के क्षेत्रों में एक महत्वपूर्ण व तेजी से होने वाली गिरावट का रूप लेगा और दक्षिणी गोलार्द्ध के मानसून क्षेत्रों जैसे दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और आस्ट्रेलिया में बारिश में मध्यम वृद्धि करेगा।<br/>&bull;&nbsp;नेशनल अकेडमी ऑफ साइंस की कार्यवाही में प्रकाशित पत्र में वैज्ञानिकों ने लिखा कि भारत में 18 प्रतिशत वर्षा में गिरावट के साथ दक्षिण एशिया का मानसून क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हो सकता है।&nbsp;<br/>&bull;&nbsp;लेखकों ने कहा कि वातावरण के मूल्यांकन, पौधारोपण के लाभ, सपाट खेती की भूमि या वनों के कटाव वाले क्षेत्रों में बारिश जैसे दूरस्थ प्रभावों को शामिल किया जाना चाहिए।<br/>&bull;&nbsp;इस अध्ययन में यह बात भी संज्ञान में ली गई कि फसलों और चराई के लिए प्रयुक्त भूमि में वैश्विक रूप में वृद्धि हुई है।<br/>&bull;&nbsp;यह वृद्धि विश्व की भूमि की सतह की एक तिहाई, या विश्व भूमि की सतह की सात प्रतिशत या 1700 में से 620 लाख हेक्टेयर के रूप में बढ़ी है।<br/> <span style="color:#696969;">Note:- दक्षिण एशियाई मानसून हवा आधारित मौसम का सालाना स्वरूप है जो कि भारत की 85 फीसदी बारिश का कारण है। यह मानसूनी बारिश यहां की कृषि के लिए बेहद संवेदनशील है।</span>

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