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दक्षिण चीन सागर- कहां है यह सागर और क्या है विवादों की जड़। साथ में साउथ चाइना सी पर भारत-चीन विवाद

<strong><span style="color:#800000;">भौगोलिक स्थिति:-</span></strong><br/> &bull;&nbsp;यह प्रशांत महासागर का एक हिस्सा है। यह समुद्री इलाका सिंगापुर और मलक्का जलडमरूमध्य से लेकर ताइवान जलडमरूमध्य तक 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है।<br/> &bull;&nbsp;चीन के दक्षिण से ताइवान द्वीप तक और मलयेशिया के उत्तर पश्चिम से ब्रुनेई तक, इंडोनेशिया के उत्तर में, मलयेशिया और सिंगापुर के उत्तर-पूर्व में और वियतनाम के पूर्व में स्थित है यह समुद्री इलाका है।<br/> <strong><span style="color:#800000;">आर्थिक महत्व :-</span></strong><br/> &bull;&nbsp;दुनिया के एक तिहाई व्यापारिक जहाज इस समुद्री इलाके से गुजरते हैं। भारत का 55 प्रतिशत समुद्री व्यापार इसी सागर के जरिए होता है।&nbsp;<br/> &bull;&nbsp;माना जाता है कि साउथ चाइना सी यानी दक्षिण चीन सागर की तलहटी में तेल और गैस का विशाल भंडार है।<br/> <strong><span style="color:#800000;">विवाद की वजहें :-</span></strong><br/> 1. साउथ चाइना सी में कई छोटे - बडे़े द्वीप हैं , जिन पर अधिकार को लेकर इलाके के देशों में विवाद चल रहा है।<br/> 2. इस समुद्री इलाके में दो बड़े द्वीपसमूह स्प्रातली और पारासेल को लेकर चीन और अन्य देशों के बीच विवाद तनाव का एक बड़ा मसला है।<br/> 3. पारासेल द्वीपसमूह पर 1974 तक चीन और वियतनाम का कब्जा था। 1974 में दक्षिण वियतनाम और चीन के बीच झड़प के बाद वियतनाम के 14 सैनिक मारे गए और चीन ने इस पूरे द्वीपसमूह पर अपना कब्जा जमा लिया।<br/> 4. इस समुद्री इलाके में पड़ने वाले सैकड़ों द्वीपों को लेकर तटीय देशों के बीच लंबे अर्से से विवाद चल रहा है।<br/> 5. स्प्रातली द्वीप समूह के द्वीपों को लेकर चीन , वियतनाम , मलयेशिया , फिलीपींस और ब्रुनेई के बीच विवाद चल रहा है।<br/> <strong><span style="color:#800000;">विवाद सुलझाने के लिए सहमति&nbsp;</span></strong> <br/> &bull;&nbsp;2002 में दक्षिण चीन सागर के द्वीपों को लेकर विभिन्न तटीय देशों के बीच विवाद को सुलझाने के लिए हुए एक समझौते में सभी संबद्ध पक्षों ने आपसी विवादों के बेहतर प्रबंध के लिए एक आचार संहिता तैयार की थी।&nbsp;<br/> <br/> &bull;&nbsp;यह समझौता आसियान और चीन के बीच हुआ था , जिसका हवाला देकर भारत ने चीन से कहा है कि इस समझौते के तहत विवादों को आपसी बातचीत से सुलझाए।<br/> <span style="color:#008000;">Note:- भारत और चीन के बीच टकराव के मोर्चे खुलते जा रहे हैं। सीमा विवाद तो था ही, अब वे साउथ चाइना सी में भी तेल की खोज को लेकर आपस में उलझ गए हैं। चीन का कहना है कि पुराने समय से ही उसका इस समुद्री इलाके पर कब्जा रहा है। ऐसे में भारत को यहां आने की जरूरत नहीं है। इस पर भारत ने नाराजगी जताई है।</span> <br/> &bull;&nbsp;भारत दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्र नौपरिवहन चाहता हैI भारत के अनुसार इस क्षेत्र को लेकर किसी भी विवाद का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक किया जाना चाहिए।&nbsp;<br/> &bull;&nbsp;भारत दक्षिण चीन सागर में खनिज संसाधनों की स्वतंत्र खोज का पक्षधर है।<br/> &bull;&nbsp; जल क्षेत्र से जुड़े विवादों का क्षेत्र की सुरक्षा और आपसी विश्वास पर प्रायः प्रतिकूल असर पड़ता है। भारत इस क्षेत्र में किसी तरह के बल प्रयोग या किसी को डराने-धमकाने के किसी प्रयास का विरोध करता है। क्षेत्र से जुड़े सभी विवादों का हल अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्री कानूनों पर 1982 के संयुक्त राष्ट्र समझौते के तहत किया जाना चाहिए।<br/> <img alt="" src="http://www.nirmanias.com/images/mapmain.jpg" style="width: 279px; height: 472px; float: left;" /></div> <div> &nbsp;</div>

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