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केन बेतवा रिवर लिंक के साथ साथ दोनों नदियों के बारे में सब कुछ जानने योग्य बातें !!

<p> <strong><span style="color:#800000;">&quot;केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना&quot;</span></strong><br /> &bull;&nbsp;बुंदेलखंड के लिए लाइफ लाइन मानी जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना को आगे बढ़ाने की सरकारी कवायद तेज हो रही है।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;मध्य प्रदेश सरकार ने केन नदी से उत्तर प्रदेश को मिलने वाले पानी का हिसाब मांगा है। रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि बेतवा में आने वाले पानी से उत्तर प्रदेश के कितने क्षेत्रफल की सिंचाई होगी और कितना पानी पीने के लिए उपयोग किया जाएगा। राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण ने इसका आकलन लगभग तैयार कर लिया है।<br /> &bull;&nbsp;केन-बेतवा को जोड़ने के लिए लगभग 10 साल पहले बनाई गई परियोजना को पंख लग गए हैं। चूंकि परियोजना का विस्तार मध्य प्रदेश के छतरपुर व पन्ना क्षेत्र में होना है, इसलिए मध्य प्रदेश प्रशासन परियोजना को लेकर अधिक गंभीरता दिखा रहा है।<br /> &bull;&nbsp; प्रथम चरण में छतरपुर के लगभग 100 साल पुराने गंगऊ डैम से ढाई किलोमीटर ऊपर 77 मीटर ऊंचा नया दोधन डैम बनाया जाएगा।<br /> &bull;&nbsp;यहां से 221 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जाएगी, जिससे केन का पानी बरुआसागर तालाब में डाला जाएगा। टर्मिनल जलाशय के रूप में बरुआसागर तालाब का उपयोग किया जाएगा, जहां से बेतवा नदी में पानी पहुंचाया जाएगा।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;दोधन डैम से छतरपुर व पन्ना रिजर्व का काफी हिस्सा प्रभावित होगा।<br /> &bull;&nbsp;प्रारंभिक सर्वे के अनुसार इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए मध्य प्रदेश का लगभग 9000 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित होगा।<br /> &bull;&nbsp;डूब क्षेत्र में 1585 काश्तकार परिवार आएंगे, जिनके 7,224 लोगों को अपना आशियाना छोड़ना पड़ेगा।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;वहीं पन्ना टाइगर रिजर्व की भी 414 हेक्टेयर जमीन डूब क्षेत्र में आ जाएगी। परियोजना को आकार देने के लिए वन विभाग की अनापत्ति लेना आवश्यक है और इसके लिए दोनों प्रदेशों को होने वाले लाभ की रिपोर्ट भी स्पष्ट होनी चाहिए।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;इसे देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण से उत्तर प्रदेश क्षेत्र को मिलने वाले पानी के उपयोग की रिपोर्ट मांगी है।<br /> <strong><span style="color:#800000;">परियोजना की खास बातें:-</span></strong><br /> &bull;&nbsp;केन नदी पर एक बांध और उससे जुड़ी 221 किमी लंबी लिंक नहर बनाई जाएगी।<br /> &bull;&nbsp;सालाना 6.35 लाख हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होगी और 13.42 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा।<br /> &bull;&nbsp;इससे मप्र और उप्र में 78 मेगावॉट पन बिजली भी बनेगी।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;रियोजना के दो चरण होंगे। पहले चरण में मप्र व उप्र दोनों को लाभ होगा, जबकि दूसरे चरण में सिर्फ मप्र को।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;जल संसाधन मंत्रालय दोनों चरणों का काम एक साथ शुरू कराना चाहता है।<br /> <strong><span style="color:#800000;">250 किमी लंबी है केन</span></strong><br /> &bull;&nbsp;केन नदी जबलपुर से प्रारंभ होती है। पन्ना में इसमें कई धाराएं आकर जुड़ती हैं और फिर उप्र के बांदा में इसका यमुना से संगम होता है।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;यह 250 किमी क्षेत्र में बहती है। मंदाकिनी तथा केन यमुना की अंतिम उपनदियां हैं क्योंकि इसके बाद यमुना गंगा से जा मिलती है।<br /> <strong><span style="color:#800000;">480 किमी लंबी है बेतवा</span></strong><br /> &bull;&nbsp;बेतवा रायसेन से निकलकर उत्तर-पूर्वी दिशा में बहती हुई भोपाल, विदिशा, झांसी आदि के 480 किमी लंबे क्षेत्र में बहती है।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;यह उप्र के हमीरपुर के निकट यमुना में मिल जाती है।<br /> <strong><span style="color:#800000;">16 परियोजनाओं में से एक</span></strong><br /> &bull;&nbsp; केन-बेतवा लिंक परियोजना नदी जोड़ो अभियान की 16 परियोजनाओं में से एक है। इसकी संभाव्यता रिपोर्ट नेशनल वाटर डेवलपमेंट एजेंसी ने तैयार की है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) दो चरणों में 2011 और 2014 में तैयार की गई। उल्लेखनीय है कि सरकार ने आंध्रप्रदेश की पोलावरम बहुद्देश्यीय परियोजना के लिए स्पेशल परपज व्हीकल तैयार किया है।</p>

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