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गिनी गुणांक

<strong><span style="color:#800000;">गिनी गुणांक (GINI Coefficient): समाज में व्याप्त आय एवं सम्पत्ति के असमान वितरण की माप &#39;सांख्यिकी&#39; (statistical) आधार पर करना गिनी गुणांक कहलाता है।&nbsp;</span></strong><br/><br/> &bull;&nbsp;यदि गिनी गुणांक मान &#39;शून्य&#39; है, तो समाज के सभी व्यक्तियों की आय समान मानी जाएगी। इसके विपरीत गिनी गुणांक का मान १ है तो इसका अर्थ है की समाज के कुछ वर्ग विशेष के पास देश की समस्त आय केंद्रित है।&nbsp;<br/><br/> &bull;&nbsp;दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि गिनी गुणांक का मान जितना ज्यादा एक के करीब होगा समाज में आर्थिक असमानता उतनी अधिक होगी। और इसके विपरीत गिनी गुणांक का मान जितना कम ( शून्य के करीब) होगा समाज में आर्थिक असमानता उतनी ही कम होगी अर्थात व्यक्तियों की आय में समानता होगी।<br/><br/> &bull;&nbsp;सापेक्ष असमानता को गिनी गुणांक के आधार पर मापा जाता है। यह गुणांक इतालवी वैज्ञानिक गिनी ने दिया था।<br/><br/> &bull;&nbsp;भारत में असमानता को गिनी गुणांक में मापा जाता है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 2004-05 के 0.26 से बढ़कर 2013-14 में 0.30 हो गया और शहरी क्षेत्रों के लिए यह आंकड़ा इसी अवधि में 0.35 से बढ़कर 0.39 तक पहुंच गया। गुणांक का दायरा शून्य से एक तक होता है, शून्य का मतलब है पूरी तरह समानता और एक का मतलब पूरी तरह असमानता है। इस प्रकार जितना ज्यादा गुुणांक है, उतनी ही ज्यादा असमानता होगी और देश के 29 राज्यों में से 20 में यही देखने को मिला है।<br/><br/> &bull;&nbsp;यदि गिनी गुणांक बढ़ रहा है, तो देश में गरीबी दर का घटना संदिग्ध हो जाता है। सूचकांक से स्पष्ट संकेत है कि अमीर ज्यादा अमीर हो रहे हैं, वहीं गरीब ज्यादा गरीब हो रहे हैं।<br/><br/> &bull;&nbsp;असमानता का यह स्तर कम से कम सात राज्यों कर्नाटक (0.43), उत्तर प्रदेश (0.41), केरल (0.41), छत्तीसगढ़ (0.39), हरियाणा (0.39), पश्चिम बंगाल (0.38) और दिल्ली (0.37) में शहरी इलाकों के राष्ट्रीय स्तर के सूचकांक से काफी ज्यादा है।<br/><br/> &bull;&nbsp;29 में से 14 राज्य ऐसे हैं जहां शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में असमानता बढ़ी है, जिनमें वे चार राज्य दिल्ली, मिजोरम, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं।

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