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केरोसिन सब्सिडी भी सीधे जनता के बैंक खाते में केरोसिन सब्सिडी में लीकेज ज्यादा

&bull;&nbsp;अब लगभग यह तय हो गया है कि अगले कुछ महीनों के भीतर केरोसिन सब्सिडी भी सीधे जनता के बैंक खाते में ही पहुंचनी शुरू हो जाएगी।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;सरकार को पता तो पहले से था कि केंद्र की तरफ से दी जाने वाली सब्सिडी का बड़ा हिस्सा बिचौलिये खा जाते हैं, लेकिन अब नए आंकड़ो से इसकी ठोस पुष्टि हो गई है।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp;यह साफ हुआ है कि केरोसिन सब्सिडी की चोरी सरकार की उम्मीदों से भी ज्यादा हो रही है।<br /> &bull;&nbsp;मोटे तौर पर केंद्र की तरफ से दी जाने वाली सब्सिडी का 41 फीसद हिस्सा जनता को नहीं मिलता।<br/> &bull;&nbsp;तेरह राज्य तो ऐसे हैं, जहां 50 से 80 फीसद तक केरोसिन सब्सिडी सही हाथ में नहीं पहुंच पा रही है। गुजरात, हरियाणा, पंजाब जैसे अमीर राज्यों में केरोसिन की चोरी ज्यादा हो रही है।<br/> &bull;&nbsp;केरोसिन खपत व इसके गलत हाथों में जाने का एक नया आकलन पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से किया गया है। इसके मुताबिक वर्ष 2013-14 में कुल 30,574 करोड़ रुपये की केरोसिन सब्सिडी सरकार ने दी थी। चालू वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान भी इसके 28,382 करोड़ रुपये रहने के आसार हैं। लेकिन जिस राशन की दुकानों के जरिये केरोसिन राज्यों को जा रहा है वहां से यह गरीबों के पास न जाकर बिचौलियों व मिलावट करने वालों के पास जा रहा है।&nbsp;<br /> &bull;&nbsp; पिछले वित्त वर्ष के दौरान उत्तर प्रदेश को जितना केरोसिन आवंटित हुआ उसका 44 फीसद मिलावट करने वालों या कालाबाजारी करने वालों के हाथ में जाने का अंदेशा है।<br/> &bull;&nbsp;बिहार के लिए आवंटित केरोसिन की 34 फीसद, मध्य प्रदेश की 46 फीसद, हरियाणा की 59, पंजाब की 51 और हिमाचल प्रदेश की 54 फीसद सब्सिडी सही हाथों में नहीं गई।<br/> &bull;&nbsp;गुजरात में तो 53, असम में 54, सिक्किम में 80, जम्मू-कश्मीर मे 37 और अरुणाचल प्रदेश में 76 फीसद केरोसिन की कालाबाजारी हुई है या फिर इसे गलत हाथों में दिया गया है।<br/> &bull;&nbsp;सभी राज्यों में केरोसिन के सही हाथों में नहीं जाने का मूल्यांकन करने पर 10,044 करोड़ रुपये की सब्सिडी राशि का नुकसान सरकार को उठाना पड़ा है। सरकार का मानना है कि पिछले कई दशकों से केरोसिन सब्सिडी की यही स्थिति है।<br/> &bull;&nbsp;इस रिपोर्ट के मुताबिक राशन दुकानों के जरिये 90 लाख किलोलीटर केरोसिन की बिक्री की जाती है। अगर राष्ट्रीय स्तर पर औसतन 41 फीसद बर्बादी को आधार बनाया जाए तो 37 लाख किलोलीटर केरोसिन की आपूर्ति अभी खत्म कर देनी चाहिए। पूर्व की संप्रग सरकार ने केरोसिन सब्सिडी पर लगाम लगाने के लिए कदम तो उठाए, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं होने की वजह से इसे परवान नहीं चढ़ा पाई।<br/> &bull;&nbsp;13 राज्यों में 50 फीसद से ज्यादा सब्सिडी होती है बर्बाद<br/> &bull;&nbsp;हर वर्ष जाया होती है 10 हजार करोड़ की केरोसिन सब्सिडी<br/> &bull;&nbsp;आगे से सीधे बैंक खाते में जाएगी इसके लिए सब्सिडी

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