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केंद्र की 246 में से 148 परियोजनाएं चल रही समय से पीछे

&bull;&nbsp;देश में सत्ता परिवर्तन हो गया, मगर देरी से चलने वाली औद्योगिक परियोजनाओं की रफ्तार में कोई बदलाव नहीं आया। ऐसा लगता है कि सरकार की तरफ से बाधित परियोजनाओं की अड़चनें दूर करने की कोशिशों का असर अभी दिखना शुरू नहीं हुआ है।<br/><br/> &bull;&nbsp;केंद्र के ताजा आंकड़े बताते हैं कि उसकी 246 परियोजनाओं में से 148 समय से पीछे चल रही हैं। इनमें से अधिकांश ऐसी हैं, जिनके कामकाज पर नई नीतियों का असर नहीं हुआ है।&nbsp;<br/<br/> &bull;&nbsp;नकी रफ्तार धीमी होने से 8.8 लाख करोड़ की राशि भी फंसी है।<br/><br/> <span style="color:#800000;">***अधिकांश प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण संबंधी दिक्कतों से अटके हैं**</span></div> <br/><br/> &bull;&nbsp;देश में ढांचागत क्षेत्र की स्थिति सुधारने और तेजी से फैसले लेने को लेकर सरकार के तमाम दावों को कुछ तथ्य झुठलाते हैं।<br/><br/> &bull;&nbsp;हाल ही में वित्त मंत्रालय की तरफ से तैयार कुछ प्रपत्रों में स्थगित परियोजनाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई गई है।<br/><br/> &bull;&nbsp;जहा तक बाधित परियोजनाओं में प्रगति का सवाल है तो उनमें अब भी बहुत सारी अड़चनें हैं। <br/><br/> &bull;&nbsp;सड़क क्षेत्र को छोड़ दिया जाए तो पिछले एक वर्ष में अन्य किसी भी क्षेत्र से जुड़ी परियोजना को अनुमति मिलने को लेकर स्थिति में खास बदलाव नहीं आया है।&nbsp;<br/><br/> &bull;&nbsp;सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 246 परियोजनाओं में 124 समय से पीछे चल रही हैं। इनमें से 24 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनकी स्थिति पिछले एक वर्ष के मुकाबले खराब हुई है। <br/><br/> &bull;&nbsp;दिसंबर, 2014 तक लंबित इन प्रोजेक्टों में 8.8 लाख करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। पिछले दिनों पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2014-15 में भी बाधित परियोजनाओं के हालात पर चिंता जताते हुए कहा गया था कि शीर्ष 100 परियोजनाओं में कुल फंसी हुई राशि का 83 फीसद हिस्सा लगा हुआ है।<br/><br/> &bull;&nbsp;इन परियोजनाओं में बहुत सारी मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र से जुड़ी हैं। इनके बाधित होने से न सिर्फ इन्हें कर्ज देने वाले बैंको को हानि हो रही है, बल्कि हजारों नए रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं।&nbsp;<br/><br/> &bull;&nbsp;आर्थिक संस्थान सीएमआइई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 90 फीसद से ज्यादा परियोजनाओं के अटके होने की बड़ी वजह भूमि अधिग्रहण की राह में आने वाली बाधाएं हैं। इनमें बिजली व आवास क्षेत्र की अधिकांश परियोजनाएं हैं।

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