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ये सीआरआर क्या बला है? और इसके घट बढ़ से मंहगाई पर क्या असर पड़ता है।

<p> &bull;&nbsp;अब क्या है कि भारत मे जितने भी बैंक है वो रिजर्व बैंक के अधीन काम करते है। एक तरह से रिजर्व बैक इन सभी की अघोषित गारंटी लेता है।&nbsp;<br /> <br /> &bull;&nbsp;अब रिजर्व बैंक किसी भी बैंक की गारंटी कितनी लेता है यह निर्भर करता है कि उस बैंक ने रिजर्व बैंक के पास कितना पैसा/प्रतिभूतिया/स्वर्ण जमा कर रखा है।<br /> <br /> &bull;&nbsp;अमूमन हर बैंक को रिजर्व बैंक की सीआरआर नीति के अनुसार ही पैसा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। रिजर्व बैंक का काम यह सुनिश्चित करना होता है कि बाजार मे मुद्रा(रुपए) की जरुरत के मुताबिक ही तरलता(उपलब्धता) रहे, इसको कम या ज्यादा करने के लिए रिजर्व बैंक अपनी CRR के प्रतिशत मे घट-बढ करता रहता है।<br /> <br /> <strong>असर</strong> &bull;&nbsp;इसका मतलब यह हुआ कि यदि रिजर्व बैंक ने अपनी CRR मे आधे प्रतिशत की बढोत्तरी कर दी, तो सभी बैंको को अपनी सीमा से आधा प्रतिशत और पैसा रिजर्व बैंक के पास जमा कराना पड़ेगा, नतीजतन बैंक के पास फंड कम हो जाएंगे, जब फंड कम पडेंगे तो मजबूरन वे अपनी उधारी देने की ब्याज दरें बढाएंगे, ताकि ऋण की मांग मे कमी आए।<br /> <br /> &bull;&nbsp;ब्याज दरें बढेंगी तो लोग उधार कम लेंगे। उधार कम लेंगे तो चीजों की मांग मे कमी आएगी।<br /> <br /> &bull;&nbsp;मांग मे कमी आएगी तो महंगाई मे कमी आएगी। देखने मे तो ये एक लम्बा प्रोसेस दिखता है, लेकिन अक्सर कारगर होता है। इस तरह से सरकार के लिए महंगाई घटाने का यह एक उपाय है।</p>

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