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शारदा चिट फण्ड घोटाला क्या है ? कैसे होता है चिट फण्ड घोटाला ? आइये जानते हैं किस तरह से चिट फण्ड कम्

<p> <strong>जानें कैसे होता है चिटफंड का घोटाला</strong><br /> &bull;&nbsp;ओडिसा, बंगाल, असम और त्रिपुरा के पूर्वी गलियारे में पिछले एक दशक में दर्जनों की संख्या में कुकुरमुत्ते की तरह चिट फण्ड कम्पनिया बनी और कमजोर/गरीब लोगों का पैसा डकार गए.<br /> <br /> &bull;&nbsp;यह इलाका आर्थिक और वित्तीय रूप से काफी पिछड़ा रहा है, जहां लोगों के पास निवेश के लिए साफ-सुथरे विकल्प कम मौजूद रहे हैं. जाहिर है, घोटाले के लिए इससे अच्छी जमीन नहीं मिल सकती थी.<br /> <br /> &bull;&nbsp;सीबीआइ और प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि पिछले आठ साल के दौरान बंगाल में शारदा समेत कुल 194 संदिग्ध कंपनियों ने करोड़ों लोगों का 60,000 करोड़ रु. डकार लिया है. इस घोटाले का बुलबुला पिछले ही साल फूटा है.<br /> <br /> <strong>कैसे होता है चिटफंड का घोटाला:</strong><br /> &bull;&nbsp;पश्चिम बंगाल, ओडिसा, असम और त्रिपुरा में ऐसी 194 कंपनियों की जांच चल रही है जिन पर आरोप है कि उन्होंने ऊंचे सब्जबाग दिखाकर लोगों का पैसा ठग लिया.&nbsp;<br /> <br /> <strong><span style="color:#006400;">जानें किस तरह चूना लगाती हैं ये कंपनियां</span></strong></p> <br /> <div style="margin-left: 40px;"> <strong><span style="color:#006400;">चरण 1:</span></strong> कंपनी &#39;क&#39; पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में अपनी शाखाएं खोलती है.</div> <div style="margin-left: 40px;"> <strong><span style="color:#006400;">चरण 2:</span></strong> जनता से पैसा इकट्ठा किया जाता है. निवेशकों को निवेश के बदले या तो जमीन या छुट्टियों में यात्रा का वादा किया जाता है.</div> <div style="margin-left: 40px;"> <strong><span style="color:#006400;">चरण 3: </span></strong>ग्राहकों या जमाकर्ताओं को परिपक्वता अवधि पूरी होने पर ब्याज सहित पैसा वापस लेने का भी विकल्प दिया जाता है.</div> <div style="margin-left: 40px;"> <strong><span style="color:#006400;">चरण 4:</span></strong> जमाकर्ता को और लुभाने के लिए कहा जाता है कि वो नया सदस्य लाए और उसके बदले में कमीशन ले. कंपनी एजेंटों का नेटवर्क तैयार करने के लिए पिरामिड की तरह काम करती है.</div> <div style="margin-left: 40px;"> <strong><span style="color:#006400;">चरण 5:</span></strong> आरंभिक निवेशकों को परिपक्वता राशि या भुगतान नए निवेशकों के पैसे से किया जाता है.</div> <div style="margin-left: 40px;"> <span style="color:#006400;"><strong>चरण 6:</strong></span> विभिन्न स्कीमों के तहत पैसे जुटाने के लिए कंपनी &#39;ए&#39; जमापत्र पर शब्दों से खिलवाड़ करती है ताकि सेबी और आरबीआइ जैसे नियामकों से बच सके.</div> <div style="margin-left: 40px;"> <strong><span style="color:#008000;">चरण 7: </span></strong>जैसे ही पुराने निवेशकों की संख्या नए निवेशकों से ज्यादा हो जाती है, नकद प्रवाह में असंतुलन पैदा हो जाता है. या तो कंपनी &#39;क&#39; पैसा लेकर गायब हो जाती है, या प्रवर्तक हार मान लेते हैं या फिर स्कीम अपने ही वजन से बैठ जाती है.</div> <div> &nbsp;</div> <div> <strong>कहां लगाया जाता है पैसा</strong></div> <div> - निर्माण और रियल एस्टेट,खेल और सामुदायिक आयोजन, अखबार और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया</div> <div> अभिनेताओं और हस्तियों के साथ अनुबंध, होटल, मनोरंजन और पर्यटन,स्वास्थ्य सेवाएं,माइक्रो फाइनेंस I</div> <div> &nbsp;</div> <div> <strong>ये मुद्रा की उपलब्धता का क्या मतलब हुआ? </strong><br /> <br /> &bull;&nbsp;अब जैसा कि आपको पता है बाजार मे मुद्रा का आवागमन उसकी मांग और आपूर्ति पर निर्भर करता है।&nbsp;<br /> <br /> &bull;&nbsp;अब जो वित्तीय संस्थान (जैसे बैंक) होते है उनका काम ही होता है लोगो से जमा राशिया लेना और उसे दूसरे जरुरतमंद लोगो को देना। और इन कार्यों से लाभ कमाना।<br /> <br /> &bull;&nbsp;उदाहरण के लिए यदि किसी बैंक के पास ढेर सारी जमाराशि है, तो वह चाहेगा कि इस जमा राशि को बाजार मे ऋण देकर और उस पर अधिक से अधिक ब्याज कमाए।&nbsp;<br /> <br /> &bull;&nbsp;अब जितना ज्यादा पैसा बाजार मे आएगा उतना ही महंगाई बढेगी (वैसे ये हमेशा जरुरी नही), उदाहरण के लिए यदि एक फ़्लैट आपको २० लाख का मिल रहा है, और उसके लिए आपको 85% ऋण भी सस्ती ब्याजदरों पर मिल रहा है तो आप उसे लेना पसंद करेंगे, हो सकता है, अगले साल लेने का प्लान हो, लेकिन इसी साल लेना पसंद करेंगे।&nbsp;<br /> <br /> &bull;&nbsp; बैंको की ब्याज दरें भी मुद्रा की तरलता पर निर्भर करती है I</div>

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