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मनरेगा और मनरेगा से जुडी समस्याएं

यह देखना जरूरी है कि आजादी के बाद भारत में चलाए गए सबसे महत्वाकांक्षी सामाजिक कार्यक्रमों में से एक मनरेगा अपने लक्ष्यों को अर्जित कर सका या नहीं। तकनीकी रूप से बात करें तो वर्ष 2008 में तीसरे चरण के रोल ऑउट के बाद मनरेगा को भारत के सभी जिलों में मांग के आधार पर देश के सभी (ग्रामीण एवं शहरी) परिवारों को कम से कम सौ दिनों का रोजगार मुहैया कराना था। जाहिर है, इतने बड़े मकसद को अर्जित करने में कुछ बेहद जटिल समस्याएं पेश आना थीं। <br/><br/> सबसे पहली दिक्कत तो हर परिवार को सौ दिनों का रोजगार मुहैया कराने का वादा करने में ही आई। राष्ट्रीय औसत के अनुसार सरकार केवल 46 दिनों का रोजगार ही मुहैया करा सकी। जाहिर है, ग्रामीण गरीबी के उन्मूलन के लिए इन 46 दिनों से होने वाली आमदनी बेहद नाकाफी थी।&nbsp;<br/><br/> दूसरी दिक्कत मांग के आधार पर रोजगार मुहैया कराने को लेकर आई, क्योंकि व्यावहारिक रूप से यह मुमकिन नहीं था। देश में खेती-किसानी आज भी मानसून का जुआ है और देश में मानसून की चाल का सटीक पूर्वानुमान लगा पाना बेहद मुश्किल है। कहीं बाढ़ के हालात निर्मित हो जाते हैं, कहीं सूखा पड़ जाता है तो कभी बेमौसम बारिश होने लगती है। ऐसे में यह स्थिति निर्मित हो जाती है कि ग्रामीण गरीबों को जब आय की सख्त जरूरत होती है, तब उनके पास कोई रोजगार नहीं होता। वहीं मनरेगा की रोजगार निर्माण की प्रकृति लंबी है और इसके चलते वह अनियमित नतीजे ही प्रदान कर पाती है।&nbsp;<br/><br/> तीसरी जिस समस्या का सामना सरकार को करना पड़ा, वह यह थी कि वह अधिकार-केंद्रित रवैये के बजाय वितरण-केंद्रित रवैये के आधार पर ही काम कर सकी, जिससे ग्रामीणों के सशक्तीकरण का मनरेगा का बुनियादी मकसद पूरा न हो सका।<br/><br/> मूल समस्याएं मनरेगा की मूल परिकल्पना में ही निहित हैं। मसलन, मनरेगा आमदनी की गारंटी देने वाली योजना है या फिर रोजगार की गारंटी देने वाली योजना। वास्तव में मनरेगा मजदूरी की घोषित दरों पर रोजगार की गारंटी देने वाली ही योजना है, वह &#39;न्यूनतम मजदूरी भुगतान&quot; जैसी कोई योजना नहीं है। यही कारण है कि भले ही संदर्भ दर एक पूरे दिन के काम के लिए राज्य द्वारा घोषित न्यूनतम दर हो, यदि कोई व्यक्ति अपेक्षा से कम काम करता है तो वह आंशिक भुगतान का ही हकदार होगा। कार्य की प्रकृति के आधार पर हर राज्य द्वारा कार्य के परिमाण की गणना अलग-अलग की गई है।

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