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मुद्रा बैंक के बारे में संक्षेप में बताते हुए इसके कार्यों और घटकों पर प्रकाश डालिये।

&bull;&nbsp;बेहद छोटे और अकेले दम रोजगार कर रहे लोगों के कारोबार को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सरकार मुद्रा बैंक को लांच करेगी।<br/><br/> &bull;&nbsp;शुरुआत में मुद्रा बैंक सिडबी की सहायक कंपनी के तौर पर काम करेगा। लेकिन आगे चलकर कानून के जरिये इसे मुद्रा बैंक के तौर पर स्थापित कर किया जाएगा।<br/><br/> &bull;&nbsp;मुद्रा बैंक यानी माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट रिफाइनेंस एजेंसी बुनियादी तौर पर छोटी इकाइयों को वित्त उपलब्ध कराने की नीति बनाएगी और छोटी इकाइयों को कर्ज देने के लिए फंड उपलब्ध कराएगी। मुद्रा बैंक इसके लिए दो प्रकार के सहयोगियों के साथ गठबंधन करेगा। एक जिन्हें मुद्रा बैंक रिफाइनेंस करेगा और दूसरे जो जरूरतमंद छोटे उद्यमियों को कर्ज देंगे।<br/><br/> &bull;&nbsp;साथ ही प्राइमरी सहकारी संस्थाएं, सेल्फ हेल्प समूह भी कर्ज वितरण के सहयोगी हो सकते हैं। लेकिन इनके लिए योजना बनाने का काम मुद्रा बैंक का होगा।<br/><br/> &bull;&nbsp;अगले वित्त वर्ष के बजट में घोषित इस बैंक के बुनियादी ढांचे का खाका वित्त मंत्रालय ने तैयार कर लिया है। छोटी इकाइयों को सस्ते कर्ज के तौर पर वित्त उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सरकार इसके कोष के लिए तीन हजार करोड़ रुपये देगी।<br/><br/> &bull;&nbsp;इसके दायरे में अकेले छोटी- छोटी इकाइयों के तौर पर व्यवसाय कर रहे मैकेनिक, नाई, सब्जी-फल विक्रेता जैसे लोग आएंगे। सरकार की योजना ऐसे लोगों को अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में शामिल कर इनके कारोबार को बढ़ाने में मदद देने की है।<br/><br/> &bull;&nbsp;राष्ट्रीय नमूना सर्वे के मुताबिक देश में ऐसे करीब 5.70 करोड़ उद्यमी है। इनमें 11 लाख करोड़ रुपये की पूंजी लगी हुई है। इनसे 12 करोड़ लोगों को रोजगार मिल रहा है। लेकिन इस क्षेत्र के उद्यमियों की पूंजी में कर्ज का हिस्सा केवल चार फीसद है।<br/><br/> &bull;&nbsp;जबकि बीते 22 वर्षों में बड़े उद्योगों में 50-60 लाख करोड़ रुपये की पूंजी लगी है। इनसे मात्र 22 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ है।&nbsp;<br/><br/> &bull;&nbsp;इस लिहाज से सरकार इन छोटे उद्यमियों की मददकर न केवल इनके जीवन स्तर में बदलाव लाना चाहती है, बल्कि देश में रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि के रूप में देख रही है।<br/><br/> &bull;&nbsp;रिफाइनेंस के लिए क्षेत्रीय स्तर पर सहयोगी ढूंढे जाएंगे। निचले स्तर तक कर्ज वितरित करने के लिए माइक्रो संस्थाएं इसका हिस्सा बनेंगी। रिजर्व बैंक द्वारा प्रस्तावित लघु बैंक, एनबीएफसी, लघु वित्तीय संस्थाएं (जिनकी संख्या 52 है) भी इसका हिस्सा हो सकते हैं।&nbsp;

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