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भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2013

<p> &raquo;&nbsp;बढ़ती हुई जनसंख्या की वन एवं वृक्ष आधारित आवश्यकताओं की पूर्ति, धरती को बाढ़, सूखा एवं भू-क्षरण से बचाने तथा प्राण वायु ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित कर मानव जाति के अस्तित्व की रक्षा हेतु वनों के महत्त्व को नकारा नहीं जा सकता है।&nbsp;<br /> <br /> &raquo;&nbsp; ब्रिटिश काल के दौरान डॉ. वोल्कर की अनुशंसा पर वर्ष 1894 में भारत की पहली राष्ट्रीय वन नीति प्रकाशित की गई। इस नीति की कमियों को दूर करने हेतु वर्ष 1952 में स्वतंत्र भारत की पहली राष्ट्रीय वन नीति तैयार की गई।<br /> <br /> <span style="color:#ff0000;">इस नीति में वन संसाधनों के संरक्षण एवं विकास पर बल देते हुए देश के एक-तिहाई भू-भाग को वनाच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया था। तत्पश्चात भारत के वन संरक्षण अधिनियम, 1980 तथा राष्ट्रीय वन नीति, 1988 में वन संसाधनों के संरक्षण एवं वनीकरण हेतु स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं, परंतु भारतीय वन क्षेत्र पर अत्यधिक दबाव बना हुआ है। अतः वन क्षेत्र में वृद्धि एवं कमी के आंकड़ों की जानकारी न केवल सरकार के लिए वरन नागरिक समाज के लिए भी आवश्यक हो जाती है।</span><br /> <br /> &raquo;&nbsp; इसी संदर्भ में देश के वनावरण एवं वृक्षावरण की निगरानी अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाती है तथा इसी परिप्रेक्ष्य में देहरादून स्थित &lsquo;भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग&rsquo; (Department of Forest Survey of India) द्वारा प्रत्येक दो वर्ष पर सुदूर संवेदन (Remote Sensing) आधारित उपग्रह चित्रण के माध्यम से देश में वनों एवं वृक्षों की स्थिति पर आधारित &lsquo;भारत वन स्थिति रिपोर्ट&rsquo; जारी की जाती है।<br /> <br /> &raquo;&nbsp; पहली भारत वन स्थिति रिपोर्ट-1987 (संदर्भ वर्ष 1981-83) में तैयार की गई थी। इस शृंखला की 13वीं भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2013 (ISFR- 2013) 8 जुलाई, 2014 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावड़ेकर द्वारा जारी की गई जो कि अक्टूबर, 2010 से जनवरी, 2012 के उपग्रह आंकड़ों पर आधारित है।&nbsp;<br /> <br /> &raquo;&nbsp;भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2013 में भारतीय सुदूर संवेदन उपग्रह रिसोर्ससेट-I के सेंसर IRS-P6-LISS-III द्वारा 23.5 मी. के विभेदीकरण (Resolution) तथा 1:50,000 के मापक (न्यूनतम मानचित्रण योग्य क्षेत्र-1 हेक्टेयर) पर आधारित आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। ज्ञातव्य है कि भारतीय परिस्थितियों के संदर्भ में अक्टूबर-दिसंबर का समय वनावरण मानचित्रण संबंधी उपग्रह आंकड़ों को प्राप्त करने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त (मेघ-मुक्त आकाशीय स्थिति के कारण) रहता है।<br /> <br /> &raquo;&nbsp; ISFR-2013 में भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग द्वारा हाल के समय में कराए गए विशिष्ट अध्ययनों के आधार पर भारतीय वन की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं, शस्यवानिकी में वृक्ष, नगरीय वृक्ष संसाधन एवं भारत के संघीय क्षेत्र एवं राज्यों में वन एवं वृक्ष संसाधन पर अतिरिक्त सामग्री भी प्रस्तुत की गई है।<br /> ISFR-2013 के महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष<br /> <br /> <span style="color:#800000;">उपग्रहीय आंकड़ों (अक्टूबर, 2010- जनवरी, 2012) के विश्लेषण वन/टीओएफ (TOF-Tree Outside Forests) गणना तथा भारतीय वन सर्वेक्षण विभाग द्वारा कराए गए ISFR-2013 के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं-</span><br /> <br /> (i) ISFR-2013 के अनुसार, देश में कुल वनावरण 69.79 मिलियन हेक्टेयर (697898 वर्ग किमी.) है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 21.23 प्रतिशत है।<br /> <br /> (ii) इस रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल वनावरण एवं वृक्षावरण (Forest and Tree Cover) 78.92 मिलियन हेक्टेयर (789164 वर्ग किमी.) है जो कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24.01 प्रतिशत है।<br br="" /> वृक्ष रेखा (Tree Line &ndash; 4000 मीटर ऊंचाई स्तर, जिससे ऊपर के क्षेत्र शीत मरुस्थल की भांति होते हैं तथा जो किसी भी प्रकार के वृक्ष की वृद्धि के लिए अनुपयुक्त हैं) से ऊपर के क्षेत्रों (182183 वर्ग किमी.) को हटाने पर यह बढ़कर 25.42 प्रतिशत हो जाता है।<br /> <br /> उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय वन नीति, 1988 के अनुसार देश के एक-तिहाई अथवा 33.33 प्रतिशत क्षेत्र में (पहाड़ी क्षेत्रों में दो-तिहाई अथवा 66.67 प्रतिशत क्षेत्र में) वन अथवा वृक्षावरण होने आवश्यक हैं।<br /> <br /> ISFR-2011 की तुलना में ISFR-2013 में 5871 वर्ग किमी. के वन क्षेत्र की वृद्धि हुई है।<br /> <br /> (iii) ISFR-2013 के अनुसार, देश में कुल वृक्षावरण (Tree Cover) 9.13 मिलियन हेक्टेयर (91266 वर्ग किमी.) है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 2.78 प्रतिशत है।<br /> <br /> <span style="color:#696969;">(नोट : वनावरण का आकलन उपग्रहीय आंकड़ों के आधार पर सतत मानचित्रण के द्वारा किया जाता है जबकि वृक्षावरण के आकलन के लिए प्रतिदर्श प्रणाली अपनाई जाती है।)</span><br /> <br /> (iv) ISFR-2011 की तुलना में ISFR-2013 में पहाड़ी एवं जनजातीय जिलों में वनावरण में क्रमशः 40 वर्ग किमी. एवं 2396 वर्ग किमी. की वृद्धि दर्ज की गई है।<br /> <br /> (v) उत्तर-पूर्वी राज्यों में, जो देश के कुल वनावरण में लगभग एक-चौथाई का योगदान करते हैं, विगत आकलन की तुलना में 627 वर्ग किमी. के वनावरण की कमी दर्ज की गई।<br /> <br /> (vi) इस रिपोर्ट में पहली बार वन आच्छादित सूचना को &lsquo;सर्वे ऑफ इंडिया टोपोशीट्स&rsquo; (Survey of India Toposheets) के &lsquo;ग्रीन वाश एरिया&rsquo; (Green Wash Area) के आधार पर संबद्ध (Inside) एवं बाह्य (Outside) क्षेत्रों में पृथक किया गया है।<br /> <br /> सर्वे ऑफ इंडिया टोपोग्राफिक शीट्स पर कुछ क्षेत्रों को हल्के हरे रंग से प्रदर्शित किया गया है तथा इन्हें सामान्यतः &lsquo;ग्रीन वाश एरिया&rsquo; के रूप में निर्दिष्ट किया जाता है।<br /> <br /> (vii) ISFR-2011 की तुलना में ISFR-2013 में देश में मैंग्रोव आवरण (Mangrove Cover) में 34 वर्ग किमी. की कमी हुई।<br /> <br /> (viii) भारतीय वनों के बाहर वृक्षों (TOF-Trees Outside Forests) का वृद्धिमान स्टॉक (Growing Stock) 5658.046 मिलियन घनमीटर आकलित किया गया है।<br /> <br /> (ix) ISFR 2013 में 15 राज्य/संघीय क्षेत्र में उनके भौगोलिक क्षेत्र का 33 प्रतिशत से अधिक भाग वनाच्छादित है जबकि इनमें से 8 राज्य एवं संघशासित क्षेत्र ऐसे हैं जिनके भौगोलिक क्षेत्र का 75 प्रतिशत से अधिक भू-भाग वनाच्छादित है।</p> <div> <img alt="" src="http://www.nirmanias.com/images/vanyalast.jpg" style="width: 322px; height: 472px; float: left;" /></div> <div> &nbsp;</div>

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