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भारत के युवा प्रेरक के रूप में स्वामी विवेकानंद की प्रासंगिकता

<p> भारत विश्व -में सबसे ज्यादा युवाओं का देश है जिसकी लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या की आयु 35 वर्ष से कम है। उम्मीद की जाती है कि वर्ष 2020 तक भारत की आबादी की औसत आयु 28 वर्ष होगी जबकि अमेरिका की 35, चीन की 42 और जापान की औसत आयु 48 वर्ष होगी। वास्तव में युवा किसी भी देश की जनसंख्या में सबसे गतिशील और जीवंत हिस्सा होते हैं।</p> <p> <br /> एक बार स्वामी विवेकानंद ने कहा था, &quot;आप जैसा सोचते हैं, आप वैसे ही बनेंगे। अगर आप खुद को कमजोर सोचते हैं तो आप कमजोर बनेंगे; यदि आप खुद को शक्तिशाली सोचते हैं तो आप शक्तिशाली होंगे।&quot;</p> <p> &nbsp;</p> <p> उन्होंने यह भी कहा था, &quot;शिखर पर नजर रखो, शिखर पर लक्ष्य करो और आप शिखर पर पहुंच जाएंगे&quot;</p> <p> <br /> उनका संदेश सामान्य लेकिन कारगर था। विवेकानंद ने अपने विचारों को लोगों खासकर युवाओं तक सीधे पहुंचाया। उन्होंने धर्म और जाति के बंधनों को तोड़ते हुए विश्व बंधुत्व का संदेश दिया। उन्होंने जो कुछ कहा उसमें उनके विचारों की महानता समाहित है और आज भी वह देश के युवाओं के लिए आदर्श हैं। उन्होंने युवाओं की उन्नत ऊर्जा और सत्य की खोज के लिए उनकी बेचैनी को साकार किया। इस महान देशभक्त और भारत के सपूत के शाश्वत संदेश को जागृत करने के लिए स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रुप में मनाना पूरी तरह से उचित है।</p> <p> <br /> लेकिन मौजूदा बदलाव के दौर में युवाओं को स्वामी विवेकानंद की प्रासंगिकता का अहसास कैसे कराया जाए, जबकि एक तरफ लोग और राष्ट्र युवाओं को राष्ट्र निर्माण के कामों में लगाकर युवाओं के व्यक्तित्व और नेतृत्व कौशल को विकसित करने का महान काम कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ भूख, गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसी चुनौतियां हैं।</p> <p> <br /> स्वामी विवेकानंद ने भारतीय समाज के पुनर्निमाण के लिए जो सुझाव दिए हैं उनमें शिक्षा लोगों को सश्क्त करने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने एक बार कहा था, &quot;ऐसी शिक्षा जो साधारण लोगों को जीवन के संघर्ष के योग्य नहीं बनाती है, जो चरित्र निर्माण की शक्ति, परोपकार की भावना और शेर की तरह साहस का विकास नहीं करती है वह केवल नाम के लिए है। वास्तव में शिक्षा वह है जो किसी को आत्मनर्भर बनाती है।&quot; उनके लिए शिक्षा का मतलब ऐसे चिरकालिक अध्ययन से था जिससे छात्रों का चरित्र और मानवीय भावनाओं का निर्माण होता है।</p> <p> <br /> भारत सरकार ने स्वामी विवेकानंद की 150वीं जयन्ती मनाते समय रामकृष्ण मिशन की मूल्य&ndash;आधारित शिक्षा परियोजना को मंजूरी दी, ताकि बच्चों में नैतिकता प्रत्यारोपित होने के साथ&ndash;साथ हमारे समाज में बढ़ते वाणिज्यवाद और उपभोक्तावाद के विरूद्ध एक मूल्य प्रणाली विकसित करने में मदद मिले। रामकृष्ण मिशन स्वामी विवेकानन्द द्वारा स्थापित एक संगठन है, जो मूल्य-आधारित शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, युवा और जनजातीय कल्याण तथा राहत और पुनर्वास के क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है ।</p> <p> <br /> स्वामी विवेकानंद पीठ स्थापित करने के लिए इसने शिकागो विश्वविद्यालय को 15 लाख अमरीकी डालर की धनराशि भी उपलब्ध कराई, ताकि व्याख्यानों, विचारगोष्ठियों और भारतीय संस्कृति तथा भारतीय अध्ययनों पर आधारित शैक्षिक गतिविधियों के अनुकूल गतिविधियों द्वारा विवेकानंद के विचारों पर जोर दिया जा सके। प्रत्येक विद्वान द्वारा दो वर्षों की अवधि के लिए इस पीठ का आयोजन किया जाएगा। शिकागो विश्वविद्यालय भी शिकागो विश्वविद्यालय और भारत सरकार के बीच अनुसंधान क्षेत्र के विद्वानों के आदान-प्रदान की सुविधा उपलब्ध कराएगा। इस स्थायी धनराशि से राष्ट्रों के बीच धार्मिक सदभाव का संदेश फैलाने और आपसी समझ कायम करने के साथ ही मानवता की आध्यात्मिक एकरूपता कायम करने में मदद मिलेगी, जिसके लिए स्वामी विवेकानंद काम किया था।</p> <p> <br /> स्वामी विवेकानंद के अनुसार, &quot;अपने आप को शिक्षित करो, प्रत्येक व्यक्ति को उसकी वास्तविक प्रकृति के बारे में शिक्षित करो, सुसुप्त आत्मा को पुकारो और देखो कि वह कैसे जागती है। जब यह सोयी हुई आत्मा जागकर आत्मचेतना की ओर प्रवृत्त होगी तब शक्ति मिलेगी, गौरव प्राप्त होगा, अच्छायी आयेगी, शुद्धता आयेगी और वे सभी चीजें आएंगी जो विशिष्ट हैं।&quot;</p> <p> <br /> सरकार वर्तमान संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के उपदेशों को व्यवहार में लाने के लिए भी प्रयास में जुटी है। एक अरब से भी अधिक लोगों की जरूरतों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना कोई आसान कार्य तब तक नहीं है, जब तक कि देश के उन क्षेत्रों में कुछ समन्वित कार्य न किए जाएं जहां क्षमता का केन्द्र है। देश के सभी हिस्से में कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बिजली, भूतल परिवहन तथा बुनियादी सुविधाएं, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी तथा सामरिक क्षेत्र आपस में निकटतापूर्वक जुड़े हैं। यदि इन क्षेत्रों में समन्वित कार्य शुरू किया जाए तो इससे भारत की खाद्य और आर्थिक सुरक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी।</p> <p> <br /> सरकार ने एकजुट, सशक्त और आधुनिक भारत के निर्माण के काम पर जोर दिया है ताकि विवेकानंद जैसे महान चिंतकों के सपने के पूरा किया जा सके। &#39;&#39;एक भारत, श्रेष्ठ भारत&#39;&#39; के बाद &quot;सबका साथ, सबका विकास&quot; के सिद्धांत का स्थान है। ये महज नारे नहीं हैं, बल्कि जनता, विशेषकर युवाओं की प्रति एक संकल्प है, जो राष्ट्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए हैं। हाल में कई क्रांतिकारी कदम उठाये गए हैं।</p> <p> <br /> एक वैश्विक निर्माण केन्द्र के रूप में भारत को विकसित करने के उद्देश्य से &quot;मेक इन इंडिया&quot; अभियान शुरू किया गया है। &quot;डिजिटल इंडिया&quot; नामक पहल में भारत को डिजिटल रूप से एक सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में परिणत करने पर जोर दिया गया। भारतीय लोगों को भारतीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ विश्व भर में मिलने वाले अवसरों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से आवश्यक कौशल प्रदान करने के लिए &quot;कुशल भारत&quot; की शुरूआत की जा रही है। बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के उद्देश्य से स्मार्ट सिटी परियोजना सहित कई प्रयास किए गए हैं। इन सबमें &quot;स्वच्छ भारत अभियान&quot; और &quot;स्वच्छ गंगा&quot; अभियान एक स्वच्छ और हरित भारत के निर्माण के लिए शुरू किए गए हैं।</p> <p> <br /> सरकार की इन सभी पहलों के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी और उनका समर्थन आवश्यक है, क्योंकि वे इस देश के भविष्य के प्रमुख हितधारक हैं। कौशल विकास और उद्यमिता विकास ऐसे फ्लैगशिप कार्यक्रम हैं जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शुरू किए गए हैं। सरकार देश के युवाओं में सभी शक्तियां सन्निहित करने के लिए हर संभव प्रयास में जुटी है, क्योंकि एक आधुनिक और समृद्ध भारत के निर्माण के महत्वाकांक्षी कार्य के लिए यह आवश्यक है। जैसा कि स्वामी विवेकानंद ने एक बार आह्वान किया था, &quot;जागो, उठो और मंजिल तक पहुंचने से पहले मत रुको&quot;, हम सभी एकजुट हों और शुद्धता, धैर्य और दृढ़ता के साथ देश के लिए काम करें, क्योंकि स्वामी विवेकानंद ने काफी पहले इस महसूस किया था कि ये तीनों सफलता के लिए अनिवार्य हैं।<br /> &nbsp;</p>

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