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लड़कों के मुकाबले लड़कियां आजादी के बाद सबसे कम

<p> &raquo;&nbsp; देश में महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। इसकी वजह लड़कियों की उपेक्षा है।<br /> &raquo;&nbsp; लड़कों के मुकाबले बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सहयोग न मिलने से कमोवेश वे अभी भी हाशिए पर दिख रही हैं।<br /> &raquo;&nbsp; लिंग निर्धारण के जरिये बेटियों को गर्भ में मार देने की प्रथा गांव ही नहीं शहरों में बढ़ती जा रही है।<br /> &raquo;&nbsp; पूर्वोत्तर राज्यों में लड़कियों की संख्या तेजी से कम हुई<br /> &raquo;&nbsp; पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, गुजरात, तमिलनाडु, मिजोरम में स्थिति सुधरी<br /> &raquo;&nbsp; बिहार, झारखंड, यूपी आदि में लड़कियों की संख्या तेजी से कम हुईI</p> <p> <br /> <strong><u>देश : 2011: 2001</u></strong></p> <p style="margin-left: 40px;"> <br /> <span style="color:#800000;">भारत: 919: 927<br /> यूपी: 902:916<br /> पंजाब: 846: 798<br /> दिल्ली: 871: 868<br /> झारखंड: 948: 965<br /> बिहार: 935: 942<br /> जम्मू-कश्मीर: 862: 941<br /> उत्तराखंड : 890: 908<br /> गुजरात: 890: 883<br /> हिमाचल: 909: 896<br /> राजस्थान: 888: 909<br /> हरियाणा: 834: 819<br /> बंगाल: 956: 960<br /> छत्तीसगढ़: 969: 975<br /> मध्य प्रदेश: 918: 932<br /> असम: 962:965<br /> ओडिशा: 941:953<br /> महाराष्ट्र:894:913<br /> आंध्र प्रदेश: 939:961<br /> कर्नाटक: 948:946<br /> गोवा: 942:938<br /> केरल:964:960<br /> तमिलनाडु: 943:942<br /> नगालैंड: 939:964<br /> सिक्किम: 957:963<br /> अरुणाचल: 972:964<br /> मिजोरम: 970:964<br /> त्रिपुरा: 957:966<br /> मेघालय: 970: 973<br /> दमन-दीव: 904:926<br /> दादरा नगर हवेली: 926:979<br /> चंडीगढ: 880:845<br /> लक्षद्वीप: 911:959<br /> अंडमान: 968:957</span></p> <p> <br /> <strong><u>बदतर जिले---</u></strong><br /> <span style="color:#800000;">774/1000: झज्जर</span><br /> <span style="color:#800000;">778/1000: महेंद्रगढ़</span></p> <p> <br /> &raquo;&nbsp;2 हजार लड़कियां मारी जाती हैं रोजाना---------------<br /> &raquo;&nbsp;46 % बच्चे कुपोषण के शिकार 70 फीसदी इनमें लड़कियां कुपोषित<br /> &raquo;&nbsp; 29 लाख बच्चे शारीरिक अक्षमता के शिकार<br /> &raquo;&nbsp; 9.9 लाख (06-14 वर्ष) इनमें से स्कूल से बाहर<br /> &raquo;&nbsp; 48 फीसदी बौद्धिक अक्षमता के शिकार 36 फीसदी बोलने में अक्षमता के शिकार 59 फीसदी कई प्रकार की अक्षमता से पीड़ित ------<br /> &raquo;&nbsp;1.4 करोड़ को प्राथमिक शिक्षा नसीब नहीं---<br /> &raquo;&nbsp; 18 फीसदी लड़कियां प्राथमिक शिक्षा से दूर<br /> &raquo;&nbsp; 14 फीसदी लड़कों को नहीं प्राइमरी शिक्षा 5.88 करोड़ लड़कियां प्राथमिक शिक्षा स्तर के 6.37 करोड़ लड़के प्राथमिक शिक्षा स्तर के 1.6 करोड़ बच्चे स्कूल पहुंचे<br /> - 2000-2011 में महिला की साक्षरता अभी भी संतोषजनक नहीं<br /> देश : 74.4 % पुरुष: 82.14 % महिला:</p> <p> <br /> &nbsp;<strong><span style="color:#800000;">खतरे की घंटी----- 976 लड़कियां थीं 1000 लड़कों पर 1961 में, लगातार गिर रहा अनुपात I</span></strong><br /> &nbsp;</p>

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