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सीआरपीएफ जवानों की स्थिति पर रिपोर्ट

<p> &bull;&nbsp; लगातार मुश्किल हालात वाले इलाकों में तैनाती के कारण देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ के जवान खुद को सामाजिक रूप से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।</p> <p> <br /> &bull;&nbsp; तीन लाख जवानों वाली सीआरपीएफ की स्थिति को लेकर तैयार रिपोर्ट में यह बात कही गई है।</p> <p> <br /> &bull;&nbsp; रिपोर्ट के मुताबिक सीआरपीएफ जवान अपने दांपत्य और पारिवारिक मसलों को लेकर बेहद तनावपूर्ण मानसिक स्थिति से गुजर रहे हैं। साथ ही उन्हें मलाल है कि वे अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा सुनिश्चित करने में असमर्थ हैं।</p> <p> <br /> &bull;&nbsp; रिपोर्ट में अर्धसैनिक बल के जवानों के लिए उपलब्ध होने वाली कामकाजी और रहन-सहन संबंधी सुविधाओं की बदतर स्थितियों को भी उजागर किया गया है। साथ ही महिला एवं पुरुष सैनिकों के भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल संबंधी कमियों की चर्चा की गई है।</p> <p> <br /> &bull;&nbsp; रिपोर्ट के मुताबिक हर समय सीआरपीएफ के 80 से 89 फीसद जवान किसी न किसी मोर्चे पर तैनात होते हैं, इनमें से 80 से 85 फीसद जवान नक्सलवाद प्रभावित 10 राज्यों, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के उग्र्रवाद प्रभावित इलाकों में निरंतर तैनात रहते हैं।</p> <p> <br /> &bull;&nbsp; नक्सलवाद प्रभावित इलाकों में 37 फीसद, जम्मू-कश्मीर में 28 फीसद और पूर्वोत्तर में 16 फीसद जवान हमेशा तैनाती पर होते हैं।</p> <p> <br /> &bull;&nbsp; सरकार को सौंपी गई इस रिपोर्ट के मुताबिक बेहद मुश्किल और बदतर परिस्थितियों में कामकाज के साथ सीआरपीएफ जवान आम तौर पर अपने परिवार और समाज में शादी-विवाह और दुख-सुख में शामिल होने जैसी अपनी सामाजिक प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं कर पाते। इस कारण जवान सामाजिक रूप से अलगाव, परिवार से अलग-थलग महसूस करते हैं।</p> <p> <br /> &bull;&nbsp; रिपोर्ट में कहा गया है कि कामकाजी दायित्वों के चलते सामाजिक स्तर पर अलगाव के कारण जवान खुद को अपने परिवार से भी दूर महसूस करने लगते हैं।</p> <p> <br /> <strong>&quot;नहीं पढ़ पाते जवानों के बच्चे&quot;</strong><br /> &bull;&nbsp; केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों से लिए गए फीडबैक के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया कि सीआरपीएफ जवानों के वार्डों में बच्चों की शिक्षा की स्थिति बेहद खराब है, क्योंकि 85 फीसद जवानों की तैनाती ऐसे इलाकों में है जहां उन्हें अपने परिवार ले जाने की इजाजत नहीं है।</p> <p> <br /> &bull;&nbsp; इन वार्डों में किए गए एक सर्वे के मुताबिक यहां केवल 42 फीसद बच्चे मैट्रिक से आगे पढ़ाई कर पाते हैं।</p> <p> <br /> &bull;&nbsp; चौंकाने वाला तथ्य यह भी है कि देश की इस सम्मानित फोर्स के जवानों के केवल 11.33 फीसद बच्चे ही ग्र्रेजुएशन कर पाते हैं और केवल 3.54 फीसद बच्चे पोस्ट ग्रेजुएशन करते हैं।<br /> &nbsp;</p>

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