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एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल और इनके प्रति बढ़ती प्रतिरोधकता

<div> &nbsp;एंटीबायोटिक्स (जैव प्रतिरोधी दवाएं) अद्भुत दवाएं होती हैं। आठ दशक पहले उनकी खोज के बाद से इन दवाओं ने लाखों जिंदगियां बचाई हैं। दुर्भाग्य से अब ये दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं। हम अब पोस्ट एंटीबायोटिक युग का सामना कर रहे हैं। अब ऐसे संक्रमणों से मौतों का खतरा पैदा हो गया है, जिनका इलाज नहीं किया जा सकेगा। इसकी वजह यह कि अब बैक्टीरिया में इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक शक्ति पैदा हो रही है।</div> <div> &nbsp;</div> <div> आमतौर पर बैक्टीरिया खुद को माहौल के मुताबिक लगातार बदलते रहते हैं। जब बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स के संपर्क में आते हैं तो उनमें कुछ विशेषताएं पैदा होती हैं, जिनके कारण उनमें जैव प्रतिरोधी दवाओं की मौजूदगी में भी बढ़ने की क्षमता आ जाती है। यानी उन पर इन दवाओं का कोई असर नहीं होता।</div> <div> &nbsp;</div> <div> अपर्याप्त डोज, दवा का अनुचित चयन और लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल, उनमें ऐसी क्षमता विकसित होने की वजहें हैं। अनुमान है कि गलत चयन, डोज और उपचार की अवधि के आधार पर दो-तिहाई एंटीबायोटिक दवाओं का गलत इस्तेमाल हो रहा है। इनके इस्तेमाल के बाद बैक्टीरिया में प्रतिरोधी ताकत विकसित होना अपरिहार्य है। इतना ही नहीं, इससे बैक्टीरिया में ऐसी अन्य दवाओं के खिलाफ भी प्रतिरोधकता पैदा हो सकती है। यह क्षमता दूसरे बैक्टीरिया में भी जा सकती है। हमारी आंतों में लाखों बैक्टीरिया होते हैं। जब एंटीबायोटिक दवाएं ली जाती हैं तो उनमें प्रतिरोधकता पैदा हो जाती है। ऐसे बैक्टीरिया एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं।</div> <div> &nbsp;</div>

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